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'RSS को पंजीकरण की जरूरत नहीं': बीएल संतोष ने प्रियांक खरगे को दिया जवाब, अखंड भारत पर भी कही बड़ी बात
Sat, 15 Aug 2026 05:45 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, पीटीआई/ बंगलूरू।
एएनआई, पीटीआई/ बंगलूरू।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 15 Aug 2026 05:45 PM IST
सार
आरएसएस के पंजीकरण की मांग के बीच बीएल संतोष ने कहा कि संगठन को अपनी पहचान के लिए किसी पंजीकरण की जरूरत नहीं है। उन्होंने आजादी, विभाजन और हिंदू आबादी से जुड़े कई दावे किए। साथ ही ‘अखंड भारत’ को लेकर बड़ा संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने क्या-क्या कहा? जानिए...
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बीएल संतोष, राष्ट्रीय महासचिव, भाजपा
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
आरएसएस के पंजीकरण को लेकर कर्नाटक में सियासत गरमा गई है। राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने आरएसएस का पंजीकरण कराने की मांग की है। अब भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने इसका जवाब दिया है। संतोष ने कहा कि आरएसएस को अपना अस्तित्व साबित करने के लिए पंजीकरण की जरूरत नहीं है। संगठन लाखों लोगों के भरोसे से चलता है। संतोष शनिवार को बंगलूरू में हिंदू जागरण वेदिके के ‘अखंड भारत संकल्प दिवस’ कार्यक्रम में बोल रहे थे।
क्या आरएसएस बिना पंजीकरण के ही चलता रहेगा?
बीएल संतोष ने आगे कहा कि आरएसएस विभाजन के समय भी पंजीकृत नहीं था। आज भी उसका औपचारिक पंजीकरण नहीं है। इसके बावजूद संगठन काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पंजीकरण से किसी संगठन का अस्तित्व तय नहीं होता। आरएसएस लाखों लोगों के भरोसे पर काम करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विभाजन के समय आरएसएस हिंदुओं के साथ खड़ा था।
चरखा चलाने से नहीं मिली आजादी: बीएल संतोष
संतोष ने यह भी कहा कि भारत को आजादी केवल नमक सत्याग्रह या चरखा चलाने से नहीं मिली। इसके पीछे हजारों क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान था। उन्होंने कहा कि लाखों देशभक्त युवाओं और सैनिकों ने अपनी जान दांव पर लगाई थी। मदन लाल ढींगरा, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 80वें स्वतंत्रता वर्ष में उनके बलिदान को याद करना जरूरी है। संतोष ने कहा, 'आजादी हमें किसी ने तोहफे में नहीं दी थी। अंग्रेजों ने बस यूं ही हमें आजादी नहीं दी।'
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यह भी पढ़ें: '370 नहीं हटता तो...': POK पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा दावा- वहां के लोग हमारे अपने, एक दिन विधानसभा में बैठेंगे
हिंदू आबादी पर क्या बोले?
बीएल संतोष ने दावा किया कि किसी क्षेत्र में हिंदू आबादी घटने से भारत से जुड़ाव की भावना कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि जहां हिंदू आबादी घटती है, वहां 'राष्ट्रविरोधी भावना' पैदा होने लगती है। बंगलूरू की शिवाजीनगर और चामराजपेट सीटों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दो दशक से किसी भी राजनीतिक दल का हिंदू उम्मीदवार वहां नहीं जीता है।
संतोष ने कहा, 'हिंदुओं को बहुमत में इसलिए रहना चाहिए क्योंकि भारत को भारत ही रहना है।' संतोष ने पाकिस्तान की मांग को जनसंख्या में बदलाव से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम लीग की राजनीतिक लामबंदी आखिरकार देश के विभाजन तक पहुंची।
‘अखंड भारत’ पर क्या बोले?
संतोष ने ‘अखंड भारत’ के लिए काम करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि अविभाजित भारत का विचार कोई प्रशासनिक सपना नहीं है। यह सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी सपना है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय को यह संकल्प लेना चाहिए कि हमारे बीच जो सबसे बुजुर्ग हैं, वे अपने जीवनकाल में अखंड भारत को अपनी आंखों से देखें। संतोष ने इसे असंभव विचार मानने से इनकार किया। उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण और वियतनाम के एक होने का उदाहरण दिया।
बीएल संतोष के दावे को प्रियांक खरगे ने किया खारिज
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएल संतोष के उस दावे को पूरी तरह से नकार दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हैदराबाद रियासत के भारत में विलय के दौरान रजाकारों से खरगे परिवार की रक्षा आरएसएस कार्यकर्ताओं ने की थी। प्रियांक खरगे ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके परिवार और उस क्षेत्र की जनता की रक्षा संघ ने नहीं, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और भारतीय सेना ने की थी।
'ऑपरेशन पोलो' और इतिहास पर तीखी बहस
यह विवाद बीएल संतोष के 'अखंड भारत संकल्प दिवस' कार्यक्रम में दिए बयान के बाद शुरू हुआ। संतोष ने दावा किया था कि देश के विभाजन और रजाकारों की हिंसा के वक्त आरएसएस कार्यकर्ताओं ने रजाकारों का डटकर मुकाबला किया था और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के परिवार की रक्षा की थी। इस पर जवाब देते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि सितंबर 1948 में हैदराबाद को भारत का हिस्सा बनाने के लिए 'ऑपरेशन पोलो' भारतीय सेना ने चलाया था, न कि संघ ने।
सरकारी संपत्ति बिल पर प्रियंक खरगे ने भाजपा को घेरा
दूसरी ओर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने सरकारी संपत्ति से जुड़े नए विधेयक पर भाजपा के विरोध का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि इस बिल में किसी भी संगठन या पार्टी का नाम नहीं है। यह कानून सिर्फ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए लाया जा रहा है। सरकार का मकसद सार्वजनिक जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों को सही तरीके से नियंत्रित करना है।
प्रियंक खरगे ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल नियम के तहत ही होना चाहिए। किसी भी निजी कार्यक्रम के लिए अनुमति लेना जरूरी है, ताकि आम जनता को कोई परेशानी न हो। उन्होंने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष बिना वजह इस बिल से डर रहा है और राजनीति कर रहा है।
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क्या आरएसएस बिना पंजीकरण के ही चलता रहेगा?
बीएल संतोष ने आगे कहा कि आरएसएस विभाजन के समय भी पंजीकृत नहीं था। आज भी उसका औपचारिक पंजीकरण नहीं है। इसके बावजूद संगठन काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पंजीकरण से किसी संगठन का अस्तित्व तय नहीं होता। आरएसएस लाखों लोगों के भरोसे पर काम करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विभाजन के समय आरएसएस हिंदुओं के साथ खड़ा था।
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चरखा चलाने से नहीं मिली आजादी: बीएल संतोष
संतोष ने यह भी कहा कि भारत को आजादी केवल नमक सत्याग्रह या चरखा चलाने से नहीं मिली। इसके पीछे हजारों क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान था। उन्होंने कहा कि लाखों देशभक्त युवाओं और सैनिकों ने अपनी जान दांव पर लगाई थी। मदन लाल ढींगरा, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 80वें स्वतंत्रता वर्ष में उनके बलिदान को याद करना जरूरी है। संतोष ने कहा, 'आजादी हमें किसी ने तोहफे में नहीं दी थी। अंग्रेजों ने बस यूं ही हमें आजादी नहीं दी।'
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हिंदू आबादी पर क्या बोले?
बीएल संतोष ने दावा किया कि किसी क्षेत्र में हिंदू आबादी घटने से भारत से जुड़ाव की भावना कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि जहां हिंदू आबादी घटती है, वहां 'राष्ट्रविरोधी भावना' पैदा होने लगती है। बंगलूरू की शिवाजीनगर और चामराजपेट सीटों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दो दशक से किसी भी राजनीतिक दल का हिंदू उम्मीदवार वहां नहीं जीता है।
संतोष ने कहा, 'हिंदुओं को बहुमत में इसलिए रहना चाहिए क्योंकि भारत को भारत ही रहना है।' संतोष ने पाकिस्तान की मांग को जनसंख्या में बदलाव से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम लीग की राजनीतिक लामबंदी आखिरकार देश के विभाजन तक पहुंची।
‘अखंड भारत’ पर क्या बोले?
संतोष ने ‘अखंड भारत’ के लिए काम करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि अविभाजित भारत का विचार कोई प्रशासनिक सपना नहीं है। यह सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी सपना है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय को यह संकल्प लेना चाहिए कि हमारे बीच जो सबसे बुजुर्ग हैं, वे अपने जीवनकाल में अखंड भारत को अपनी आंखों से देखें। संतोष ने इसे असंभव विचार मानने से इनकार किया। उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण और वियतनाम के एक होने का उदाहरण दिया।
बीएल संतोष के दावे को प्रियांक खरगे ने किया खारिज
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएल संतोष के उस दावे को पूरी तरह से नकार दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हैदराबाद रियासत के भारत में विलय के दौरान रजाकारों से खरगे परिवार की रक्षा आरएसएस कार्यकर्ताओं ने की थी। प्रियांक खरगे ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके परिवार और उस क्षेत्र की जनता की रक्षा संघ ने नहीं, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और भारतीय सेना ने की थी।
'ऑपरेशन पोलो' और इतिहास पर तीखी बहस
यह विवाद बीएल संतोष के 'अखंड भारत संकल्प दिवस' कार्यक्रम में दिए बयान के बाद शुरू हुआ। संतोष ने दावा किया था कि देश के विभाजन और रजाकारों की हिंसा के वक्त आरएसएस कार्यकर्ताओं ने रजाकारों का डटकर मुकाबला किया था और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के परिवार की रक्षा की थी। इस पर जवाब देते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि सितंबर 1948 में हैदराबाद को भारत का हिस्सा बनाने के लिए 'ऑपरेशन पोलो' भारतीय सेना ने चलाया था, न कि संघ ने।
सरकारी संपत्ति बिल पर प्रियंक खरगे ने भाजपा को घेरा
दूसरी ओर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने सरकारी संपत्ति से जुड़े नए विधेयक पर भाजपा के विरोध का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि इस बिल में किसी भी संगठन या पार्टी का नाम नहीं है। यह कानून सिर्फ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए लाया जा रहा है। सरकार का मकसद सार्वजनिक जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों को सही तरीके से नियंत्रित करना है।
प्रियंक खरगे ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल नियम के तहत ही होना चाहिए। किसी भी निजी कार्यक्रम के लिए अनुमति लेना जरूरी है, ताकि आम जनता को कोई परेशानी न हो। उन्होंने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष बिना वजह इस बिल से डर रहा है और राजनीति कर रहा है।