ISRO: मौसम खराब के बाद भी 'बाहुबली' ने प्रक्षेपण को बनाया सफल, पीएम मोदी ने दी बधाई; ऑर्बिट में पहुंचा उपग्रह
भारत की अंतरिक्ष और रक्षा क्षमताओं में एक बड़ा कदम जोड़ते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को भारतीय नौसेना के संचार उपग्रह जीसैट-7आर (सीएमएस-03) को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया। लगभग 4,400 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह अब तक का भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह है।
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विस्तार
'स्वेदेशी रॉकेट ने साबित की अपनी विश्वसनीयता'
इसरो प्रमुख वी नारायणन ने बाहुबली की तारीफ करते हुए कहा, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर ने अपनी विश्वसनीयता साबित कर दी है। खराब मौसम के बावजूद इसने प्रक्षेपण को सफल बनाकर साबित कर दिया कि चुनौतियां हमें रोक नहीं सकती हैं। इसरो अध्यक्ष ने यह भी बताया कि अंतरिक्ष एजेंसी अगले पांच महीनों में सात प्रक्षेपण मिशनों को अंजाम देने की योजना बना रही है।
#WATCH | Sriharikota | On the launch of ISRO’s LVM3-M5 carrying the CMS-03 communication satellite, ISRO Chief V Narayanan says, "The capability of this GSLV launcher is around 4000 kg to GTO and for the first time we have lifted 4410 kg to an elliptical orbit... It has performed… pic.twitter.com/moevANUPom
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) November 2, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'हमारा अंतरिक्ष क्षेत्र हमें निरंतर गौरवान्वित करता है। भारत के सबसे भारी संचार उपग्रह सीएमएस-03 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो को बधाई। हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की बदौलत हमारा अंतरिक्ष क्षेत्र उत्कृष्टता और नवाचार का पर्याय बन गया है। उनकी सफलताओं ने राष्ट्रीय प्रगति को आगे बढ़ाया है और अनगिनत लोगों को सशक्त बनाया है।
Our space sector continues to make us proud!
— Narendra Modi (@narendramodi) November 2, 2025
Congratulations ISRO on the successful launch of India’s heaviest communication satellite, CMS-03.
Powered by our space scientists, it is commendable how our space sector has become synonymous with excellence and innovation. Their…
ऑर्बिट में पहुंचा सीएमएस-03 उपग्रह
संचार उपग्रह के अपेक्षित कक्षा में पहुंचते ही इसरो का हॉल तालियों से गूंज उठा। एलवीएम3-एम5 दो ठोस मोटर स्ट्रैप-ऑन (एस200), एक द्रव प्रणोदक कोर चरण (एल 110) और एक क्रायोजेनिक चरण (सी25) वाला एक तीन चरणीय प्रक्षेपण यान है, जो इसरो को पूर्ण जीटीओ में 4,000 किलोग्राम तक वजन वाले भारी संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षम बनाता है। एलवीएम-3 को इसरो के वैज्ञानिक जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-3 भी कहते हैं।
यह भी पढ़ें - ISRO: इसरो ने लॉन्च किया जीसैट-7आर सैटेलाइट, अब सबसे उन्नत संचार उपग्रह से लैस होगी भारतीय नौसेना
इसरो वैज्ञानिकों ने संचार उपग्रह को वांछित कक्षा में स्थापित करने के बाद सी-25 क्रायोजेनिक इंजन के थ्रस्ट चैंबर के पुनः प्रज्वलन का भी प्रदर्शन किया। यह प्रयोग इसरो को क्रायोजेनिक चरण पुनः आरंभ करने और उपग्रहों को कई कक्षाओं में स्थापित करने की सुविधा प्रदान करने में मदद करेगा।
#WATCH | Sriharikota | On the launch of ISRO’s LVM3-M5 carrying the CMS-03 communication satellite, ISRO Chief V Narayanan says, "It is a grand successful mission... It is a communication satellite of India's CMS-03, the heaviest communication satellite, a 4,410 kg satellite. It… pic.twitter.com/KD9wxIRotN
— ANI (@ANI) November 2, 2025
#WATCH | Sriharikota | On future ISRO plans, ISRO Chief V Narayanan says, "There are a lot of important activities going on. One is the Gaganyaan activity. We are also working towards the first uncrewed mission... Another is the rocket, fabricated by an industry consortium at the… pic.twitter.com/BzrEeRgPLz
— ANI (@ANI) November 2, 2025
विदेशी धरती से भारी उपग्रह लॉन्च कर चुका है इसरो
इसरो आमतौर पर भारी संचार उपग्रह को फ्रेंच गयाना में यूरोपीय स्पेसपोर्ट से लॉन्च करता रहा है। इससे पहले इसरो ने 5 दिसंबर 2018 को एरियन-5 रॉकेट की मदद से फ्रेंच गयाना से जीसैट-11 लॉन्च किया था, जो 5,854 किलो का था। बाहुबली के कारण पहली बार भारतीय धरती से इतने भारी उपग्रह का प्रक्षेपण हो पाया। बाहुबली की यह पांचवीं संचालनात्मक उड़ान थी। यह प्रायोगिक परीक्षण समेत सभी आठ चरणों में अपनी कसौटी पर खरा उतरा है। बता दें कि ही रॉकेट भारत के चंद्रयान-3 मिशन को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचाने में कामयाब हुआ था।
इसरो के अनुसार, सीएमएस-03 एक मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सैटेलाइट है जो भारतीय भूमि क्षेत्र सहित व्यापक समुद्री इलाकों में संचार सेवाएं प्रदान करेगा। यह उपग्रह नौसेना की अंतरिक्ष-आधारित संचार प्रणाली और समुद्री निगरानी क्षमताओं को और मजबूत बनाएगा। भारतीय नौसेना ने बताया कि इस उपग्रह में कई अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकी घटक लगाए गए हैं, जिन्हें खासतौर पर नौसेना की परिचालन जरूरतों के अनुरूप विकसित किया गया है। एलवीएम-एम5 रॉकेट की कुल ऊंचाई 43.5 मीटर और भार 642 टन है। यह तीन चरणों में ईंधन जलाकर उपग्रह को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) तक पहुंचाता है। प्रक्षेपण के दौरान आठ मुख्य क्रमों के बाद सीएमएस-03 को रॉकेट से लगभग 179 किलोमीटर की ऊंचाई पर 10 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से अलग किया गया।
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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने दी बधाई
वहीं उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इसरो को इस उपलब्धि पर बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- इसरो और भारतीय नौसेना को हार्दिक बधाई! भारत का शक्तिशाली एलवीएम3-एम5 रॉकेट एक बार फिर आसमान में गरज उठा, जब भारतीय नौसेना के सबसे भारी और सबसे उन्नत संचार उपग्रह जीसैट-7आर (सीएमएस-03) को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। यह स्वदेशी रूप से विकसित उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में अंतरिक्ष-आधारित संचार, संपर्क और समुद्री क्षेत्र जागरूकता को मजबूत करेगा, जो आत्मनिर्भर भारत में एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि होगी। इसरो अंतरिक्ष अन्वेषण में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करता जा रहा है!
Hearty congratulations to ISRO and the Indian Navy!
— Vice-President of India (@VPIndia) November 2, 2025
India’s mighty LVM3-M5 rocket roared to the skies once again with the successful launch of GSAT-7R (CMS-03) — the heaviest and most advanced communication satellite for the Indian Navy — placed into Geosynchronous Transfer… pic.twitter.com/M4sAezw7uD
सीएमएस-03 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो को बधाई- राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस प्रक्षेपण को देश की 'आत्मनिर्भरता' की भावना का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, 'भारत के सबसे उन्नत संचार उपग्रह सीएमएस-03 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो को बधाई। यह हमारे देश की आत्मनिर्भरता और अत्याधुनिक नवाचार की भावना का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। तकनीकी उत्कृष्टता के लिए इसरो की निरंतर खोज भारत को गौरवान्वित करती है।'
Congratulations to @isro on the successful launch of CMS-03, India’s most advanced communication satellite.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) November 2, 2025
A major milestone exemplifying our nation’s spirit of #Aatmanirbharta and cutting-edge innovation.
ISRO’s relentless pursuit of technological excellence continues to make… https://t.co/SxtJXCJ6FJ
इस उपलब्धि पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसरो की टीम की सराहना करते हुए इसे 'भारत का बाहुबली आसमान छू गया' बताया। उन्होंने कहा, 'इसरो लगातार सफलता की नई कहानी लिख रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने जो निरंतर समर्थन दिया है, वह भारत को अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है।'
Kudos Team #ISRO!
— Dr Jitendra Singh (@DrJitendraSingh) November 2, 2025
India’s #Bahubali scales the skies, with the successful launch of #LVM3M5 Mission!
“Bahubali” as it is being popularly referred, LVM3-M5 rocket is carrying the CMS-03 communication satellite, the heaviest ever to be launched from the Indian soil into a… pic.twitter.com/ccyIPUxpIX
सीएमएस-03 उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूती देगा- नौसेना
भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने रविवार को बताया कि संचार उपग्रह सीएमएस-03, हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत दूरसंचार कवरेज प्रदान करेगा और नौसेना की अंतरिक्ष-आधारित संचार एवं समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्षमताओं को मजबूत करेगा। नौसेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत दूरसंचार कवरेज प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इसके पेलोड में कई संचार बैंडों पर ध्वनि, डेटा और वीडियो लिंक का समर्थन करने में सक्षम ट्रांसपोंडर शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि जटिल सुरक्षा चुनौतियों के दौर में, यह उपग्रह 'आत्मनिर्भरता' के माध्यम से उन्नत तकनीक का लाभ उठाकर देश के समुद्री हितों की रक्षा करने के भारतीय नौसेना के दृढ़ संकल्प का प्रतिनिधित्व करता है। अधिकारियों ने कहा कि यह उपग्रह भारत का अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है और इसमें भारतीय नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेष रूप से विकसित कई स्वदेशी अत्याधुनिक घटक शामिल हैं।
गुजरात काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सलाहकार नरोत्तम साहू ने कहा कि यह प्रक्षेपण भारत के आगामी गगनयान मिशन से पहले वैज्ञानिकों का आत्मविश्वास और बढ़ाएगा। साहू ने कहा, 'हर नए रॉकेट के साथ हमारा आत्मविश्वास भी ऊंचाई छू रहा है। जैसे-जैसे गगनयान की तैयारियां पूरी हो रही हैं, इस सफलता से हमारी हिम्मत और पक्की हुई है।'