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Kaleshwaram Case: तेलंगाना हाईकोर्ट ने केसीआर और हरीश राव को दी बड़ी राहत, 25 फरवरी तक कार्रवाई पर लगाई रोक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 19 Jan 2026 04:18 PM IST
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सार

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कालेश्वरम परियोजना की जांच रिपोर्ट के आधार पर केसीआर, हरीश राव और अन्य के खिलाफ किसी भी कार्रवाई पर 25 फरवरी तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने सभी पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने का समय दिया। मामले में आयोग की रिपोर्ट और सीबीआई जांच को लेकर विवाद है।

Kaleshwaram Case Telangana High Court grants major relief to KCR and Harish Rao stays action until February 25
तेलंगाना उच्च न्यायालय - फोटो : तेलंगाना हाईकोर्ट वेबसाइट
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विस्तार
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तेलंगाना हाईकोर्ट ने सोमवार को भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर), पूर्व मंत्री टी. हरीश राव और अन्य को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कालेश्वरम परियोजना से जुड़ी न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार द्वारा किसी भी तरह की कार्रवाई से उन्हें 25 फरवरी तक अंतरिम संरक्षण दे दी है। इतना ही नहीं हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जीएम मोहीउद्दीन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 25 फरवरी तक के लिए टाल दी है।

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अदालत ने यह समय इसलिए दिया है ताकि सभी पक्ष अपने-अपने लिखित तर्क (सबमिशन) दाखिल कर सकें। तब तक पहले से दी गई राहत जारी रहेगी। इस मामले में केसीआर, हरीश राव के अलावा पूर्व मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार जोशी और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी स्मिता सभरवाल ने भी हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं।
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पहले भी मिली थी राहत
इससे पहले 12 नवंबर को भी हाईकोर्ट ने केसीआर और अन्य को राहत दी थी और सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था। सरकार को चार हफ्ते और उसके बाद याचिकाकर्ताओं को जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय मिला था।

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अब समझिए क्या है पूरा मामला

बता दें कि कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज पीसी घोष की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग बनाया गया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, जिसे अगस्त में विधानसभा में पेश किया गया। रिपोर्ट पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का एलान किया था।

आयोग की रिपोर्ट में क्या कहा गया
गौरतलब है कि आयोग की रिपोर्ट में परियोजना में कथित अनियमितताओं के लिए केसीआर को जिम्मेदार ठहराया गया। उस समय के सिंचाई मंत्री रहे हरीश राव पर भी सवाल उठाए गए। कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी आपत्ति जताई गई

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केसीआर ने क्या-क्या लगाए आरोप
केसीआर ने हाईकोर्ट में कहा कि जांच आयोग का गठन अवैध और असंवैधानिक है। आयोग की रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है। सरकार द्वारा रिपोर्ट को बार-बार सार्वजनिक करना गलत और पूर्व नियोजित है। हाईकोर्ट ने अंतिम फैसला आने तक सरकार को निर्देश दिया है कि वह केसीआर, हरीश राव और अन्य के खिलाफ कोई भी कार्रवाई न करे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।

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