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Karnataka: कर्नाटक विधानसभा सत्र से पहले बड़ा घटनाक्रम, राज्यपाल ने संयुक्त सत्र को संबोधित करने से किया इनकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 21 Jan 2026 05:30 PM IST
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सार
कर्नाटक में विधानसभा सत्र से पहले राज्यपाल थावरचंद गहलोत के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार ने राज्य सरकार और राजभवन के बीच टकराव बढ़ा दिया है। इसी तरह केरल और तमिलनाडु में भी नीतिगत भाषण और प्रोटोकॉल को लेकर विवाद सामने आए हैं। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत और सीएम सिद्धारमैया
- फोटो : पीटीआई/एएनआई
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विस्तार
केरल और तमिलनाडु के बाद अब कर्नाटक में राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 22 जनवरी को राज्य विधानसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार कर दिया है। इससे पहले तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि मंगलवार को विधानसभा में अपना उद्घाटन भाषण देने से पहले ही बाहर चले गए थे। उन्होंने राष्ट्रगान के प्रति अनादर की भावना व्यक्त करते हुए निराशा जताई थी। वहीं केरल में मंगलवार को तब विवाद उत्पन्न हो गया जब मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के संबोधन समाप्त करने के तुरंत बाद आरोप लगाया था कि उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण को पूरी तरह नहीं पढ़ा।
संयुक्त सत्र से इनकार क्यों अहम है?
कर्नाटक विधानसभा का संयुक्त सत्र 22 से 31 जनवरी तक प्रस्तावित है और इसकी शुरुआत परंपरागत रूप से राज्यपाल के संबोधन से होती है। लेकिन राज्यपाल द्वारा संबोधन से इनकार के बाद स्थिति असमंजस भरी हो गई है। राज्य सरकार की ओर से कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात करने वाला है। फिलहाल राज्यपाल के इनकार के स्पष्ट कारण सामने नहीं आए हैं, लेकिन सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक तय मानी जा रही है।
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एमजीएनरेगा पर टकराव और कांग्रेस का रुख
कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को खत्म करने का आरोप लगा रही है। राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा में प्रस्ताव लाने की तैयारी में है और नए ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ कानून को स्वीकार न करने का फैसला कर चुकी है। कांग्रेस का कहना है कि यह कदम गरीबों और ग्रामीण रोजगार के खिलाफ है। इसी पृष्ठभूमि में संयुक्त सत्र को लेकर टकराव और गहराने की आशंका है।
केरल में नीतिगत भाषण पर विवाद
केरल में भी राज्यपाल और सरकार के बीच हाल ही में तीखा विवाद सामने आया। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण के कई अहम अंश नहीं पढ़े। इन अंशों में केंद्र की राजकोषीय नीति की आलोचना और लंबित विधेयकों का जिक्र था। राजभवन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाषण में तथ्यात्मक त्रुटियां थीं, जिन्हें हटाने का अनुरोध किया गया था। इस विवाद ने केरल की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है।
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तमिलनाडु में राज्यपाल का वॉकआउट
तमिलनाडु में भी विधानसभा सत्र के उद्घाटन दिन विवाद हुआ। राज्यपाल आर.एन. रवि उद्घाटन भाषण दिए बिना ही सदन से बाहर चले गए। उन्होंने राष्ट्रगान के कथित अपमान और माइक्रोफोन बंद किए जाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इसे सदन का अपमान बताया और कहा कि यह विधानसभा की परंपराओं के खिलाफ है। इसके बाद सदन में प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार के तैयार भाषण को ही आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा माना गया।
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कर्नाटक विधानसभा का संयुक्त सत्र 22 से 31 जनवरी तक प्रस्तावित है और इसकी शुरुआत परंपरागत रूप से राज्यपाल के संबोधन से होती है। लेकिन राज्यपाल द्वारा संबोधन से इनकार के बाद स्थिति असमंजस भरी हो गई है। राज्य सरकार की ओर से कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात करने वाला है। फिलहाल राज्यपाल के इनकार के स्पष्ट कारण सामने नहीं आए हैं, लेकिन सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक तय मानी जा रही है।
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कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को खत्म करने का आरोप लगा रही है। राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा में प्रस्ताव लाने की तैयारी में है और नए ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ कानून को स्वीकार न करने का फैसला कर चुकी है। कांग्रेस का कहना है कि यह कदम गरीबों और ग्रामीण रोजगार के खिलाफ है। इसी पृष्ठभूमि में संयुक्त सत्र को लेकर टकराव और गहराने की आशंका है।
केरल में नीतिगत भाषण पर विवाद
केरल में भी राज्यपाल और सरकार के बीच हाल ही में तीखा विवाद सामने आया। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण के कई अहम अंश नहीं पढ़े। इन अंशों में केंद्र की राजकोषीय नीति की आलोचना और लंबित विधेयकों का जिक्र था। राजभवन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाषण में तथ्यात्मक त्रुटियां थीं, जिन्हें हटाने का अनुरोध किया गया था। इस विवाद ने केरल की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है।
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