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Karnataka: CET परीक्षा देने जा रहे छात्रों का उतरवाया गया जनेऊ और कलावा, BJP ने कांग्रेस को बताया हिंदू विरोधी
पीटीआई, बंगलूरू
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Fri, 24 Apr 2026 04:23 PM IST
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सार
बंगलूरू के कृपानिधि कॉलेज में सीईटी परीक्षा के दौरान पांच ब्राह्मण छात्रों का जनेऊ उतरवाने का गंभीर मामला सामने आया है। छात्रों का कलावा भी काटा गया। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष के नेता आर अशोक ने इसे 'हिंदू विरोधी' कृत्य बताते हुए कहा कि गाइडलाइन में जनेऊ उतारने का कोई नियम नहीं है।
छात्रों से उतरवाया गया कलावा-जनेऊ।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
बंगलूरू में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) परीक्षा के दौरान एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यहां के एक कॉलेज में परीक्षा देने गए पांच ब्राह्मण छात्रों को अपना जनेऊ (पवित्र धागा) उतारने के लिए मजबूर किया गया। इस घटना के बाद राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है और कड़ा विरोध शुरू हो गया है। भाजपा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे पूरी तरह से हिंदू विरोधी कदम बताया।
सीईटी परीक्षा के जरिए छात्रों को बड़े प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन मिलता है। शुक्रवार को मड़ीवाला इलाके में स्थित कृपानिधि कॉलेज में यह परीक्षा चल रही थी। परीक्षा देने गए छात्रों का आरोप है कि वहां मौजूद शिक्षकों और निरीक्षकों ने उनसे साफ कह दिया कि अगर परीक्षा देनी है तो शरीर से जनेऊ उतारना ही पड़ेगा।
क्या बोले पीड़ित छात्र?
एक छात्र ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि शिक्षकों ने पहले कानों की बाली उतरवाई, जो समझ में आता है क्योंकि कोई भी धातु अंदर ले जाना मना है। लेकिन इसके बाद उसे शरीर से जनेऊ उतारने के लिए भी मजबूर किया गया। परीक्षा छूटने के डर से छात्रों के पास कोई और विकल्प नहीं था, इसलिए उन्हें मजबूरी में निरीक्षकों का यह सख्त फरमान मानना पड़ा।
पिछले साल भी हुआ था विवाद?
यह पहली बार नहीं है जब ऐसा विवाद हुआ है। पिछले साल भी ऐसी ही घटना हुई थी, तब सरकार ने साफ किया था कि सीईटी के दौरान जनेऊ नहीं उतारा जाएगा। खुद मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि छात्रों से जनेऊ उतारने के लिए न कहा जाए। इसके बावजूद इस साल गुरुवार को छात्रों के साथ फिर से ऐसा ही भेदभाव किया गया। कुछ अन्य छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि निरीक्षकों ने उनकी कलाई पर बंधा लाल-पीला धागा यानी कलावा (मौली) भी उतरवा दिया।
ये भी पढ़ें- Election: केरल में नतीजों से पहले कांग्रेस में घमासान, सीएम के चेहरे की लड़ाई से यूडीएफ की बढ़ी मुश्किलें
परिजनों ने क्यों काटा हंगामा?
परीक्षा खत्म होने के बाद जब छात्रों ने यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो वे भड़क गए। सूत्रों के मुताबिक, छात्रों के परिजन तुरंत परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए और उन्होंने जमकर सवाल उठाए। परिजनों का साफ पूछना था कि जब जनेऊ न उतारने के स्पष्ट निर्देश पहले से मौजूद हैं, तो फिर किस मकसद से ऐसा किया गया? इससे पहले शिवमोग्गा, बीदर और कुछ अन्य जगहों पर भी जब ऐसा विवाद हुआ था, तब राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री एमसी सुधाकर ने माता-पिता को भरोसा दिया था कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि कांग्रेस सरकार के 'हिंदू विरोधी कृत्य' लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि मंगलसूत्र और जनेऊ उतरवाने जैसे काम बिना रुके हो रहे हैं। अशोक ने आरोप लगाया कि पिछले साल भी सीईटी, नीट और केपीएससी परीक्षाओं के दौरान मंगलसूत्र और जनेऊ उतरवाए गए थे, और इस साल भी वही पुरानी प्रथा जानबूझकर जारी रखी गई है।
जनेऊ उतारने का कोई नियम था?
भाजपा के वरिष्ठ नेता आर अशोक ने साफ कहा कि सीईटी के हॉल टिकट या किसी भी गाइडलाइन में यह कहीं नहीं लिखा है कि परीक्षा के दौरान जनेऊ नहीं पहन सकते। उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि आखिर जनेऊ उतारने के लिए छात्रों को क्यों मजबूर किया जा रहा है और इस भारी अन्याय के लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में एक तरफ हिंदुओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं है, तो दूसरी तरफ हिंदू मान्यताओं और प्रथाओं पर इस तरह के हमले करके बहुत ही गंदी राजनीति की जा रही है।
भाजपा ने काग्रेस पर साधा निशाना
विपक्ष के नेता ने सत्ताधारी कांग्रेस की तुलना आधुनिक मुस्लिम लीग से कर दी है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने राज्य में अघोषित रूप से शरिया कानून लागू कर दिया है। अशोक ने कहा कि एक तरफ सरकार रमजान के महीने में उर्दू माध्यम के स्कूलों का समय बदल देती है, लेकिन दूसरी तरफ परीक्षा में चेकिंग के नाम पर हिंदू महिलाओं के मंगलसूत्र उतारने और छात्रों के जनेऊ काटने की अनुमति दे रही है। उन्होंने इन हरकतों के कारण कांग्रेस को पूरी तरह से हिंदू विरोधी बताया है।
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सीईटी परीक्षा के जरिए छात्रों को बड़े प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन मिलता है। शुक्रवार को मड़ीवाला इलाके में स्थित कृपानिधि कॉलेज में यह परीक्षा चल रही थी। परीक्षा देने गए छात्रों का आरोप है कि वहां मौजूद शिक्षकों और निरीक्षकों ने उनसे साफ कह दिया कि अगर परीक्षा देनी है तो शरीर से जनेऊ उतारना ही पड़ेगा।
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क्या बोले पीड़ित छात्र?
एक छात्र ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि शिक्षकों ने पहले कानों की बाली उतरवाई, जो समझ में आता है क्योंकि कोई भी धातु अंदर ले जाना मना है। लेकिन इसके बाद उसे शरीर से जनेऊ उतारने के लिए भी मजबूर किया गया। परीक्षा छूटने के डर से छात्रों के पास कोई और विकल्प नहीं था, इसलिए उन्हें मजबूरी में निरीक्षकों का यह सख्त फरमान मानना पड़ा।
पिछले साल भी हुआ था विवाद?
यह पहली बार नहीं है जब ऐसा विवाद हुआ है। पिछले साल भी ऐसी ही घटना हुई थी, तब सरकार ने साफ किया था कि सीईटी के दौरान जनेऊ नहीं उतारा जाएगा। खुद मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि छात्रों से जनेऊ उतारने के लिए न कहा जाए। इसके बावजूद इस साल गुरुवार को छात्रों के साथ फिर से ऐसा ही भेदभाव किया गया। कुछ अन्य छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि निरीक्षकों ने उनकी कलाई पर बंधा लाल-पीला धागा यानी कलावा (मौली) भी उतरवा दिया।
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परिजनों ने क्यों काटा हंगामा?
परीक्षा खत्म होने के बाद जब छात्रों ने यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो वे भड़क गए। सूत्रों के मुताबिक, छात्रों के परिजन तुरंत परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए और उन्होंने जमकर सवाल उठाए। परिजनों का साफ पूछना था कि जब जनेऊ न उतारने के स्पष्ट निर्देश पहले से मौजूद हैं, तो फिर किस मकसद से ऐसा किया गया? इससे पहले शिवमोग्गा, बीदर और कुछ अन्य जगहों पर भी जब ऐसा विवाद हुआ था, तब राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री एमसी सुधाकर ने माता-पिता को भरोसा दिया था कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि कांग्रेस सरकार के 'हिंदू विरोधी कृत्य' लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि मंगलसूत्र और जनेऊ उतरवाने जैसे काम बिना रुके हो रहे हैं। अशोक ने आरोप लगाया कि पिछले साल भी सीईटी, नीट और केपीएससी परीक्षाओं के दौरान मंगलसूत्र और जनेऊ उतरवाए गए थे, और इस साल भी वही पुरानी प्रथा जानबूझकर जारी रखी गई है।
जनेऊ उतारने का कोई नियम था?
भाजपा के वरिष्ठ नेता आर अशोक ने साफ कहा कि सीईटी के हॉल टिकट या किसी भी गाइडलाइन में यह कहीं नहीं लिखा है कि परीक्षा के दौरान जनेऊ नहीं पहन सकते। उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि आखिर जनेऊ उतारने के लिए छात्रों को क्यों मजबूर किया जा रहा है और इस भारी अन्याय के लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में एक तरफ हिंदुओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं है, तो दूसरी तरफ हिंदू मान्यताओं और प्रथाओं पर इस तरह के हमले करके बहुत ही गंदी राजनीति की जा रही है।
भाजपा ने काग्रेस पर साधा निशाना
विपक्ष के नेता ने सत्ताधारी कांग्रेस की तुलना आधुनिक मुस्लिम लीग से कर दी है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने राज्य में अघोषित रूप से शरिया कानून लागू कर दिया है। अशोक ने कहा कि एक तरफ सरकार रमजान के महीने में उर्दू माध्यम के स्कूलों का समय बदल देती है, लेकिन दूसरी तरफ परीक्षा में चेकिंग के नाम पर हिंदू महिलाओं के मंगलसूत्र उतारने और छात्रों के जनेऊ काटने की अनुमति दे रही है। उन्होंने इन हरकतों के कारण कांग्रेस को पूरी तरह से हिंदू विरोधी बताया है।
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