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केरल विधानसभा का फैसला: गवर्नर के पत्रों पर नहीं होगा विचार, कैबिनेट का भाषण ही माना जाएगा आधिकारिक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: अमन तिवारी Updated Tue, 24 Feb 2026 12:01 PM IST
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सार

केरल विधानसभा ने गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के उन पत्रों पर चर्चा करने से मना कर दिया, जिनमें उन्होंने अपने पढ़े गए भाषण को आधिकारिक मानने की मांग की थी। स्पीकर ने सीएम की राय मानते हुए फैसला दिया कि कैबिनेट से मंजूर भाषण ही मान्य होगा। 

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केरल विधानसभा - फोटो : ANI
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विस्तार

केरल विधानसभा ने मंगलवार को एक अहम फैसला लिया। सदन ने तय किया कि गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने स्पीकर को जो पत्र लिखे थे, उन पर विचार करने की कोई जरूरत नहीं है। इन पत्रों में गवर्नर ने मांग की थी कि सदन में उन्होंने जो नीतिगत भाषण (पॉलिसी एड्रेस) पढ़ा था, उसे ही आधिकारिक माना जाए।
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स्पीकर ने सीएम के दलीलों पर सुनाया फैसला
स्पीकर ए.एन. शमसीर ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की दलीलों के आधार पर यह फैसला सुनाया। सीएम विजयन ने सदन को बताया कि पहले भी ऐसे मौके आए हैं जब गवर्नरों ने भाषण के कुछ हिस्सों पर अपनी अलग राय जताई थी या सीएम को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा, "यह एक परंपरा रही है। जब भी गवर्नरों ने भाषण के कुछ हिस्से छोड़े हैं, स्पीकरों ने हमेशा यही फैसला दिया है कि कैबिनेट से मंजूर किया गया भाषण ही आधिकारिक होगा।"
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सीएम ने आगे कहा कि इस बार गवर्नर ने भाषण के किसी भी हिस्से पर अपनी असहमति के बारे में उन्हें पहले नहीं बताया। गवर्नर का कैबिनेट से पास हुए भाषण को अपनी मर्जी से बदलना और फिर उसे सदन में पढ़ना पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसदीय लोकतंत्र में ऐसे कदम को संवैधानिक नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और पुराने उदाहरणों का हवाला देते हुए सीएम ने कहा कि गवर्नर के पत्रों को सदन में रखने की जरूरत नहीं है। इस पर स्पीकर शमसीर ने फैसला सुनाया, 'सीएम की सफाई को देखते हुए, विधानसभा ने तय किया है कि गवर्नर के भेजे पत्रों पर विचार करना जरूरी नहीं है।'

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क्या था मामला?
बजट सत्र शुरू होने से पहले 20 जनवरी को अपने भाषण के दौरान गवर्नर आर्लेकर ने लिखित भाषण के कुछ हिस्से नहीं पढ़े थे। उन्होंने उन हिस्सों को छोड़ दिया था जिनमें केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की गई थी और राजभवन के पास मंजूरी के लिए अटके बिलों का जिक्र था। इसके अलावा, उन्होंने अपनी तरफ से भी कुछ बातें जोड़ी थीं।

घटना के बाद सीएम विजयन ने स्पीकर से मांग की थी कि राज्य कैबिनेट से मंजूर भाषण को ही आधिकारिक माना जाए, न कि गवर्नर के बदलावों वाले भाषण को। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट के भाषण में अपनी मर्जी से कुछ छोड़ना या जोड़ना नियमों के हिसाब से मान्य नहीं है, इसलिए मूल भाषण ही रिकॉर्ड पर रहेगा।

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