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Kerala: डॉक्टर की लापरवाही ने ली मासूम की जान, एनीस्थीसिया के बाद 18 माह के बच्चे की मौत; परिजनों में आक्रोश

Sat, 11 Jul 2026 10:43 AM IST
Asmita Tripathi आईएएनएस, कन्नूर
आईएएनएस, कन्नूर Published by: Asmita Tripathi Updated Sat, 11 Jul 2026 10:43 AM IST
सार

केरल में कटे होंठ पर टांके लगाने से पहले एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद 18 महीने के बच्चे की हालत बिगड़ गई। पांच दिन बाद उसकी मौत हो गई। परिवार की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 

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Kerala Doctor's negligence claims innocent life; 18-month-old child dies after anesthesia; family outraged.
18 महीने के मासूम की मौत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केरल के कन्नूर में एक निजी अस्पताल में 18 महीने के एक बच्चे की मौत हो गई। कटे हुए होंठ पर टांके लगाने के लिए एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद उसकी हालत पांच दिनों से गंभीर बनी हुई थी। बच्चे की मौत के बाद डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

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क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, 5 जुलाई को घर के आंगन में खेलते समय गिरने से बच्चे के होंठ पर कट लग गया था। उनके माता-पिता उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने घाव पर टांके लगाने के लिए एनेस्थीसिया दिया। इसके तुरंत बाद बच्चे की हालत गंभीर हो गई और उसे होश नहीं आया। बाद में अस्पताल ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए अपनी कन्नूर यूनिट में शिफ्ट कर दिया, जहां शुक्रवार रात करीब 9 बजे उनकी मौत हो गई।

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डॉक्टर पर मुकदमा दर्ज
मृतक बच्चे की पहचान एरामम-कुटूर ग्राम पंचायत के मथामंगलम निवासी देवांश शौर्य के रूप में हुई है। यह अपने परिवार की इकलौती संतान था। माता-पिता की शादी के 8 साल बाद देवांश पैदा हुआ था। बच्चे की मौत के बाद पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने अस्पताल के डॉक्टर पर मुकदमा दर्ज किया है। डॉक्टर पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया गया, जो जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कामों से संबंधित है। इसमें अधिकतम तीन महीने की जेल की सजा का प्रावधान है।

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अस्पताल ने क्या कहा?
हालांकि, अस्पताल ने मेडिकल लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल ने पहले एक बयान में कहा था कि एनेस्थीसिया दिए जाने के तुरंत बाद बच्चे को अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ और उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया, जिसके बाद उसे बेहतर क्रिटिकल केयर के लिए कन्नूर हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया।

अस्पताल की ओर से कहा गया कि सही डोज और मेडिकल देखभाल के बावजूद एनेस्थीसिया के बाद जटिलताएं हो सकती हैं, लेकिन इलाज के सभी प्रोटोकॉल का पालन किया गया था और बच्चे की जान बचाने की हर संभव कोशिश की गई थी। 

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