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IRAN: 'हम परमाणु हथियार नहीं चाहते, जहाजों को देंगे रास्ता', अराघची बोले- शांति वार्ता में भारत निभाए भूमिका

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 15 May 2026 03:49 PM IST
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सार

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की जमकर तारीफ की। उन्होंने भारत-ईरान संबंधों को बेहद महत्वपूर्ण बताया और हालिया तनाव के दौरान दोनों देशों के संपर्क का जिक्र किया।

Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi Praises India, Calls Jaishankar a Trusted Friend Amid Regional Tension
अब्बास अराघची - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत और ईरान के रिश्तों को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता और मजबूत रणनीतिक सहयोग मौजूद है। उन्होंने भारतीय सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मेहमाननवाजी की खुलकर सराहना की।
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अराघची ने कहा कि पिछले दो महीनों के दौरान, जब उनके देश पर आक्रामक कार्रवाई हो रही थी, तब भी भारत लगातार संपर्क में रहा। उन्होंने कहा कि भारत ने न सिर्फ कूटनीतिक समर्थन दिया बल्कि मानवीय सहायता के जरिए भी ईरानी जनता के साथ एकजुटता दिखाई। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा "हम भारत के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देते हैं। भारत हमेशा से इस क्षेत्र में संतुलित और सम्मानजनक भूमिका निभाता रहा है।"
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अमेरिका और इस्राइल पर साधा निशाना
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर अराघची ने अमेरिका और इस्राइल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही थी, उसी दौरान अमेरिका और इस्राइल ने हमला कर दिया। उन्होंने कहा "हम कूटनीति के बीच थे, लेकिन उसी समय हम पर हमला हुआ। यह पूरी तरह उकसावे वाली कार्रवाई थी।"
अराघची ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने ईरान और अमेरिका के बीच भरोसे को और कमजोर कर दिया है। उनके मुताबिक, आज अमेरिका की तरफ से एक संदेश आता है और अगले दिन दूसरा। यही अविश्वास की सबसे बड़ी वजह है।

'सीजफायर कायम है, लेकिन स्थिति नाजुक'
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि फिलहाल संघर्ष विराम लागू है, लेकिन हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईरान किसी भी दबाव या प्रतिबंध के आगे झुकने वाला नहीं है। अराघची ने कहा कि ईरानी जनता सिर्फ सम्मान की भाषा समझती है। हमने हर बार दबाव का मुकाबला किया है और आगे भी करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी सैन्य समाधान में विश्वास नहीं करता और क्षेत्रीय शांति के लिए बातचीत ही सबसे बेहतर रास्ता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें अभी विफल नहीं हुई हैं और बातचीत के रास्ते अब भी खुले हुए हैं। अराघची ने साफ कहा कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार बनाने की इच्छा नहीं रखी। उनके मुताबिक, ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और इसे लेकर कई गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं। 

भारत निभा सकता है बड़ी कूटनीतिक भूमिका
अराघची ने पश्चिम एशिया संकट में भारत की भूमिका को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत की छवि सभी देशों के बीच सकारात्मक है और वह शांति बहाली में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा "भारत फारस की खाड़ी के सभी देशों का मित्र है। हम चाहते हैं कि भारत इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में आगे आए।" ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अगर भारत कोई सकारात्मक मध्यस्थता की भूमिका निभाता है तो ईरान उसका स्वागत करेगा।

चाबहार पोर्ट को बताया भारत के लिए ‘गोल्डन गेट’
चाबहार पोर्ट को लेकर एक सवाल पर अराघची ने कहा कि चाबहार पोर्ट भारत और ईरान के सहयोग का सबसे बड़ा प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से इस परियोजना की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि यह पोर्ट भारत के लिए मध्य एशिया, कॉकस और यूरोप तक पहुंच का गोल्डन गेट बनेगा। अराघची ने उम्मीद जताई कि भारत चाबहार पोर्ट के विकास कार्य को आगे भी जारी रखेगा। उनके मुताबिक, यह परियोजना सिर्फ भारत और ईरान ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों के लिए बेहद अहम साबित होगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी दिया भरोसा
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित नहीं होने देना चाहता।राजनयिक हल और क्षेत्रीय सहयोग पर जोर देते हुए अराघची ने साफ किया कि मौजूदा संकट का समाधान युद्ध नहीं बल्कि बातचीत और भरोसे से ही निकलेगा।
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