Khabaron Ke Khiladi: असम, केरल और पुदुचेरी में हुआ बंपर मतदान, खबरों के खिलाड़ी ने बताए इसके क्या मायने
असम, केरल और पुदुचेरी में इस बार रिकॉर्ड मतदान हुआ। विशेषज्ञों ने विकास, ध्रुवीकरण, संगठनों की भूमिका और नेताओं के प्रभाव को अहम बताया। बढ़ते वोट प्रतिशत के पीछे मुफ्त योजनाएं और बदलते राजनीतिक रुझान भी कारण माने गए।
विस्तार
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में तीन राज्यों असम, केरल और पुदुचेरी में इस हफ्ते मतदान हुआ। तीनों राज्यों में जमकर वोटिंग हुई। 2021 के मुकाबले तीनों राज्यों में ज्यादा वोटिंग हुई। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, अवधेश कुमार, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
अवधेश कुमार: कई बार हम बदलाव चाहते हैं या हमें कोई चीज पसंद नहीं है उसके आधार पर जनता वोट नहीं करती। बिहार के चुनाव में भी यह देखा गया था। पिछले दस वर्षों में असम में आमूल बदलाव आ गया है। असम देश के सर्वाधिक विकास करते हुए राज्यों में शामिल हो गया है। असम की जनता ने मुद्दों के आधार पर वोट किया है।
पूर्णिमा त्रिपाठी: महिलाओं ने इस बार बहुत ज्यादा तादाद में निकलकर वोट डाला है। असम हो, पुदुचेरी या केरल तीनों जगह ये दिखाई दिया है। ट्रेंड को देखें तो महिलाओं का वोट एक तरफा जाता हुआ दिखाई पड़ता है। असम में कांग्रेस कमजोर दिखाई दे रही थी। चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस के बड़े नेता का पार्टी छोड़ना भी उसे नुकसान करता दिखता है। पता तो चार तारीख को ही चलेगा कि जनता ने किसके मुद्दों को समर्थन दिया।
राकेश शुक्ल: केरल में बंपर वोटिंग का ट्रेंड रहा है। इस बार जो अलग है वो है महिला वोटरों की भागीदारी बढ़ना। चुनाव में जो बहुत अच्छा मैकेनिजम कर लेता है वो चुनाव जीत लेता है। केरल में इस बार लेफ्ट का मैकेनिजम थोड़ा गड़बड़ाया हुआ है। भाजपा ने वहां पर लेफ्ट का ये मैकेनिजम गड़बड़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। मुझे लगता है कि इस बार चुनाव में केरल में कांग्रेस की स्थिति थोड़ी मजबूत दिखती है। वहीं भाजपा का फोकस अपना वोट शेयर बढ़ाने पर ज्यादा दिखाई देता है।
अनुराग वर्मा: पिछले कुछ वर्षों में अगर हम मतदान प्रतिशत का विश्लेषण करते हैं तो लगभग हर चुनाव में मतदान प्रतिशत में इजाफा हो रहा है। वोट प्रतिशत बढ़ने या घटने की जो परिपाटी हुआ करती थी वो अब टूट गई है। जैसे मध्य प्रदेश में वोट प्रतिशत बढ़ता है या घटता पर वहां सरकार बदलती नहीं है, इसी तरह पंजाब में मतदान प्रतिशत बढ़ता है या घटता पर सरकारें बदल जा रही हैं। वोट प्रतिशत बढ़ने का एक बड़ा कारण सरकारों द्वारा चलाई जा रही मुफ्त वाली योजनाएं हैं। असम में वोट प्रतिशत बढ़ने का कारण मुझे लगता है कि वहां दोनों तरफ ध्रुवीकरण होना रहा।
विनोद अग्निहोत्री: प्रतिशत बढ़ने का मतलब ये जरूरी नहीं है वोट पिछली बार से ज्यादा पड़ें हों। क्योंकि एसआईआर के बाद वोटर घटे हैं। इसलिए जरूरी नहीं कि मतदान प्रतिशत बढ़ने का मतलब वोट बढ़ाना हो। गौरव गोगोई को कम नहीं आंका जा सकता है। गौरव गोगोई के साथ अपने पिता तरुण गोगोई की लेगेसी भी है। हिमंत बिस्वा सरमा की छवि एक तेज और आक्रामक नेता की रही है। जहां तक बात नेताओं के पार्टी छोड़ने की है तो उनके अपने-अपने कारण होते हैं।