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IRIS Lavan: संकट में फंसे ईरान ने क्यों जताया भारत का आभार? US की बमबारी के बीच युद्धपोत की सुरक्षा पर की बात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Sat, 07 Mar 2026 06:24 PM IST
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सार
IRIS Lavan: ईरान ने अपने युद्धपोत आईआरआईएस लावन को कोच्चि बंदरगाह पर ठहराने और चालक दल की मदद करने के लिए भारत सरकार का आभार जताया है। यह कदम हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना के डूबने की घटना के बाद मानवीय आधार पर उठाया गया। ईरानी राजदूत ने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत के सहयोग से दोनों देशों के दोस्ताना संबंध और मजबूत हुए हैं। पढ़ें रिपोर्ट-
आईआरआईएएस लावन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
ईरान ने अपने युद्धपोत आईआरआईएस लावन को ठहराने के लिए औपचारिक रूप से भारत का आभार व्यक्त किया। भारत ने इस युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह पर तकनीकी और रसद संंबंध व्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित पनाहगाह प्रदान की है। यह घटना हिंद महासागर में एक अन्य ईरान पोत आईआरआईएस पर हमले के बाद सामने आई है।
नई दिल्ली में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा, हिंद महासागर के पानी में ईरानी नौसैनिक जहाज आईआरआईएस देना से जुड़ी दुखद घटना के बाद ईरान चालक दल के सदस्यों की स्थिति पर नजर रखे हुए है और इस घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है। गौरतलब है कि अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी पनडबुब्बी ने टॉरपीडो से इस आईआरआईएस देना को निशाना बनाया था, जिसके बाद यह जहाज श्रीलंका के गाले के तट से करीब 40 नॉटिकल मील दूर डूब गया।
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नई दिल्ली में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा, हिंद महासागर के पानी में ईरानी नौसैनिक जहाज आईआरआईएस देना से जुड़ी दुखद घटना के बाद ईरान चालक दल के सदस्यों की स्थिति पर नजर रखे हुए है और इस घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है। गौरतलब है कि अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी पनडबुब्बी ने टॉरपीडो से इस आईआरआईएस देना को निशाना बनाया था, जिसके बाद यह जहाज श्रीलंका के गाले के तट से करीब 40 नॉटिकल मील दूर डूब गया।
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मोहम्मद फतहली, भारत में ईरान के राजदूत
- फोटो : एएनआई (फाइल)
ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहाली ने क्या कहा?
फतहाली ने बताया कि एक अन्य ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लावन जरूरी तकनीकी और लॉजिस्टिक इंतजाम करने के लिए केरल के कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा है। राजदूत ने जहाज को बंदरगाह पर खड़ा करने और उसके चालक दल की मदद करने के लिए भारत सरकार और स्थानीय अधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह इस अवसर पर भारत सरकार और स्थानीय अधिकारियों को धन्यवाद देना चाहते हैं, जिन्होंने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जहाज को बंदरगाह पर खड़ा करने और उसके चालक दल की मदद करने में सहयोग दिया।
फतहाली ने बताया कि एक अन्य ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लावन जरूरी तकनीकी और लॉजिस्टिक इंतजाम करने के लिए केरल के कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा है। राजदूत ने जहाज को बंदरगाह पर खड़ा करने और उसके चालक दल की मदद करने के लिए भारत सरकार और स्थानीय अधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह इस अवसर पर भारत सरकार और स्थानीय अधिकारियों को धन्यवाद देना चाहते हैं, जिन्होंने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जहाज को बंदरगाह पर खड़ा करने और उसके चालक दल की मदद करने में सहयोग दिया।
आगे मजबूत होते रहेंगे ईरान-भारत संबंध: राजदूत फतहाली
राजदूत फतहाली ने कहा, इस कठिन परिस्थिति में भारतीय अधिकारियों का बेहतरीन तालमेल और सहयोग दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने भारत सरकार और यहां के लोगों के निरंतर समर्थन और सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ईरान, भारत सरकार और यहां के लोगों के कीमती समर्थन और सहयोग की सराहना करता है। उन्होंने भरोसा जताया कि तेहरान और नई दिल्ली के बीच ऐतिहासिक और रचनात्मक संबंध आगे भी मजबूत होते रहेंगे।
राजदूत फतहाली ने कहा, इस कठिन परिस्थिति में भारतीय अधिकारियों का बेहतरीन तालमेल और सहयोग दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने भारत सरकार और यहां के लोगों के निरंतर समर्थन और सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ईरान, भारत सरकार और यहां के लोगों के कीमती समर्थन और सहयोग की सराहना करता है। उन्होंने भरोसा जताया कि तेहरान और नई दिल्ली के बीच ऐतिहासिक और रचनात्मक संबंध आगे भी मजबूत होते रहेंगे।
डॉ. एस. जयशंकर, विदेश मंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या कहा?
इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना डायलॉग-2026 में कहा कि यह फैसला पूरी तरह मानवीय आधार पर लिया गया था। उन्होंने कहा कि जहाज और उसका चालक दल अचानक बदली भू-राजनीतिक परिस्थितियों में फंस गए थे। भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, आईआरआईएस लावन ने इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लिया था और 15-25 फरवरी के बीच हुए बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन- 2026 के तहत ईरानी नौसेना की तैनाती के हिस्से के रूप में इस क्षेत्र में मौजूद था।
सूत्रों ने बताया कि श्रीलंका के दक्षिण में आईआरआईएस देना की घटना से कुछ दिन पहले ईरान ने भारत से इस जहाज को तत्काल ठहराने का अनुरोध किया था। 28 फरवरी को भारत को यह अनुरोध मिला था, जिसमें बताया गया था कि जहाज में तकनीकी समस्या आ गई है और उसे कोच्चि में खड़ा करना जरूरी है। भारत ने एक मार्च को इस अनुरोध को स्वीकार किया और इसके बाद 4 मार्च को आईआरआईएस लावन कोच्चि बंदरगाह पहुंच गया। फिलहाल जहाज के चालक दल के सदस्य कोच्चि में नौसैनिक सुविधाओं में रह रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जहाज पर कुल 183 सदस्य हैं, जिन्हें भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है।
इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना डायलॉग-2026 में कहा कि यह फैसला पूरी तरह मानवीय आधार पर लिया गया था। उन्होंने कहा कि जहाज और उसका चालक दल अचानक बदली भू-राजनीतिक परिस्थितियों में फंस गए थे। भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, आईआरआईएस लावन ने इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लिया था और 15-25 फरवरी के बीच हुए बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन- 2026 के तहत ईरानी नौसेना की तैनाती के हिस्से के रूप में इस क्षेत्र में मौजूद था।
सूत्रों ने बताया कि श्रीलंका के दक्षिण में आईआरआईएस देना की घटना से कुछ दिन पहले ईरान ने भारत से इस जहाज को तत्काल ठहराने का अनुरोध किया था। 28 फरवरी को भारत को यह अनुरोध मिला था, जिसमें बताया गया था कि जहाज में तकनीकी समस्या आ गई है और उसे कोच्चि में खड़ा करना जरूरी है। भारत ने एक मार्च को इस अनुरोध को स्वीकार किया और इसके बाद 4 मार्च को आईआरआईएस लावन कोच्चि बंदरगाह पहुंच गया। फिलहाल जहाज के चालक दल के सदस्य कोच्चि में नौसैनिक सुविधाओं में रह रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जहाज पर कुल 183 सदस्य हैं, जिन्हें भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है।
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