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भारत-चीन विवाद: अगले दौर की कोर कमांडर स्तर की बातचीत की तारीख तय नहीं, ड्रैगन के जवाब का इंतजार 

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 06 Jan 2022 10:58 PM IST
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सार

अक्टूबर में कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ता का 13वां दौर भारतीय सेना के साथ गतिरोध में समाप्त हुआ था। भारतीय सेना के सुझाव चीन को मंजूर नहीं थे।  

India, China yet to finalise date for next round of Corps Commander-level talks
भारत चीन गतिरोध - फोटो : iStock
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विस्तार

भारत और चीन ने अभी तक पूर्वी लद्दाख सीमा पंक्ति पर कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता के अगले दौर की तारीख को अंतिम रूप नहीं दिया है। चीनी सेना के भारतीय प्रस्ताव पर जल्द जवाब देने की उम्मीद है। मामले से परिचित लोगों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष ने 14वें दौर की सैन्य वार्ता के लिए चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को कम से कम दो प्रस्ताव भेजे, लेकिन चीन की ओर से अभी जवाब देना बाकी है।

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अक्तूबर में हुआ था वार्ता का 13वां दौर  
जानकारों ने कहा कि भारतीय प्रस्तावों में वार्ता के लिए एक संभावित व्यापक ढांचा और एजेंडा आइटम शामिल हैं। अक्टूबर में कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ता का 13वां दौर भारतीय सेना के साथ गतिरोध में समाप्त हुआ था और उसके रचनात्मक सुझाव चीनी पक्ष के लिए स्वीकार्य नहीं थे। 18 नवंबर को अपनी वर्चुअल राजनयिक वार्ता में भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में बाकी संघर्ष वाली जगहों पर डिसइंगेजमेंट के उद्देश्य को हासिल करने के लिए 14 वें दौर की सैन्य वार्ता को जल्द से जल्द आयोजित करने पर सहमत हुए थे।
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चीन से नहीं मिला कोई जवाब
हालांकि, कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता के 14वें दौर के आयोजन पर चीनी पक्ष की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। नवंबर में राजनयिक वार्ता में इसे जल्द से जल्द करने पर सहमति बनी थी। चीनी पक्ष गतिरोध को हल करने में देरी की रणनीति अपना रहा है। भारत पूर्वी लद्दाख में सभी संघर्ष वाली जगहों पर पूरी तरह से सेना को हटाने पर जोर दे रहा है।

पैंगोंग झील क्षेत्रों में हिंसक झड़प के बाद 5 मई, 2020 को भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध शुरू हो गया था। दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे हजारों सैनिकों के साथ-साथ भारी हथियारों को लेकर तैनाती बढ़ा दी। सैन्य और कूटनीतिक वार्ता की एक श्रृंखला के बाद दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट पर और गोगरा क्षेत्र में सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया पूरी की। अभी संवेदनशील क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देशों के लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं।

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