ओडिशा में हो रहा अवैध बॉक्साइट खनन: कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा, कहा- जनजातीय मंत्री आखिर क्यों हैं चुप?
कांग्रेस ने केंद्र सरकार को ओडिशा में हो रहा अवैध बॉक्साइट खनन के मामले में घेरा। कांग्रेस ने कहा कि इस मामले पर जनजातीय मंत्री चुप क्यों हैं ? उन्होंने चिंता करना चाहिए कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह के आंदोलन क्यों हो रहे हैं?
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कांग्रेस ने मंगलवार को मोदी सरकार पर हमला है। दरअसल,ओडिशा के कोरापुट जिले में ग्रामीणों ने बॉक्साइट खनन के लिए ‘बुलडोजर से मंजूरी’ देने के कानून के कथित उल्लंघन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों हो रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम को इस बात की चिंता करनी चाहिए कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह के आंदोलन क्यों हो रहे हैं?
कांग्रेस का क्या दावा?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि बॉक्साइट खनन के लिए भूमि अधिग्रहण को ध्वस्त करने के लिए कानून के उल्लंघन के खिलाफ ओडिशा के ग्रामीणों का नया विरोध प्रदर्शन इस समय कोरापुट जिले में चल रहा है। रमेश ने दावा किया कि कलिंगा एल्युमिना लिमिटेड पर लगभग 400 एकड़ वन भूमि को अवैध रूप से मोड़ने का आरोप लगाया जा रहा है, जिस पर आंदोलनकारियों को वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत पारंपरिक और आध्यात्मिक अधिकार प्राप्त हैं।
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रमेश ने एक्स पर कहा 'ग्रामीणों का दावा है कि कंपनी और जिला अधिकारियों ने ग्राम सभा की मंजूरी प्राप्त करने के लिए घोर धोखाधड़ी का सहारा लिया है, जिसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है। कलिंगा एल्युमिना और वेदांता दोनों पर कालाहांडी और रायगड़ा जिलों में इसी तरह के आरोप लगे हैं।"
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कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव ने कहा, 'कलिंगा एल्युमिना लिमिटेड की साख निःसंदेह है। यह विशाल और निरंतर विस्तारशील मोदानी साम्राज्य का हिस्सा है।' रमेश ने बताया कि जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री वन अधिकार अधिनियम, 2006 के शाब्दिक और भावपूर्ण कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार हैं। रमेश ने कहा, 'वह खुद ओडिशा से हैं। निश्चित रूप से, उन्हें इन विरोध प्रदर्शनों और राज्य के अलग स्थानों पर इनके होने के कारणों के बारे में अधिक चिंतित होना चाहिए।'
क्या है पूरा मामला?
उनकी यह टिप्पणी ओडिशा के कोरापुट जिले के ग्रामीणों के हवाले से आई मीडिया रिपोर्टों के बीच आई है, जिसमें कहा गया है कि नागेश्वरी वन अभ्यारण्य में बलदा हिल से बॉक्साइट खनन के लिए अडानी से जुड़ी एक कंपनी को मंजूरी देने वाली ग्राम सभाएं 'धोखाधड़ी' से आयोजित की गई थीं और खनन को मंजूरी देने वाले प्रस्तावों में ग्रामीणों के जाली हस्ताक्षर हैं।