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डिजिटल आत्मनिर्भरता: भारत को मिला अपना सुरक्षित राष्ट्रीय समय नेटवर्क, विदेशी प्रणालियों से मिलेगी मुक्ति
Sun, 19 Jul 2026 04:35 AM IST
राकेश कुमार
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 19 Jul 2026 04:35 AM IST
सार
भारत ने तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपना खुद का सुरक्षित 'राष्ट्रीय समय नेटवर्क' लॉन्च कर दिया है। एडवांस्ड 'व्हाइट रैबिट तकनीक' पर आधारित यह प्रणाली बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली ग्रिड और रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को बेहद सटीक 'भारतीय मानक समय' प्रदान करेगी। इस पहल से न केवल देश की डिजिटल और साइबर सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक समय प्रणालियों पर भारत की निर्भरता भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
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वन नेशन, वन टाइम
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सरकार ने देश में एक नया राष्ट्रीय समय नेटवर्क शुरू किया है, जो व्हाइट रैबिट तकनीक के जरिये बेहद सटीक और सुरक्षित भारतीय मानक समय (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) उपलब्ध कराएगा। इसका उद्देश्य बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली, परिवहन और डिजिटल सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी समय प्रणालियों पर निर्भरता कम करना है।
डिजिटल सेवाओं में बढ़ेगी समय की सटीकता
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बंगलूरू की क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला (आरआरएसएल) में इस नेटवर्क की शुरुआत की। यह परियोजना उपभोक्ता मंत्रालय, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल) और इसरो की संयुक्त पहल है। यह प्रणाली व्हाइट रैबिट तकनीक के जरिये राष्ट्रीय समय मानक यूटीसी (एनपीएलआई) से जुड़े भारतीय मानक समय का सटीक प्रसारण करेगी।
इससे बैंकिंग, शेयर बाजार, मोबाइल नेटवर्क, बिजली ग्रिड और सरकारी डिजिटल सेवाओं में समय की सटीकता बढ़ेगी। सरकार ने सीएसआईआर-एनपीएल, इसरो, सेबी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बीएसएनएल के साथ मिलकर बंगलूरू से एनएसई के चेन्नई केंद्र तक सुरक्षित समय प्रसारण का सफल परीक्षण भी पूरा किया है।
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यह भी पढ़ें: फर्जी OMR शीट पर NTA सख्त: AI दस्तावेजों पर होगी कानूनी कार्रवाई, छात्रों के माता-पिता के लिए क्या अहम सलाह?
वन नेशन, वन टाइम
16 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जोशी ने इसरो मुख्यालय में वन नेशन, वन टाइम परियोजना की समीक्षा की थी। उन्होंने कहा, देश का अपना भरोसेमंद समय स्रोत उपभोक्ता संरक्षण, निष्पक्ष व्यापार, साइबर सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करेगा। यह परियोजना भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाएगी और सटीक समय प्रसारण के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल होने में मदद करेगी।
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डिजिटल सेवाओं में बढ़ेगी समय की सटीकता
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बंगलूरू की क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला (आरआरएसएल) में इस नेटवर्क की शुरुआत की। यह परियोजना उपभोक्ता मंत्रालय, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल) और इसरो की संयुक्त पहल है। यह प्रणाली व्हाइट रैबिट तकनीक के जरिये राष्ट्रीय समय मानक यूटीसी (एनपीएलआई) से जुड़े भारतीय मानक समय का सटीक प्रसारण करेगी।
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इससे बैंकिंग, शेयर बाजार, मोबाइल नेटवर्क, बिजली ग्रिड और सरकारी डिजिटल सेवाओं में समय की सटीकता बढ़ेगी। सरकार ने सीएसआईआर-एनपीएल, इसरो, सेबी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बीएसएनएल के साथ मिलकर बंगलूरू से एनएसई के चेन्नई केंद्र तक सुरक्षित समय प्रसारण का सफल परीक्षण भी पूरा किया है।
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वन नेशन, वन टाइम
16 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जोशी ने इसरो मुख्यालय में वन नेशन, वन टाइम परियोजना की समीक्षा की थी। उन्होंने कहा, देश का अपना भरोसेमंद समय स्रोत उपभोक्ता संरक्षण, निष्पक्ष व्यापार, साइबर सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करेगा। यह परियोजना भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाएगी और सटीक समय प्रसारण के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल होने में मदद करेगी।