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खास खबरः देश के पहले शब्द संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे अमित शाह, पीएम मोदी ने साल 2021 में की थी इसकी परिकल्पना
सार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज देश के पहले शब्द संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे। इस संग्रहालय में देश की 22 भाषाओं की यात्रा को दर्शाया गया है। पीएम मोदी ने साल 2021 में पहली बार इस संग्रहालय की परिकल्पना की थी। आइए जानते हैं कि क्या खास है इसमें
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शब्द संग्रहालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत की भाषाई विरासत, शब्दों की विकास यात्रा और ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से एक ही छत के नीचे देखने का अवसर अब लोगों को मिलेगा। कोलकाता के राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर में बने देश के पहले शब्द संग्रहालय (म्यूजियम ऑफ वर्ड) का उद्घाटन रविवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2021 की परिकल्पना पर विकसित इस संग्रहालय में 22 भारतीय भाषाओं, नौ अत्याधुनिक डिजिटल गैलरियों और इंटरएक्टिव तकनीक के जरिए भाषा और शब्दों की हजारों वर्षों की यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इसे देश का ही नहीं बल्कि विश्व का पहला अपनी तरह का संग्रहालय माना जा रहा है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य केवल भारतीय भाषाओं या साहित्य का इतिहास बताना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि भाषा ने भारतीय सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के विकास में किस तरह केंद्रीय भूमिका निभाई। संग्रहालय 15 अगस्त तक आम लोगों के लिए नि:शुल्क खुला रहेगा।
पीएम मोदी की परिकल्पना को मिला आकार
राष्ट्रीय पुस्तकालय के लाइब्रेरियन एवं इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (एलआईओ) पी.एस. दास ने अमर उजाला को बताया कि वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय पुस्तकालय दौरे के दौरान उनके मन में इस संग्रहालय की परिकल्पना
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आई थी। उसी सोच को संस्कृति मंत्रालय ने साकार किया है। उन्होंने बताया कि संग्रहालय का उद्देश्य 22 भारतीय भाषाओं की उत्पत्ति, विकास और सांस्कृतिक योगदान को एक मंच पर लाना है। उनके अनुसार यह केवल भाषाओं का संग्रहालय नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा की भी डिजिटल प्रस्तुति है।
भाषा की हजारों वर्षों की यात्रा एक छत के नीचे
संग्रहालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, यह संग्रहालय केवल साहित्य तक सीमित नहीं है। इसमें भाषा की वैश्विक यात्रा, विभिन्न सभ्यताओं के बीच उसके सेतु बनने और ज्ञान के आदान-प्रदान की कहानी आधुनिक तकनीक के माध्यम
से प्रस्तुत की गई है। पूरी तरह डिजिटाइज्ड संग्रहालय में नौ थीम आधारित गैलरियां हैं, जिनमें भारतीय भाषाओं और लिपियों का विकास, प्राचीन पांडुलिपियां, मुद्रण परंपरा, ज्ञान-विज्ञान, मौखिक परंपराएं और भारत में ग्रंथालय संस्कृति के विकास को इंटरएक्टिव तरीके से दर्शाया गया है। एक विशेष गैलरी राष्ट्रीय पुस्तकालय के इतिहास और उसके योगदान को समर्पित है।
एक क्लिक पर जीवंत हो उठेगा मंच
अधिकारियों के अनुसार, संग्रहालय की सबसे आकर्षक 'नवरस गैलरी' है, जहां होलोग्राफी तकनीक का उपयोग किया गया है। किसी भी रस का चयन करते ही सामने बना मंच जीवंत हो उठता है और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति वास्तविक अनुभव का अहसास कराती है। बच्चों और युवाओं के लिए आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) आधारित इंटरएक्टिव प्रणाली भी विकसित की गई है। किसी पुस्तक को विशेष रीडर पर रखते ही उससे जुड़ी जानकारी और डिजिटल सामग्री स्क्रीन पर स्वतः दिखाई देने लगती है।
क्यों खास है 'म्यूजियम ऑफ वर्ड'
संग्रहालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना राष्ट्रीय पुस्तकालय और संस्कृति मंत्रालय के अधीन नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम के संयुक्त प्रयास से तैयार हुई है। राष्ट्रीय पुस्तकालय ने शोध सामग्री और ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध कराए, जबकि साइंस म्यूजियम ने तकनीकी डिजाइन और डिजिटल प्रस्तुति विकसित की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संग्रहालय केवल पर्यटन का नया आकर्षण नहीं होगा, बल्कि भारतीय भाषाओं, साहित्य और ज्ञान परंपरा के अध्ययन का राष्ट्रीय केंद्र भी बनेगा।
नई पीढ़ी को भारतीय भाषाओं से जोड़ने और देश की भाषाई धरोहर के संरक्षण की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
शब्द संग्रहालय की प्रमुख बातें
यह संग्रहालय राष्ट्रीय पुस्तकालय, बेल्वेडियर एस्टेट, कोलकाता में स्थित है। यह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन आता है, जिसमें कुल नौ गैलरियां हैं। इस संग्रहालय में 22 भारतीय भाषाओं की विकास यात्रा दिखाई गई है। इस संग्रहालय का प्रमुख आकर्षण नवरस गैलरी, होलोग्राफी तकनीक और आरएफआईडी आधारित इंटरएक्टिव अनुभव है। इस संग्रहालय को बनाने में नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम ने तकनीकी सहयोग किया है।
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इसे देश का ही नहीं बल्कि विश्व का पहला अपनी तरह का संग्रहालय माना जा रहा है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य केवल भारतीय भाषाओं या साहित्य का इतिहास बताना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि भाषा ने भारतीय सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के विकास में किस तरह केंद्रीय भूमिका निभाई। संग्रहालय 15 अगस्त तक आम लोगों के लिए नि:शुल्क खुला रहेगा।
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पीएम मोदी की परिकल्पना को मिला आकार
राष्ट्रीय पुस्तकालय के लाइब्रेरियन एवं इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (एलआईओ) पी.एस. दास ने अमर उजाला को बताया कि वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय पुस्तकालय दौरे के दौरान उनके मन में इस संग्रहालय की परिकल्पना
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आई थी। उसी सोच को संस्कृति मंत्रालय ने साकार किया है। उन्होंने बताया कि संग्रहालय का उद्देश्य 22 भारतीय भाषाओं की उत्पत्ति, विकास और सांस्कृतिक योगदान को एक मंच पर लाना है। उनके अनुसार यह केवल भाषाओं का संग्रहालय नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा की भी डिजिटल प्रस्तुति है।
भाषा की हजारों वर्षों की यात्रा एक छत के नीचे
संग्रहालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, यह संग्रहालय केवल साहित्य तक सीमित नहीं है। इसमें भाषा की वैश्विक यात्रा, विभिन्न सभ्यताओं के बीच उसके सेतु बनने और ज्ञान के आदान-प्रदान की कहानी आधुनिक तकनीक के माध्यम
से प्रस्तुत की गई है। पूरी तरह डिजिटाइज्ड संग्रहालय में नौ थीम आधारित गैलरियां हैं, जिनमें भारतीय भाषाओं और लिपियों का विकास, प्राचीन पांडुलिपियां, मुद्रण परंपरा, ज्ञान-विज्ञान, मौखिक परंपराएं और भारत में ग्रंथालय संस्कृति के विकास को इंटरएक्टिव तरीके से दर्शाया गया है। एक विशेष गैलरी राष्ट्रीय पुस्तकालय के इतिहास और उसके योगदान को समर्पित है।
एक क्लिक पर जीवंत हो उठेगा मंच
अधिकारियों के अनुसार, संग्रहालय की सबसे आकर्षक 'नवरस गैलरी' है, जहां होलोग्राफी तकनीक का उपयोग किया गया है। किसी भी रस का चयन करते ही सामने बना मंच जीवंत हो उठता है और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति वास्तविक अनुभव का अहसास कराती है। बच्चों और युवाओं के लिए आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) आधारित इंटरएक्टिव प्रणाली भी विकसित की गई है। किसी पुस्तक को विशेष रीडर पर रखते ही उससे जुड़ी जानकारी और डिजिटल सामग्री स्क्रीन पर स्वतः दिखाई देने लगती है।
क्यों खास है 'म्यूजियम ऑफ वर्ड'
संग्रहालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना राष्ट्रीय पुस्तकालय और संस्कृति मंत्रालय के अधीन नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम के संयुक्त प्रयास से तैयार हुई है। राष्ट्रीय पुस्तकालय ने शोध सामग्री और ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध कराए, जबकि साइंस म्यूजियम ने तकनीकी डिजाइन और डिजिटल प्रस्तुति विकसित की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संग्रहालय केवल पर्यटन का नया आकर्षण नहीं होगा, बल्कि भारतीय भाषाओं, साहित्य और ज्ञान परंपरा के अध्ययन का राष्ट्रीय केंद्र भी बनेगा।
नई पीढ़ी को भारतीय भाषाओं से जोड़ने और देश की भाषाई धरोहर के संरक्षण की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
शब्द संग्रहालय की प्रमुख बातें
यह संग्रहालय राष्ट्रीय पुस्तकालय, बेल्वेडियर एस्टेट, कोलकाता में स्थित है। यह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन आता है, जिसमें कुल नौ गैलरियां हैं। इस संग्रहालय में 22 भारतीय भाषाओं की विकास यात्रा दिखाई गई है। इस संग्रहालय का प्रमुख आकर्षण नवरस गैलरी, होलोग्राफी तकनीक और आरएफआईडी आधारित इंटरएक्टिव अनुभव है। इस संग्रहालय को बनाने में नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम ने तकनीकी सहयोग किया है।