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भारत-अमेरिका साझेदारी होगी और मजबूत: अजीत डोभाल से मिले अमेरिकी राजदूत गोर, वैश्विक सुरक्षा पर हुई चर्चा
Tue, 11 Aug 2026 05:55 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Tue, 11 Aug 2026 05:55 PM IST
सार
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अजीत डोभाल से मुलाकात कर भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा की। गोर ने वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भारत की अहमियत बताई। बैठक में व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर रहा।
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सर्जियो गोर ने डोभाल से की मुलाकात
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। इस बीच गोर ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ अमेरिका की साझेदारी बहुत जरूरी है।
गोर ने कहा कि दोनों पक्षों के कई लक्ष्य एक जैसे हैं। इसके साथ ही आपसी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। बता दें कि अमेरिकी राजदूत की डोभाल के साथ यह मुलाकात विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ उनकी बातचीत के एक दिन बाद हुई।
राजदूत गोर ने क्या कहा?
गोर ने सोशल मीडिया पर कहा, 'अमेरिका-भारत रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ एक फायदेमंद बैठक हुई।' उन्होंने कहा, 'वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ हमारी करीबी साझेदारी बहुत जरूरी है। अमेरिका और भारत के कई लक्ष्य एक जैसे हैं और हमारा सहयोग लगातार बढ़ रहा है।'
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किस मुद्दे पर हुई चर्चा?
हालांकि भारतीय पक्ष की ओर से बातचीत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। गोर की मिसरी और डोभाल के साथ यह बैठक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करने के कुछ दिनों बाद हुई। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत-अमेरिका के व्यापक वैश्विक रणनीतिक संबंधों खासकर व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्रों में को बढ़ाने पर चर्चा हुई।
उच्च-स्तरीय कूटनीति में यह तेजी तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए आपसी रक्षा समझौते के बाद आई है। इस कदम को एक नए क्षेत्रीय गठबंधन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी यह पता नहीं चल पाया है कि भारत और अमेरिका के बीच हुई बातचीत में इस रक्षा समझौते का जिक्र हुआ या नहीं।
दोनों नेताओं के मुलाकात के बाद क्या निर्देश मिला था?
जून में फ्रांस में हुई अपनी बैठक के दौरान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अधिकारियों को जल्द से जल्द एक संतुलित, आपसी फायदे वाले और व्यावसायिक रूप से सार्थक व्यापार समझौते की दिशा में काम करने का निर्देश दिया था।
पिछले साल जब वाशिंगटन ने भारत पर दंडात्मक टैरिफ लगाए और राष्ट्रपति ट्रंप ने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई सैन्य झड़पों को कम करने में अपनी भूमिका का दावा किया, तो दोनों देशों के संबंधों में काफी गिरावट आई। ट्रंप के इन दावों पर भारतीय अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। नई दिल्ली ने मजबूती से यह बात कही कि लड़ाई का रुकना भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का नतीजा था और इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।
हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने संबंधों को सुधारने की कोशिशें की हैं और जल्द ही व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।
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गोर ने कहा कि दोनों पक्षों के कई लक्ष्य एक जैसे हैं। इसके साथ ही आपसी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। बता दें कि अमेरिकी राजदूत की डोभाल के साथ यह मुलाकात विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ उनकी बातचीत के एक दिन बाद हुई।
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राजदूत गोर ने क्या कहा?
गोर ने सोशल मीडिया पर कहा, 'अमेरिका-भारत रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ एक फायदेमंद बैठक हुई।' उन्होंने कहा, 'वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ हमारी करीबी साझेदारी बहुत जरूरी है। अमेरिका और भारत के कई लक्ष्य एक जैसे हैं और हमारा सहयोग लगातार बढ़ रहा है।'
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किस मुद्दे पर हुई चर्चा?
हालांकि भारतीय पक्ष की ओर से बातचीत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। गोर की मिसरी और डोभाल के साथ यह बैठक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करने के कुछ दिनों बाद हुई। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत-अमेरिका के व्यापक वैश्विक रणनीतिक संबंधों खासकर व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्रों में को बढ़ाने पर चर्चा हुई।
उच्च-स्तरीय कूटनीति में यह तेजी तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए आपसी रक्षा समझौते के बाद आई है। इस कदम को एक नए क्षेत्रीय गठबंधन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी यह पता नहीं चल पाया है कि भारत और अमेरिका के बीच हुई बातचीत में इस रक्षा समझौते का जिक्र हुआ या नहीं।
दोनों नेताओं के मुलाकात के बाद क्या निर्देश मिला था?
जून में फ्रांस में हुई अपनी बैठक के दौरान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अधिकारियों को जल्द से जल्द एक संतुलित, आपसी फायदे वाले और व्यावसायिक रूप से सार्थक व्यापार समझौते की दिशा में काम करने का निर्देश दिया था।
पिछले साल जब वाशिंगटन ने भारत पर दंडात्मक टैरिफ लगाए और राष्ट्रपति ट्रंप ने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई सैन्य झड़पों को कम करने में अपनी भूमिका का दावा किया, तो दोनों देशों के संबंधों में काफी गिरावट आई। ट्रंप के इन दावों पर भारतीय अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। नई दिल्ली ने मजबूती से यह बात कही कि लड़ाई का रुकना भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का नतीजा था और इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।
हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने संबंधों को सुधारने की कोशिशें की हैं और जल्द ही व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।