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ISRO: 2030 के लिए इसरो ने तय किया लक्ष्य, अतंरिक्ष में कचरा पकड़ने के लिए रोबोटिक हाथ का करेगा परीक्षण

Fri, 25 Oct 2024 11:35 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 25 Oct 2024 11:35 PM IST
सार

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो का लक्ष्य उपग्रह सर्विसिंग और मलबा पकड़ने की तकनीक पर ध्यान केंद्रित करने वाले नए मिशनों के साथ 2030 तक शून्य मलबा का लक्ष्य है।

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ISRO will test technology for catching satellites in space with robotic arms says Somnath
इसरो चीफ एस सोमनाथ - फोटो : पीटीआई

विस्तार

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो इस साल कम से कम दो प्रमुख मिशन लॉन्च करने की योजना के साथ मलबा-मुक्त अंतरिक्ष की ओर एक बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार है। इन मिशनों का उद्देश्य डॉक करना, ईंधन भरना, मरम्मत करना, स्थानांतरित करना, डी-ऑर्बिट करना और उन उपग्रहों का जीवन बढ़ाना है जो अपने जीवनकाल के अंत में पहुंच चुके हैं। इसरो का लक्ष्य उपग्रह सर्विसिंग और मलबा पकड़ने की तकनीक पर ध्यान केंद्रित करने वाले नए मिशनों के साथ 2030 तक शून्य मलबा का लक्ष्य है।
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'अगले महीने स्पैडेक्स मिशन लॉन्च करेगा इसरो'
इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने शुक्रवार को कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी अगले महीने स्पैडेक्स मिशन लॉन्च करेगा। यह मिशन कम प्रभाव वाली सहकारी डॉकिंग तकनीक का परीक्षण करेगा, जिससे उपग्रहों के बीच संचार संभव होगा। इसके बाद, एक प्रणोदक उपकरण को सुरक्षित रूप से डी-ऑर्बिट उपग्रहों से जोड़ा जा सकता है।
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सर्विसर मिशन का परीक्षण करेगा इसरो- एस सोमनाथ
इसके अतिरिक्त, एजेंसी इसरो सर्विसर मिशन का परीक्षण करेगा, जो एक मलबे को पकड़ने की तकनीक का उपयोग करेगा, जहां ऊपरी चरण पर एक रोबोटिक हाथ गति में उपग्रह को पकड़ लेगा। यह मिशन ऑन-ऑर्बिट सर्विसिंग, जीवन विस्तार और निरीक्षण में क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा।
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अंतरिक्ष मलबे प्रबंधन को लेकर बोले एस सोमनाथ
चाणक्य रक्षा संवाद 2024 में 'अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता - राष्ट्रीय हितों की निगरानी और सुरक्षा' विषय पर बोलते हुए सोमनाथ ने कहा, इनमें से कई समस्याओं (अंतरिक्ष मलबे प्रबंधन) का अभी तक कोई लागत प्रभावी समाधान नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम नई तकनीकों को विकसित करने से कतराएंगे।

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