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भारतीय नौसेना का नया 'समुद्री रक्षक': स्वदेशी डीएससी A24 पानी में उतरा, क्यों खास है यह युद्धपोत?
Sun, 02 Aug 2026 02:23 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, कोलकाता।
आईएएनएस, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 02 Aug 2026 02:23 PM IST
सार
भारतीय नौसेना का नया पोत 'डीएससी ए24' कोलकाता में सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है। 70 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों से बना यह पोत गहरे समुद्र में गोताखोरी और बचाव कार्यों के लिए बेहद मददगार साबित होगा। यह भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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नौसेना का पोत डीएससी A24
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारतीय नौसेना को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। नौसेना का नया पोत 'डीएससी A24' (DSC A24) पानी में उतर चुका है। इसे कोलकाता के टीटागढ़ शिपयार्ड में लॉन्च किया गया। यह पोत देश में ही तैयार किया गया है। इससे हमारी समुद्री सुरक्षा को नई ताकत मिलेगी।
नौसेना के कार्मिक प्रमुख वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। उनके साथ कई बड़े सैन्य अधिकारी भी शामिल हुए। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पोत को हुगली नदी के पानी में उतारा गया।
डीएससी A24 प्रोजेक्ट क्या है और यह क्यों खास है?
यह जहाज डीएससी (Diving Support Craft) प्रोजेक्ट का पांचवां पोत है। यह इस पूरी श्रृंखला का आखिरी पोत भी है। इसे 'यार्ड 329' के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) ने किया है।
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इस पोत को 'कैटामरन-हल'डिजाइन पर बनाया गया है। यानी इसमें एक की जगह दो समानांतर पतवार लगे हैं। इस वजह से यह पानी में तेजी से संतुलित रहता है। समुद्र की तेज लहरों में भी इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इसका वजन लगभग 300 से 400 टन है।
यह भी पढ़ें: आफत की बारिश: बाढ़-भूस्खलन से केरल में आठ, कर्नाटक में तीन की मौत; IMD ने किन राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट?
क्या स्वदेशी ताकत में भारत आगे बढ़ रहा है?
डीएससी A24 पूरी तरह भारत में बने उपकरणों से लैस है। इसमें 70 प्रतिशत मुख्य उपकरण देश की अपनी कंपनियों के हैं। यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की एक बड़ी जीत है। यह पोत पानी के नीचे काम करने वाले नौसेना के गोताखोरों को सीधी मदद देगा। इससे पानी के भीतर जांच, बचाव अभियान और मलबे की खोज आसान हो जाएगी। तटीय इलाकों की सुरक्षा में भी यह बड़ा योगदान देगा।
इस प्रोजेक्ट की पांच मुख्य बातें
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नौसेना के कार्मिक प्रमुख वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। उनके साथ कई बड़े सैन्य अधिकारी भी शामिल हुए। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पोत को हुगली नदी के पानी में उतारा गया।
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डीएससी A24 प्रोजेक्ट क्या है और यह क्यों खास है?
यह जहाज डीएससी (Diving Support Craft) प्रोजेक्ट का पांचवां पोत है। यह इस पूरी श्रृंखला का आखिरी पोत भी है। इसे 'यार्ड 329' के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) ने किया है।
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इस पोत को 'कैटामरन-हल'डिजाइन पर बनाया गया है। यानी इसमें एक की जगह दो समानांतर पतवार लगे हैं। इस वजह से यह पानी में तेजी से संतुलित रहता है। समुद्र की तेज लहरों में भी इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इसका वजन लगभग 300 से 400 टन है।
यह भी पढ़ें: आफत की बारिश: बाढ़-भूस्खलन से केरल में आठ, कर्नाटक में तीन की मौत; IMD ने किन राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट?
क्या स्वदेशी ताकत में भारत आगे बढ़ रहा है?
डीएससी A24 पूरी तरह भारत में बने उपकरणों से लैस है। इसमें 70 प्रतिशत मुख्य उपकरण देश की अपनी कंपनियों के हैं। यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की एक बड़ी जीत है। यह पोत पानी के नीचे काम करने वाले नौसेना के गोताखोरों को सीधी मदद देगा। इससे पानी के भीतर जांच, बचाव अभियान और मलबे की खोज आसान हो जाएगी। तटीय इलाकों की सुरक्षा में भी यह बड़ा योगदान देगा।
इस प्रोजेक्ट की पांच मुख्य बातें
- आखिरी पोत: यह डीएससी श्रृंखला का पांचवां और अंतिम पोत है।
- 70% स्वदेशी: ज्यादातर उपकरण भारतीय निर्माताओं ने ही बनाए हैं।
- कैटामरन डिजाइन: दो पतवार होने से समुद्र में जबरदस्त संतुलन रहता है।
- अत्याधुनिक तकनीक: इसमें पानी के भीतर काम करने के आधुनिक सिस्टम हैं।
- सुरक्षा में इजाफा: नौसेना की गोताखोरी और तटीय सुरक्षा क्षमता दोगुनी होगी।