Maharashtra: वारकरी संप्रदाय को लेकर महाराष्ट्र में सियासी घमासान, शरद पवार और देवेंद्र फडणवीस आमने-सामने
महाराष्ट्र में वारकरी संप्रदाय पर शरद पवार के बयान और सीएम देवेंद्र फडणवीस के अर्बन नक्सल वाले पलटवार की पूरी कवरेज पढ़ें। राजनीतिक घमासान और 900 साल पुरानी परंपरा के बारे में विस्तार से जानने के लिए क्लिक करें।
विस्तार
महाराष्ट्र की राजनीति में सदियों पुराने वारकरी संप्रदाय को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार की उस टिप्पणी का कड़ा विरोध किया है, जिसमें पवार ने इस संप्रदाय में गलत तत्वों के प्रवेश की बात कही थी। इस वैचारिक टकराव ने राज्य में एक नई राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है।
पवार का दावा और फडणवीस का पलटवार
एक पत्रिका में प्रकाशित अपने लेख में शरद पवार ने चिंता जताते हुए लिखा था कि हाल के समय में वारकरी परंपरा में गलत तत्व प्रवेश कर गए हैं और संप्रदाय के कुछ उपदेशकों के प्रवचन धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा दे रहे हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने शनिवार को इस लेख को पूरी तरह से गलत करार देते हुए कहा कि यह पवार की इस परंपरा के प्रति समझ की कमी को दर्शाता है। फडणवीस ने कड़ा पलटवार करते हुए दावा किया कि कुछ ऐसे लोगों ने हाल ही में वारकरी आंदोलन में घुसपैठ की थी, जिनके तार 'अर्बन नक्सल' से जुड़े थे, लेकिन सौभाग्य से आंदोलन ने उन्हें सिरे से नकार दिया।
सरकार के पास मौजूद हैं खुफिया डॉजियर
गृह विभाग का प्रभार भी संभाल रहे मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ पुख्ता 'डॉजियर' मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यिक मंचों पर विभिन्न विचार प्रस्तुत किए जाते हैं और पवार के लेख को पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके बड़े कद को देखते हुए पत्रिका में शामिल किया गया होगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्या लिखना है, यह पवार का विशेषाधिकार है और हर किसी को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री ने पवार के लेख की सामग्री पर गहरा दुख व्यक्त किया।
900 साल पुरानी समृद्ध और समावेशी परंपरा
इस राजनीतिक बयानबाजी के बीच, वारकरी संप्रदाय की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अहमियत को समझना महत्वपूर्ण है। 'वारकरी' शब्द का उपयोग मुख्य रूप से पंढरपुर के भगवान विट्ठल के उन भक्तों के लिए किया जाता है जो मंदिर शहर की वार्षिक पैदल तीर्थयात्रा करते हैं। इस संप्रदाय का इतिहास 800 से 900 साल पुराना है और यह भाईचारे, आध्यात्मिक शुद्धता और भागवत परंपरा की शिक्षाओं में गहराई से निहित है। इस ऐतिहासिक परंपरा ने तुकाराम और नामदेव जैसे महान भक्ति कवियों को प्रेरित किया है। फडणवीस ने जोर देकर कहा कि वारकरी परंपरा बेहद समृद्ध और समावेशी है, जो मन की शुद्धि के साथ-साथ प्रकृति के साथ सद्भाव स्थापित करने पर जोर देती है।
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