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Khabaron Ke Khiladi: जंतर-मंतर से रांची तक का आक्रोश सियासी दलों को दे रहा क्या संदेश, विश्लेषकों से समझें

Sat, 15 Aug 2026 05:23 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 15 Aug 2026 05:23 PM IST
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Khabaron Ke Khiladi Jantar Mantar to Ranchi Youth Protests Political Parties messaging expert analayze news
खबरों के खिलाड़ी में छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा। - फोटो : अमर उजाला

जंतर-मंतर के बाद झारखंड की राजधानी रांची में चल रहा आंदोलन सुर्खियों में है। जंतर-मंतर पर जो सियासी दल प्रदर्शन में शामिल थे वो रांची में नहीं दिख रहे। वहीं, जो सियासी दल जंतर-मंतर में नहीं दिख रहे थे वो रांची के प्रदर्शन में कंधे से कंधा मिलकर चलते दिख रहे हैं। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और एसके दत्ता मौजूद रहे। 

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पीयूष पंत: चाहे मामला जंतर-मंतर का हो या रांची का मामला हो, उसने ये दिखा दिया है कि व्यवस्था किस तरह से ध्वस्त हो गई है। राज्य सरकार को आशंका है कि सीबीआई जांच होगी तो और राज खुलेंगे, इसलिए वो आनाकानी कर रही है। पूरा सिस्टम इतना भ्रष्ट हो गया है कि जब तक आप गले से नहीं पकड़ेंगे तब तक चीजें ऐसी चलती रहेंगी। जहां जो विपक्ष में है वो वहां के मुद्दे उठा रहा है। चाहे जंतर मंतर हो या रांची। 

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पूर्णिमा त्रिपाठी: ये पूरी तरह से सत्ता पक्ष और विपक्ष का खेल है। वहां जो सत्ता पक्ष में वो कैसे चिल्लाएंगे। वहां जो विपक्ष में हैं वो चिल्ला रहे हैं। इसी तरह जब यहां हुआ था तो जो यहां विपक्ष में थे वो चिल्ला रहे थे। मुख्य चिज ये है कि जो छात्रों का मुद्दा है उसे पार्टियां अपने-अपने हिसाब से उठा रही हैं। सच्चाई ये है कि पूरी शिक्षा व्यवस्था अंदर से सड़ गई है। 

राकेश शुक्ल: झारखंड का छात्र आंदोलन हो या जंतर-मंतर का आंदोलन हो इनमें न तो सत्ता पक्ष की कोई भूमिका है न ही विपक्ष की। अब हम इस पर चर्चा कर रहे हैं कि जेन-जी किसके साथ जाएगा। हम उनकी समस्याओं पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। तीन लोगों की गिरफ्तारी से क्या सबकुछ आगे नहीं होगा? सीबीआई के पास 158 मामले पहले आए हैं। उन्होंने जांच किया। 2002-2003 के मामले में अब तक ट्रायल नहीं शुरू हुआ है। जब हम राजनीतिक चश्मा उतारकर बच्चों की समस्याओं पर बात करेंगे तब कुछ होगा। 

एसके दत्ता: इस मामले में गुंजाइश और गुंजाइश नहीं होने की बात ही नहीं है। पूरे देश में एजुकेशन का सिस्टम चरमरा गया है। इसके लिए सभी राजनीतिक दल उतने ही जिम्मेदार हैं जितना मौजूदा सत्ता पक्ष जिम्मेदार है। 20-25 साल पुराने मामलों में भी अगर सुनवाई नहीं हो रही है तो कौन जिम्मेदार है?  जंतर-मंतर पर भी चर्चा होनी चाहिए, रांची पर भी चर्चा होनी चाहिए और बाकी सभी राज्यों पर भी चर्चा होनी चाहिए। और समाधान निकालने की ओर बात होनी चाहिए। 

विनोद अग्निहोत्री:  मेरा मानना है कि हेमंत सोरेन सरकार ने शुरू से इसे मिस हैंडल किया। ये समस्या ये राज्य की नहीं, एक दल की नहीं है। ये पूरे तंत्र की समस्या है। समस्या की जड़पर न जाकर सभी लक्षण की बात कर रहे हैं। इसके लिए गंभीरता से कदम उठाना होगा। हर कोई इन बच्चों को टूल के रूप में देख रहा है, कोई उनकी समस्या को नहीं देख रहा है। मुझे लगता है कि समस्या की जड़ पर प्रहार होना चाहिए।
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