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कर्नाटक में कांग्रेस की खींचतान: शिवकुमार को कमान या CM सिद्धारमैया का रसूख बरकरार? बंगलूरू में नाश्ते पर नजर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 27 May 2026 10:23 AM IST
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सार
कर्नाटक में एक बार फिर से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दिल्ली में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबी बैठक के बाद इन अटकलों को बल मिला है। वहीं, आज सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार नाश्ते की मेज पर इस संभावित परिवर्तन पर बातचीत कर सकते हैं।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कर्नाटक में एक बार फिर से नेतृत्व परिवर्तन और मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी अटकलों का दौर जारी हो गया है। इन सबके बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज यानी बुधवार को डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार से मुलाकात करेंगे। इन दोनों ही नेताओं ने एक दिन पहले कांग्रेस आलाकमान से दिल्ली में मुलाकात की थी।
2025 में सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद भी इसी तरह की अटकलों को जोर मिला था। हालांकि, उस समय कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद बयानबाजियों का तीखा दौर खत्म हो गया था। हालांकि, अब एक बार फिर से शिवकुमार के खेमे से कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की मांग की जाने लगी है। आइए जानते हैं कर्नाटक को लेकर चल रहे 'नाटक' में हाल के दिनों में क्या हुआ और सिद्धारमैया-शिवकुमार के बीच की खींचतान को खत्म करने के लिए क्या कोशिशें की जा रही हैं...
क्या खत्म होगा कर्नाटक में चल रहा नाटक?
कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व को लेकर खींचतान नए मोड़ पर पहुंच गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस राज्यसभा चुनाव के बाद कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है। इसी मुद्दे को लेकर 26 मई को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच लंबी बातचीत हुई।
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ये भी पढ़ें: पंडित नेहरू की पुण्यतिथि: देश के पहले प्रधानमंत्री को पीएम ने किया याद, वीडियो साझा कर बोली कांग्रेस- डरो मत
हालांकि बैठक के बाद पार्टी ने साफ तौर पर किसी नेतृत्व परिवर्तन से इनकार किया, लेकिन अंदरखाने में चर्चा तेज बनी हुई है। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि बैठक में केवल राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों पर चर्चा हुई। हालांकि, सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच चल रही सत्ता की खींचतान पर भी शीर्ष नेतृत्व ने अलग-अलग बातचीत की।
शिवकुमार खेमे की क्या है मांग?
कर्नाटक की सियासत में लंबे समय से ये सवाल गूंज रहा है कि क्या सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा? डिप्टी सीएम शिवकुमार के खेमे के विधायक खुलकर दावा कर चुके हैं कि 2023 विधानसभा चुनाव के समय ढाई साल बाद डीके को मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया गया था।
कांग्रेस ने निकाल लिया कर्नाटक का फॉर्मूला
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान सिद्धारमैया को केंद्र की राजनीति में लाना चाहता है। आगामी राज्यसभा चुनाव में उन्हें प्रत्याशी बनाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिद्धारमैया ने अभी तक इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। अटकलें हैं कि आज डीके शिवकुमार के साथ मुलाकात में इस मुद्दे पर फैसला लिया जा सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतृत्व परिवर्तन के बाद सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को शिवकुमार की कैबिनेट में मंत्री पद मिल सकता है। वहीं, सिद्धारमैया ने गुरुवार की सुबह मंत्रियों की बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ही वह इस्तीफे का फैसला ले सकते हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें फैसला लेने के लिए दो दिन का समय दिया है।
खरगे का भी फंसा पेंच
वहीं, एक फॉर्मूला यह भी सामने आया है कि डीके शिवकुमार की जगह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को कर्नाटक का सीएम बनाया जा सकता है। दरअसल, मल्लिकार्जुन खरगे का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 2028 के विधानसभा चुनाव में खुद को एक बार फिर से मजबूत दावेदार साबित करने के लिए डीके शिवकुमार की जगह फिलहाल खरगे को सीएम पद पर बैठाया जाए।
कांग्रेस अध्यक्ष भी बदलने का मौका
पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि इस फॉर्मूले की वजह सिद्धारमैया गुट की नाराजगी को साधने और कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व में नयापन लाने की कोशिश है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गांधी के करीबी केसी वेणुगोपाल को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं, खरगे को कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद देकर दलित चेहरे को भुनाने की कोशिश की जाएगी।
ये भी पढ़ें: क्या BJP थी रेवंत रेड्डी की पसंद?: कांग्रेसी CM पर तेलंगाना के सांसद का चौंकाने वाला दावा, निष्ठा पर उठाए सवाल
सियासी जानकारों का मानना है कि कांग्रेस फिलहाल राज्यसभा चुनाव से पहले किसी बड़े विवाद से बचना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से किसी भी बदलाव की बात से इनकार कर रहा है। हालांकि, अंदरूनी हलचल यह संकेत दे रही है कि राज्यसभा चुनाव खत्म होते ही कर्नाटक कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आ सकता है।
2025 में सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद भी इसी तरह की अटकलों को जोर मिला था। हालांकि, उस समय कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद बयानबाजियों का तीखा दौर खत्म हो गया था। हालांकि, अब एक बार फिर से शिवकुमार के खेमे से कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की मांग की जाने लगी है। आइए जानते हैं कर्नाटक को लेकर चल रहे 'नाटक' में हाल के दिनों में क्या हुआ और सिद्धारमैया-शिवकुमार के बीच की खींचतान को खत्म करने के लिए क्या कोशिशें की जा रही हैं...
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क्या खत्म होगा कर्नाटक में चल रहा नाटक?
कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व को लेकर खींचतान नए मोड़ पर पहुंच गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस राज्यसभा चुनाव के बाद कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है। इसी मुद्दे को लेकर 26 मई को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच लंबी बातचीत हुई।
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हालांकि बैठक के बाद पार्टी ने साफ तौर पर किसी नेतृत्व परिवर्तन से इनकार किया, लेकिन अंदरखाने में चर्चा तेज बनी हुई है। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि बैठक में केवल राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों पर चर्चा हुई। हालांकि, सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच चल रही सत्ता की खींचतान पर भी शीर्ष नेतृत्व ने अलग-अलग बातचीत की।
शिवकुमार खेमे की क्या है मांग?
कर्नाटक की सियासत में लंबे समय से ये सवाल गूंज रहा है कि क्या सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा? डिप्टी सीएम शिवकुमार के खेमे के विधायक खुलकर दावा कर चुके हैं कि 2023 विधानसभा चुनाव के समय ढाई साल बाद डीके को मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया गया था।
कांग्रेस ने निकाल लिया कर्नाटक का फॉर्मूला
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान सिद्धारमैया को केंद्र की राजनीति में लाना चाहता है। आगामी राज्यसभा चुनाव में उन्हें प्रत्याशी बनाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिद्धारमैया ने अभी तक इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। अटकलें हैं कि आज डीके शिवकुमार के साथ मुलाकात में इस मुद्दे पर फैसला लिया जा सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतृत्व परिवर्तन के बाद सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को शिवकुमार की कैबिनेट में मंत्री पद मिल सकता है। वहीं, सिद्धारमैया ने गुरुवार की सुबह मंत्रियों की बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ही वह इस्तीफे का फैसला ले सकते हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें फैसला लेने के लिए दो दिन का समय दिया है।
खरगे का भी फंसा पेंच
वहीं, एक फॉर्मूला यह भी सामने आया है कि डीके शिवकुमार की जगह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को कर्नाटक का सीएम बनाया जा सकता है। दरअसल, मल्लिकार्जुन खरगे का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 2028 के विधानसभा चुनाव में खुद को एक बार फिर से मजबूत दावेदार साबित करने के लिए डीके शिवकुमार की जगह फिलहाल खरगे को सीएम पद पर बैठाया जाए।
कांग्रेस अध्यक्ष भी बदलने का मौका
पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि इस फॉर्मूले की वजह सिद्धारमैया गुट की नाराजगी को साधने और कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व में नयापन लाने की कोशिश है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गांधी के करीबी केसी वेणुगोपाल को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं, खरगे को कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद देकर दलित चेहरे को भुनाने की कोशिश की जाएगी।
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सियासी जानकारों का मानना है कि कांग्रेस फिलहाल राज्यसभा चुनाव से पहले किसी बड़े विवाद से बचना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से किसी भी बदलाव की बात से इनकार कर रहा है। हालांकि, अंदरूनी हलचल यह संकेत दे रही है कि राज्यसभा चुनाव खत्म होते ही कर्नाटक कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आ सकता है।