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West Asia: 'ईरान-अमेरिका के बीच भारत निभा सकता है मध्यस्थ की भूमिका', रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कही ये बात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Fri, 15 May 2026 02:06 PM IST
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सार

भारत दौरे पर आए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि पाकिस्तान फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत स्थापित कराने में मदद कर रहा है, लेकिन अगर लंबे समय के लिए किसी स्थायी मध्यस्थ की जरूरत पड़ी तो भारत यह भूमिका निभा सकता है। उन्होंने भारत की कूटनीतिक क्षमता और वैश्विक अनुभव की सराहना की।

India can play the role of mediator between Iran and America, said Russian Foreign Minister Lavrov
सर्गेई लावरोव, रूसी विदेश मंत्री - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

भारत दौरे पर आए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान भारत की कूटनीतिक भूमिका की सराहना की। उनके बयान का अनुवाद से जानकारी मिली की पाकिस्तान फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत स्थापित करने में मदद कर रहा है, ताकि मौजूदा तनाव और जरूरी मुद्दों का समाधान निकाला जा सके। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर लंबे समय के लिए किसी स्थायी मध्यस्थ की जरूरत पड़ती है, तो यह भूमिका भारत निभा सकता है। रूस की ओर से कहा गया कि भारत के पास व्यापक कूटनीतिक अनुभव है और वैश्विक स्तर पर संवाद स्थापित करने की क्षमता भी है।
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भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी पर क्या बोले?

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि भारत और रूस विशेष रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर काम कर रहे हैं, ताकि दोनों देशों के व्यापार और निवेश पर तीसरे देशों के अमित्र दबाव और प्रतिबंधों का असर कम किया जा सके।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में लावरोव ने बताया कि उनकी विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विस्तार से बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हुई चर्चा में उन प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस किया गया, जिन पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई पिछली शिखर बैठकों में सहमति बनी थी।

भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य

लावरोव ने कहा कि भारत और रूस ने व्यापार, अर्थव्यवस्था और निवेश के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया है। दोनों देश ऐसे तंत्र विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और आर्थिक दबावों पर निर्भरता कम हो सके।



उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही परिवहन गलियारों और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई, ताकि आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा मिल सके।

रूसी विदेश मंत्री के बयान को अमेरिका की ओर से लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ और अन्य आर्थिक प्रतिबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि भारत और रूस वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच वैकल्पिक वित्तीय और व्यापारिक व्यवस्था विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।
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