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V Narayanan: ISRO चीफ बोले- भारत को अगले तीन वर्षों में तीन गुना बढ़ानी होगी अंतरिक्ष में उपग्रहों की संख्या
Fri, 25 Jul 2025 06:28 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 25 Jul 2025 06:28 PM IST
सार
V Narayanan: इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि भारत को अगले तीन वर्षों में अपने 55 उपग्रहों की संख्या को तीन गुना करना होगा, ताकि बढ़ती मांगों को पूरा किया जा सके। उन्होंने बताया कि भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा और 2028 में उसका पहला मॉड्यूल लॉन्च किया जाएगा। नारायणन ने यह भी कहा कि इसरो जापान के साथ मिलकर चंद्रयान-5 मिशन पर काम कर रहा है और अगले तीन महीनों में अमेरिका का संचार उपग्रह भी भारतीय रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा।
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इसरो प्रमुख वी. नारायणन
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख वी. नारायणन ने शुक्रवार को कहा कि भारत अगले तीन वर्षों के भीतर अंतरिक्ष में मौजूद अपने उपग्रहों की संख्या को तीन गुना बढ़ाना होगा, जिनकी संख्या वर्तमान में 55 है। 'भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम – उपलब्धियां, चुनौतियां और भविष्य की दिशा' विषय पर अपने संबोधन में नारायणन ने कहा कि 2040 तक भारत अंतरिक्ष तकनीक, अनुप्रयोग क्षेत्र और बुनियादी ढांचे के मामले में दुनिया के किसी भी देश के बराबर होगा।
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मांग बहुत ज्यादा, नए उपग्रह बनाने होंगे
उन्होंने बताया कि इसरो इस साल 12 लॉन्च व्हीकल मिशन की योजना बना रहा है। अगला मिशन नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) 30 जुलाई को भारत के जीएसएलवी एफ16 द्वारा लॉन्च किया जाएगा। नारायणन ने कहा, हम अभी अपना खुद का स्पेस स्टेशन बना रहे हैं। हमारा अपना चंद्रयान लैंडिंग मिशन भी होगा। इस समय अंतरिक्ष में 55 उपग्रह देश के आम लोगों की सेवा कर रहे हैं। अगले तीन वर्षों में इनकी संख्या लगभग तीन गुना होनी चाहिए। मांग बहुत अधिक है, इसलिए हमें नए उपग्रह बनाने होंगे और हम उस दिशा में काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इसरो इस साल 12 लॉन्च व्हीकल मिशन की योजना बना रहा है। अगला मिशन नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) 30 जुलाई को भारत के जीएसएलवी एफ16 द्वारा लॉन्च किया जाएगा। नारायणन ने कहा, हम अभी अपना खुद का स्पेस स्टेशन बना रहे हैं। हमारा अपना चंद्रयान लैंडिंग मिशन भी होगा। इस समय अंतरिक्ष में 55 उपग्रह देश के आम लोगों की सेवा कर रहे हैं। अगले तीन वर्षों में इनकी संख्या लगभग तीन गुना होनी चाहिए। मांग बहुत अधिक है, इसलिए हमें नए उपग्रह बनाने होंगे और हम उस दिशा में काम कर रहे हैं।
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चंद्रयान-5 पर काम कर रहे इसरो और जापानी एजेंसी
बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि भारत 2035 तक एक पूरा अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा और उसका पहला मॉड्यूल 2028 में कक्षा में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार को लेकर काफी काम चल रहा है। पहले इसरो सेवा आधारित मॉडल पर काम करता था, लेकिन अब वह व्यावसायिक अवसरों को भी अपनाना चाहता है। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद जापान ने भारत के साथ साझेदारी की इच्छा जताई, जिसके तहत इसरो और जापानी एजेंसी जैक्सा मिलकर चंद्रयान-5/लूपेक्स मिशन पर काम कर रहे हैं।
चंद्रयान-5 पर काम कर रहे इसरो और जापानी एजेंसी
बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि भारत 2035 तक एक पूरा अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा और उसका पहला मॉड्यूल 2028 में कक्षा में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार को लेकर काफी काम चल रहा है। पहले इसरो सेवा आधारित मॉडल पर काम करता था, लेकिन अब वह व्यावसायिक अवसरों को भी अपनाना चाहता है। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद जापान ने भारत के साथ साझेदारी की इच्छा जताई, जिसके तहत इसरो और जापानी एजेंसी जैक्सा मिलकर चंद्रयान-5/लूपेक्स मिशन पर काम कर रहे हैं।
अमेरिका का उपग्रह को लॉन्च करेगा इसरो
नारायणन ने कहा, हम मिलकर उपग्रह बना रहे हैं और लॉन्च जापान करेगा। चंद्रयान-3 का लैंडर 1,600 किलोग्राम का था, लेकिन यह नया मिशन 6,600 किलोग्राम का होगा। हम इस पर काम कर रहे हैं और अगले दो साल में बड़ी खबर मिलेगी। उन्होंने बताया कि इसरो अगले तीन महीनों में अमेरिका का 6,500 किलोग्राम का संचार उपग्रह भारतीय रॉकेट से लॉन्च करेगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने श्रीहरिकोटा में तीसरा लॉन्चपैड बनाने के लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।
ये भी पढ़ें: 'जनता से माफी मांगें सिद्धारमैया और शिवकुमार..', चुनाव आयोग पर हमला करने को लेकर बोले विजयेंद्र
नारायणन ने कहा, हम मिलकर उपग्रह बना रहे हैं और लॉन्च जापान करेगा। चंद्रयान-3 का लैंडर 1,600 किलोग्राम का था, लेकिन यह नया मिशन 6,600 किलोग्राम का होगा। हम इस पर काम कर रहे हैं और अगले दो साल में बड़ी खबर मिलेगी। उन्होंने बताया कि इसरो अगले तीन महीनों में अमेरिका का 6,500 किलोग्राम का संचार उपग्रह भारतीय रॉकेट से लॉन्च करेगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने श्रीहरिकोटा में तीसरा लॉन्चपैड बनाने के लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।
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इसरो ने 10 वर्षों में लॉन्च किए 518 उपग्रह
इसरो प्रमुख के मुताबिक, गगनयान मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 2027 की पहली तिमाही में अंतरिक्ष में भेजने की योजना है। इसरो अब तक 34 ऐसे देशों के 433 उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचा चुका है, जिनके पास खुद की अंतरिक्ष तकनीक नहीं है। नारायणन ने बताया कि पिछले दस वर्षों में इसरो ने कुल 518 उपग्रह लॉन्च किए हैं। इसरो प्रमुख और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को प्रतिष्ठित जी.पी. बिड़ला स्मारक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
इसरो प्रमुख के मुताबिक, गगनयान मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 2027 की पहली तिमाही में अंतरिक्ष में भेजने की योजना है। इसरो अब तक 34 ऐसे देशों के 433 उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचा चुका है, जिनके पास खुद की अंतरिक्ष तकनीक नहीं है। नारायणन ने बताया कि पिछले दस वर्षों में इसरो ने कुल 518 उपग्रह लॉन्च किए हैं। इसरो प्रमुख और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को प्रतिष्ठित जी.पी. बिड़ला स्मारक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।