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Explainer: क्या सार्वजनिक जगह पर गाली देना अपराध है, किन धाराओं में दोषी होने पर हो सकती है कितनी सजा?

Sat, 01 Aug 2026 03:13 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Sat, 01 Aug 2026 03:13 PM IST
सार

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों और आपत्तिजनक पोस्टरों का मामला सामने आने के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या सार्वजनिक जगह पर गाली देना कानूनन अपराध है? क्या हर अभद्र टिप्पणी पर एफआईआर दर्ज हो सकती है या इसके लिए कुछ कानूनी शर्तें भी होती हैं? आइए समझते हैं।

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Is Using Abusive Language in a Public Place a Crime? Which BNS Provisions Apply and What Punishment Can Follow
क्या कहता है कानून? - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान कई ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्द कहे गए और आपत्तिजनक पोस्टर प्रदर्शित किए गए। इनके वायरल होने के बाद पुलिस ने कुछ मामलों में एफआईआर दर्ज की है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार देर रात इंस्टाग्राम लाइव में जंतर-मंतर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें और उनकी दिवंगत मां को अपशब्द कहे गए, लेकिन वह उन बच्चों को सजा नहीं, बल्कि माफी और सही मार्गदर्शन देना चाहते हैं। उन्होंने समाज से भी अपील की कि गुमराह युवाओं को सही रास्ता दिखाने में साथ दें।

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क्या किसी को गाली देने या अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने पर जेल हो सकती है? अगर अश्लील पोस्टर या सामग्री दिखाई जाए तो क्या होता है? कानून क्या कहता है?  आइए विस्तार से जानते हैं। 

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मामला क्या है?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी की गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एक अधिवक्ता ने नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में एक लड़की के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। मामले की पुष्टि करते हुए एडीसीपी नोएडा, मनीषा सिंह ने 30 जुलाई को बताया कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार जीरो एफआईआर दर्ज कर ली गई। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352, 353(1) और 356(1) लगाई गई हैं। शिकायत में कहा गया कि इस टिप्पणी से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और इससे समाज में वैमनस्य व लोक शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई।

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Is Using Abusive Language in a Public Place a Crime? Which BNS Provisions Apply and What Punishment Can Follow
अनुच्छेद 19(2) - फोटो : Amar Ujala

आरोपी लड़की ने क्या कहा?

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें कथित तौर पर संबंधित लड़की माफी मांगती दिखाई देती है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में लड़की ने खुद को 15 वर्ष का बताया और कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ प्रदर्शन में गई थी। वहां मौजूद लोगों को प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते देखकर वह भी उनके प्रभाव में आ गई और उसने भी अनुचित बातें कह दीं। उसने कहा कि यह उसकी पहली और आखिरी गलती है। उसने पूरे देश से माफी मांगते हुए कहा कि उसे अपने किए पर शर्मिंदगी है और भविष्य में वह ऐसी गलती दोबारा नहीं करेगी।

क्या केवल गाली देने पर जेल हो सकती है?

भारतीय कानून में केवल गाली देना अपने-आप में अपराध नहीं माना जाता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि,

  • गाली किस परिस्थिति में दी गई,
  • उसका उद्देश्य क्या था,
  • उससे क्या प्रभाव पड़ा,
  • और क्या वह किसी अपराध की कानूनी परिभाषा में आती है।

अगर बयान मानहानि, सार्वजनिक शांति भंग करने, अश्लीलता फैलाने या किसी अन्य अपराध के दायरे में आता है, तभी संबंधित धाराएं लागू हो सकती हैं।

Is Using Abusive Language in a Public Place a Crime? Which BNS Provisions Apply and What Punishment Can Follow
बीएनएस - फोटो : Amar Ujala

इस मामले में लगी धाराएं क्या कहती हैं?

1. बीएनएस की धारा 352 
अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी का अपमान करता है और यह जानता है कि उसके कारण सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है या कोई अपराध हो सकता है, तो यह धारा लागू हो सकती है।

क्या सजा हो सकती है?

  • दो साल तक की जेल
  • या जुर्माना
  • या दोनों।

2. बीएनएस की धारा 353(1) 
अगर कोई व्यक्ति झूठी सूचना, अफवाह या रिपोर्ट प्रकाशित या प्रसारित करता है जिससे,

  • जनता में भय या दहशत फैल सकती हो,
  • सार्वजनिक शांति भंग हो सकती हो,
  • राज्य के खिलाफ अपराध होने की संभावना बने,
  • या किसी समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ उकसाया जाए, तो यह धारा लागू हो सकती है।

क्या सजा हो सकती है?

  • तीन साल तक की जेल
  • या जुर्माना
  • या दोनों।

3. बीएनएस की धारा 356(1): मानहानि 
अगर कोई व्यक्ति बोले गए शब्दों, लिखित सामग्री, संकेत, चित्र या किसी अन्य माध्यम से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला आरोप लगाता या प्रकाशित करता है, तो यह मानहानि मानी जाती है। धारा के अनुसार, अगर किसी कथन से समाज की नजर में किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा कम होती है, तो वह मानहानि के दायरे में आ सकता है।

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कब हो सकती है कार्रवाई? - फोटो : Amar Ujala

सार्वजनिक जगह पर अपशब्द बोलने पर कौन-सी धारा लागू होती है?

अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्द बोलता है या अश्लील हरकत करता है और उससे दूसरे लोगों को परेशानी होती है, तो बीएनएस की धारा 296 लागू हो सकती है।

क्या सजा हो सकती है?

  • तीन महीने तक की जेल,
  • ₹1,000 तक जुर्माना,
  • या दोनों।

अगर अश्लील पोस्टर या सामग्री दिखाई जाए तो क्या होगा?

अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से अश्लील पोस्टर, किताब, पर्चे, चित्र, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री, का प्रदर्शन, वितरण या बिक्री करता है, तो बीएनएस की धारा 294 लागू होती है। 

  • पहली बार दोषी पाए जाने पर दो साल तक की जेल और ₹5,000 तक जुर्माना लग सकता है।
  • वहीं, दूसरी बार दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की जेल और ₹10,000 तक जुर्माना लग सकता है।
  • अगर यही सामग्री किसी बच्चे को दिखाई या बेची जाती है, तो धारा 295 लागू होती है, जिसमें अधिक कठोर सजा का प्रावधान है।

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी - फोटो : Amar Ujala

सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर क्या कह चुका है?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सिर्फ गाली देना, अपशब्द बोलना या अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना अपने-आप में अश्लीलता नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभद्र भाषा, गाली-गलौज और अश्लीलता तीन अलग-अलग बातें हैं। इसलिए केवल अपमानजनक या असभ्य शब्दों का प्रयोग करने से सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता से जुड़े अपराध का मामला अपने-आप नहीं बन जाता।

यह टिप्पणी जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने तमिलनाडु के एक भूमि विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। इस मामले में एक व्यक्ति पर सार्वजनिक स्थान पर गाली देने और धमकी देने का आरोप था। निचली अदालत और मद्रास हाईकोर्ट ने उसे दोषी ठहराया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्द बोलने से जुड़े आरोप को रद्द कर दिया। हालांकि, गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में उसकी सजा बरकरार रखी गई।

अदालत ने कहा कि किसी शब्द या भाषा को कानूनी रूप से अश्लील तभी माना जाएगा, जब वह कामुक हो, यौन उत्तेजना पैदा करती हो और उसे सुनने या देखने वालों के नैतिक स्तर को भ्रष्ट करने की प्रवृत्ति रखती हो। केवल अपशब्द या अभद्र भाषा इन शर्तों को पूरा नहीं करती।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता से जुड़े अपराध को साबित करने के लिए केवल गाली देना पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को यह भी साबित करना होगा कि कथित शब्द सार्वजनिक स्थान या उसके आसपास बोले गए थे। उन शब्दों से वास्तव में दूसरे लोगों को परेशानी हुई थी। अगर ये दोनों बातें साबित नहीं होती हैं, तो केवल गाली देने के आधार पर अश्लीलता का अपराध नहीं माना जा सकता।

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