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पश्चिम एशिया संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बाधित, भारत ने बदली रणनीति; रूस से तेल खरीद 50 फीसदी बढ़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, न
Published by: Nirmal Kant
Updated Wed, 11 Mar 2026 10:15 PM IST
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सार
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। मार्च में भारत की रूसी तेल खरीद लगभग 50 फीसदी बढ़कर करीब 15 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई है। तेल और गैस की कमी से बचने के लिए भारत रूस समेत दूसरे देशों से भी ऊर्जा आपूर्ति के नए स्रोत तलाश रहा है। पढ़िए रिपोर्ट-
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। मार्च में भारत की रूसी तेल खरीद लगभग 50 फीसदी बढ़ गई है। जहाजों की आवाजाही के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने भारत ने रूस से लगभग 15 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा है। फरवरी में यह मात्रा लगभग 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन थी।
भारत में रोजाना लगभगत 58 लाख बैरल तेल की खपत
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयात करने वाला देश है। अपनी जरूरत का करीब 88 फीसदी तेल भारत विदेश से खरीदता है। देश में रोज लगभग 58 लाख बैरल तेल की खपत होती है। इसमें से 25 से 27 लाख बैरल तेल सऊदी अरब, इराक और जैसे मध्य पूर्वी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है।
इसी मार्ग से भारत की लगभग 55 फीसदी रसोई गैस और करीब 30 फीसदी तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) भी आती है। इस गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक बनाने, सीएनजी और घरेलू खाना पकाने में होता है।
रूस से आने वाले तेल में बढ़ोतरी
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण इस जलमार्ग से तेल और गैस की आपूर्ति काफी हद तक रुक गई है। इसके चलते भारत को रूस जैसे दूसरे स्रोतों से कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा है। ऊर्जा बाजार के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि मार्च में भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य के मार्ग से लगभग 26 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब रूस से आने वाले तेल में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
ये भी पढ़ें: खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की होगी जल्द वापसी: एअर इंडिया कल से शुरू करेगा उड़ानें, यहां देखें शेड्यूल
उन्होंने कहा कि जहाजों के आंकड़ों और बाजार की जानकारी के आधार पर मार्च में रूस से कच्चे तेल का आयात फरवरी के मुकाबले 10 से 12 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ सकता है। इससे होर्मुज मार्ग में आई कमी का कुछ असर कम हो सकता है।
साल 2025 में भारत से परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात औसतन लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन रहा है। इसके साथ ही भारत अन्य देशों से भी कच्चा तेल खरीदकर आपूर्ति के स्रोत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
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भारत में रोजाना लगभगत 58 लाख बैरल तेल की खपत
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयात करने वाला देश है। अपनी जरूरत का करीब 88 फीसदी तेल भारत विदेश से खरीदता है। देश में रोज लगभग 58 लाख बैरल तेल की खपत होती है। इसमें से 25 से 27 लाख बैरल तेल सऊदी अरब, इराक और जैसे मध्य पूर्वी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है।
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इसी मार्ग से भारत की लगभग 55 फीसदी रसोई गैस और करीब 30 फीसदी तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) भी आती है। इस गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक बनाने, सीएनजी और घरेलू खाना पकाने में होता है।
रूस से आने वाले तेल में बढ़ोतरी
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण इस जलमार्ग से तेल और गैस की आपूर्ति काफी हद तक रुक गई है। इसके चलते भारत को रूस जैसे दूसरे स्रोतों से कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा है। ऊर्जा बाजार के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि मार्च में भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य के मार्ग से लगभग 26 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब रूस से आने वाले तेल में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
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उन्होंने कहा कि जहाजों के आंकड़ों और बाजार की जानकारी के आधार पर मार्च में रूस से कच्चे तेल का आयात फरवरी के मुकाबले 10 से 12 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ सकता है। इससे होर्मुज मार्ग में आई कमी का कुछ असर कम हो सकता है।
साल 2025 में भारत से परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात औसतन लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन रहा है। इसके साथ ही भारत अन्य देशों से भी कच्चा तेल खरीदकर आपूर्ति के स्रोत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
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