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मिशन 2029: संजय राउत की सलाह-समय रहते तय हो विपक्षी गठबंधन का प्रधानमंत्री चेहरा; महाराष्ट्र चुनाव से लें सबक
पीटीआई, मुंबई
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 08 Jun 2026 07:45 PM IST
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सार
संजय राउत ने 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए इंडी गठबंधन से प्रधानमंत्री पद का चेहरा पहले ही घोषित करने की मांग की है। उन्होंने महाराष्ट्र चुनाव के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि चेहरा न होने से नुकसान होता है। इसके साथ ही दिल्ली में 22 विपक्षी दलों ने बैठक कर चुनाव प्रणाली और नीट विवाद पर सरकार को घेरा है।
संजय राउत शिवसेना सांसद
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
दिल्ली में विपक्षी इंडी गठबंधन की अहम बैठक के बीच शिव सेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि विपक्ष को साल 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए अभी से प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित कर देना चाहिए। राउत ने कहा कि विपक्ष पूरी तरह एकजुट है। वह कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में अपनी आगे की रणनीति तय करेगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सूत्री एजेंडा
संजय राउत ने कहा कि करीब दो दर्जन दलों वाले इस गठबंधन का एकमात्र मकसद सत्ता से भ्रष्टाचारियों और जनता को लूटने वालों को बाहर करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही देश की जनता के 'मन की बात' है और यही गठबंधन का एक सूत्री एजेंडा होना चाहिए। राउत के अनुसार, विपक्षी गठबंधन को 2029 का आम चुनाव एक तय प्रधानमंत्री उम्मीदवार के चेहरे को आगे रखकर ही लड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि शिव सेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का भी शुरू से यही रुख रहा है।
यह भी पढ़ें: Explainer: सदन दर सदन टूटती टीएमसी, काकोली के दावे निकले सही तो क्या ममता का होगा उद्धव जैसा हाल?
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महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों से सबक
अपने इस तर्क के पीछे राउत ने हालिया चुनावी अनुभवों का हवाला दिया। उन्होंने माना कि साल 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित न करना भारी पड़ा। चेहरा सामने न होने के कारण गठबंधन की चुनावी संभावनाओं को कुछ हद तक नुकसान पहुंचा। इसी गलती से सबक लेते हुए वे अब राष्ट्रीय स्तर पर समय रहते चेहरा तय करने की मांग कर रहे हैं।
बैठक में उठे चुनावी और छात्र हित के मुद्दे
सोमवार को नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में विपक्षी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल सहित 22 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। बैठक में मतदाता सूचियों के एसआईआर और वोटों की लूट के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही, नीट-सीबीएसई विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग भी की गई।
भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सूत्री एजेंडा
संजय राउत ने कहा कि करीब दो दर्जन दलों वाले इस गठबंधन का एकमात्र मकसद सत्ता से भ्रष्टाचारियों और जनता को लूटने वालों को बाहर करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही देश की जनता के 'मन की बात' है और यही गठबंधन का एक सूत्री एजेंडा होना चाहिए। राउत के अनुसार, विपक्षी गठबंधन को 2029 का आम चुनाव एक तय प्रधानमंत्री उम्मीदवार के चेहरे को आगे रखकर ही लड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि शिव सेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का भी शुरू से यही रुख रहा है।
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महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों से सबक
अपने इस तर्क के पीछे राउत ने हालिया चुनावी अनुभवों का हवाला दिया। उन्होंने माना कि साल 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित न करना भारी पड़ा। चेहरा सामने न होने के कारण गठबंधन की चुनावी संभावनाओं को कुछ हद तक नुकसान पहुंचा। इसी गलती से सबक लेते हुए वे अब राष्ट्रीय स्तर पर समय रहते चेहरा तय करने की मांग कर रहे हैं।
बैठक में उठे चुनावी और छात्र हित के मुद्दे
सोमवार को नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में विपक्षी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल सहित 22 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। बैठक में मतदाता सूचियों के एसआईआर और वोटों की लूट के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही, नीट-सीबीएसई विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग भी की गई।