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कांग्रेस केंद्र पर हमलावार: जयराम रमेश बोले- NDA बना ‘नेशनल डिफेक्टर अलायंस’, लगाए पार्टियों को तोड़ने का आरोप
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 18 Jun 2026 01:23 PM IST
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सार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार पर विपक्षी दलों को तोड़ने और 'प्रतिशोध की राजनीति' करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक पर बहुमत न मिलने के कारण सरकार बौखला गई है। महाराष्ट्र और बंगाल में सांसदों के दल-बदल की खबरों के बीच विपक्ष एकजुट है।
जयराम रमेश, कांग्रेस नेता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री विपक्षी दलों में फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं। रमेश ने एनडीए (NDA) को 'नेशनल डिफेक्टर अलायंस' यानी 'राष्ट्रीय दल-बदलु गठबंधन' का नाम दिया है। उनका कहना है कि सरकार यह सब विपक्षी दलों का मनोबल तोड़ने के लिए कर रही है।
जयराम रमेश ने 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में हुई घटना का हवाला दिया। उस दिन सरकार ने संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए पेश किया था। संविधान संशोधन विधेयक पर हुई वोटिंग में सरकार को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष ने इसके खिलाफ 230 वोट डाले। रमेश के अनुसार, इस हार ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को बहुत परेशान कर दिया है। उन्होंने इसे गृह मंत्री का अपमान बताया क्योंकि वे अपनी पूरी ताकत लगाने के बाद भी जरूरी आंकड़ा नहीं जुटा पाए।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अब सरकार अपनी संख्या बढ़ाने के लिए दूसरे दलों को तोड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री मानसून सत्र से पहले दो-तिहाई बहुमत चाहते हैं ताकि वे संसद का विशेष सत्र बुला सकें। रमेश ने कहा कि 16 अप्रैल को भी इसी उम्मीद में विशेष सत्र बुलाया गया था, लेकिन विपक्ष की एकता की वजह से सरकार को केवल 298 वोट ही मिल सके। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संविधान पर हमला करार दिया। रमेश ने गृह मंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि जिस कुर्सी पर कभी सरदार पटेल बैठते थे, आज वहां बैठकर ऐसी राजनीति की जा रही है।
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जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार यही रणनीति राज्यसभा में भी अपना रही है। वहां सांसदों से इस्तीफा दिलवाकर उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार चाहे जो कर ले, उसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलेगा। इन घटनाक्रमों के बीच आठ जून को इंडिया गठबंधन की बैठक हुई थी, जिसमें 23 दलों के प्रतिनिदि शामिल हुए थे। जिससे विपक्ष का मनोबल ऊंचा है।
ये भी पढ़ें: ऋतब्रत बनर्जी मामले में TMC को झटका: विधानसभा स्पीकर के फैसले पर रोक नहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट ने किया इनकार
इस समय महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में बड़ी राजनीतिक हलचल चल रही है। महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के टूटने की खबरें हैं। दावा किया जा रहा है कि 9 में से 7 सांसद एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। विधान परिषद सदस्य चंद्रकांत रघुवंशी ने कहा है कि 6 सांसदों ने शिंदे गुट का साथ देने का फैसला किया है, हालांकि पार्टी ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
पश्चिम बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने 14 जून को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। उन्होंने अपने गुट का विलय त्रिपुरा की पार्टी 'नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में करने के लिए पत्र दिया है।
जयराम रमेश ने 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में हुई घटना का हवाला दिया। उस दिन सरकार ने संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए पेश किया था। संविधान संशोधन विधेयक पर हुई वोटिंग में सरकार को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष ने इसके खिलाफ 230 वोट डाले। रमेश के अनुसार, इस हार ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को बहुत परेशान कर दिया है। उन्होंने इसे गृह मंत्री का अपमान बताया क्योंकि वे अपनी पूरी ताकत लगाने के बाद भी जरूरी आंकड़ा नहीं जुटा पाए।
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कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अब सरकार अपनी संख्या बढ़ाने के लिए दूसरे दलों को तोड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री मानसून सत्र से पहले दो-तिहाई बहुमत चाहते हैं ताकि वे संसद का विशेष सत्र बुला सकें। रमेश ने कहा कि 16 अप्रैल को भी इसी उम्मीद में विशेष सत्र बुलाया गया था, लेकिन विपक्ष की एकता की वजह से सरकार को केवल 298 वोट ही मिल सके। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संविधान पर हमला करार दिया। रमेश ने गृह मंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि जिस कुर्सी पर कभी सरदार पटेल बैठते थे, आज वहां बैठकर ऐसी राजनीति की जा रही है।
जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार यही रणनीति राज्यसभा में भी अपना रही है। वहां सांसदों से इस्तीफा दिलवाकर उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार चाहे जो कर ले, उसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलेगा। इन घटनाक्रमों के बीच आठ जून को इंडिया गठबंधन की बैठक हुई थी, जिसमें 23 दलों के प्रतिनिदि शामिल हुए थे। जिससे विपक्ष का मनोबल ऊंचा है।
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इस समय महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में बड़ी राजनीतिक हलचल चल रही है। महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के टूटने की खबरें हैं। दावा किया जा रहा है कि 9 में से 7 सांसद एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। विधान परिषद सदस्य चंद्रकांत रघुवंशी ने कहा है कि 6 सांसदों ने शिंदे गुट का साथ देने का फैसला किया है, हालांकि पार्टी ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
पश्चिम बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने 14 जून को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। उन्होंने अपने गुट का विलय त्रिपुरा की पार्टी 'नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में करने के लिए पत्र दिया है।