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VB-G RAM G: कर्नाटक सरकार ने नए रोजगार कानून वीबी जी-राम-जी को मानने से किया इनकार, हाईकोर्ट में देगी चुनौती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 08 Jan 2026 07:38 PM IST
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सार
Karnataka: कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने वीबी-जी-राम जी कानून को मानने से इनकार कर दिया है और इसे कोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने कहा कि वह इसके खिलाफ जनता की अदालत में भी जाएगी।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार
- फोटो : PTI
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विस्तार
कर्नाटक के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने गुरुवार को कहा कि राज्य कैबिनेट ने हाल ही में लागू किए गए वीबी-जी-राम जी अधिनियम को स्वीकार न करने का फैसला किया है। यह कानून यूपीए सरकार के समय शुरू की गई ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा (मनरेगा) की जगह लाया गया है। कैबिनेट ने इस कानून के खिलाफ कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ने का भी निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म किए जाने और उसकी जगह विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम लागू करने के खिलाफ 'जनता की अदालत' में जाने का भी फैसला किया है।
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'योजना बनाने की प्रक्रिया को पहुंचेगा नुकसान'
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए पाटिल ने कहा, सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया है कि वीबी-जी राम जी अधिनियम को स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसे कानून की अदालत में चुनौती दी जाएगी। इस मुद्दे पर तैयार कैबिनेट प्रस्ताव में कहा गया कि वीबी-जी राम जी अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए काम और आजीविका के अधिकार का उल्लंघन करता है। इसमें यह भी कहा गया है कि यह कानून संविधान की ओर से पंचायतों को दिए गए वैध अधिकारों को कमजोर करता है और संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों की भावना के खिलाफ है। स्थानीय जरूरतों के अनुसार नीचे से ऊपर की योजना बनाने की प्रक्रिया को इससे नुकसान पहुंचा है।
'राज्यों को परामर्श प्रक्रिया से बाहर रखा गया'
कैबिनेट ने कहा कि यह कानून संघीय ढांचे को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, क्योंकि इसमें न केवल राज्यों को परामर्श प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रखा गया है, बल्कि उनसे कुल खर्च का 40 फीसदी वहन करने की अपेक्षा भी की गई है। यह सब राज्यों को भरोसे में लिए बिना केंद्र सरकार की ओर से एकतरफा तय शर्तों के अनुसार किया गया है।
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'ग्रामीण जनता के आर्थिक अधिकारों पर चोट करता है कानून'
कैबिनेट ने कहा कि वीबी-जी राम जी अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों पर गंभीर चोट करता है। एक तरफ काम केवल उन्हीं क्षेत्रों में मिलेगा जिन्हें केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी और दूसरी तरफ मजदूरी दर भी केंद्र तय करेगा, जिसमें राज्य सरकारों की ओर से तय न्यूनतम मजदूरी की कोई गारंटी नहीं है।
कैबिनेट के अनुसार, यह कानून महात्मा गांधी की 'ग्राम स्वराज' की कल्पना के भी खिलाफ है। कैबिनेट ने यह भी कहा कि पंचायतों को न तो स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम चुनने की आजादी होगी और न ही कामों की प्राथमिकता तय करने का अधिकार। इसके अलावा, उन्हें केंद्र सरकार की ओर से तय मानक तक ही सीमित रखा जाएगा।
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उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म किए जाने और उसकी जगह विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम लागू करने के खिलाफ 'जनता की अदालत' में जाने का भी फैसला किया है।
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'योजना बनाने की प्रक्रिया को पहुंचेगा नुकसान'
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए पाटिल ने कहा, सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया है कि वीबी-जी राम जी अधिनियम को स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसे कानून की अदालत में चुनौती दी जाएगी। इस मुद्दे पर तैयार कैबिनेट प्रस्ताव में कहा गया कि वीबी-जी राम जी अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए काम और आजीविका के अधिकार का उल्लंघन करता है। इसमें यह भी कहा गया है कि यह कानून संविधान की ओर से पंचायतों को दिए गए वैध अधिकारों को कमजोर करता है और संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों की भावना के खिलाफ है। स्थानीय जरूरतों के अनुसार नीचे से ऊपर की योजना बनाने की प्रक्रिया को इससे नुकसान पहुंचा है।
'राज्यों को परामर्श प्रक्रिया से बाहर रखा गया'
कैबिनेट ने कहा कि यह कानून संघीय ढांचे को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, क्योंकि इसमें न केवल राज्यों को परामर्श प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रखा गया है, बल्कि उनसे कुल खर्च का 40 फीसदी वहन करने की अपेक्षा भी की गई है। यह सब राज्यों को भरोसे में लिए बिना केंद्र सरकार की ओर से एकतरफा तय शर्तों के अनुसार किया गया है।
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'ग्रामीण जनता के आर्थिक अधिकारों पर चोट करता है कानून'
कैबिनेट ने कहा कि वीबी-जी राम जी अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों पर गंभीर चोट करता है। एक तरफ काम केवल उन्हीं क्षेत्रों में मिलेगा जिन्हें केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी और दूसरी तरफ मजदूरी दर भी केंद्र तय करेगा, जिसमें राज्य सरकारों की ओर से तय न्यूनतम मजदूरी की कोई गारंटी नहीं है।
कैबिनेट के अनुसार, यह कानून महात्मा गांधी की 'ग्राम स्वराज' की कल्पना के भी खिलाफ है। कैबिनेट ने यह भी कहा कि पंचायतों को न तो स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम चुनने की आजादी होगी और न ही कामों की प्राथमिकता तय करने का अधिकार। इसके अलावा, उन्हें केंद्र सरकार की ओर से तय मानक तक ही सीमित रखा जाएगा।
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