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Khabaron Ke Khiladi: पीडीए के बदले मतलब के साथ किसे साध रहे अखिलेश? विश्लेषकों ने बताया 2027 चुनाव का प्लान
Sat, 08 Aug 2026 05:01 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 08 Aug 2026 05:01 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को सात महीने से भी कम का वक्त बचा है। सियासी दलों ने अभी से अपने समीकरण ठीक करने शुरू कर दिए हैं। सत्ताधारी भाजपा खासतौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार की उपलब्धियों और कामों को जनता के बीच पहुंचाने में लगी है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी भी अपने साथ नए वोटर जोड़ने की कोशिश में लगी हुई है। इसी हफ्ते सपा का ब्राह्मण सम्मेलन सुर्खियों में रहा। इस पर सियासत भी हो रही है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और मीहिर रंजन मौजूद रहे।
पीयूष पंत: समाजवादी पार्टी ब्राह्मण वोट बैंक को अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है। भाजपा हिदुत्व के मुद्दे को लेकर चलती रही है। अब अगर आप भी ये करेंगे तो ये फिर तो भाजपा तो ये करती ही रही है। कांग्रेस भी इस तरह की कोशिश कर चुकी है। सपा चढ़ावा चोरी के मामले को भी लगातार उठा रही है। योगी सरकार को 10 साल होने जा रहे हैं। सरकार से जो नाराजगियां है अखिलेश उसे भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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पीयूष पंत: समाजवादी पार्टी ब्राह्मण वोट बैंक को अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है। भाजपा हिदुत्व के मुद्दे को लेकर चलती रही है। अब अगर आप भी ये करेंगे तो ये फिर तो भाजपा तो ये करती ही रही है। कांग्रेस भी इस तरह की कोशिश कर चुकी है। सपा चढ़ावा चोरी के मामले को भी लगातार उठा रही है। योगी सरकार को 10 साल होने जा रहे हैं। सरकार से जो नाराजगियां है अखिलेश उसे भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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मिहिर रंजन: अखिलेश यादव को पीडीए का विस्तार करना चाहिए। अखिलेश यादव को पता है कि मायावती का कुछ वोट अगर अपने साथ जोड़ा जा सके तो ये बहुत अच्छा मौका है। वो लगातार इसी की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह से जो मायावती एक्स पर पोस्ट करके उनके ऊपर हमलावर हैं और कह रही हैं कि ब्राह्मण वोटर के बसपा से जुड़ने की वजह से अखिलेश विचिलित हैं।
पूर्णिमा त्रिपाठी: अखिलेश बिलकुल कन्फ्यूज नहीं है। भले राजनीतिक विश्लेषक उन्हें इमेच्योर मानते हैं, लेकिन उन्हें ये लग रहा है कि अगर अपर कास्ट का वोटर है अगर वो खुद को पीड़ित महसूस कर रहा है तो क्यों ना उसे अपने साथ जोड़ा जाए। उन्हें लग रहा है कि अगर हर तबके से थोड़ा-थोड़ा उसने जुड़ता है और उनका अपना वोट बैंक इंटैक्ट रहता है तो उनको फायदा हो सकता है।
पूर्णिमा त्रिपाठी: अखिलेश बिलकुल कन्फ्यूज नहीं है। भले राजनीतिक विश्लेषक उन्हें इमेच्योर मानते हैं, लेकिन उन्हें ये लग रहा है कि अगर अपर कास्ट का वोटर है अगर वो खुद को पीड़ित महसूस कर रहा है तो क्यों ना उसे अपने साथ जोड़ा जाए। उन्हें लग रहा है कि अगर हर तबके से थोड़ा-थोड़ा उसने जुड़ता है और उनका अपना वोट बैंक इंटैक्ट रहता है तो उनको फायदा हो सकता है।
राकेश शुक्ल: समाजवादी पार्टी की पूरी इमारत जातिवाद और धर्मवाद का मिश्रण है। उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का आप विश्लेषण करेंगे तो पाएंगे कि ब्राह्मण वोटर एकमुश्त कहीं नहीं जाता है। ब्रह्मण वोटर धीरे-धीरे भाजपा के साथ जुड़ा है। आज एक ब्रेक आया है यूजीसी और आरक्षण का। ब्राह्मण मतदाताओं के मन में इसे लेकर नाराजगी है। इसी नाराजगी को भुनाने की कोशिश अखिलेश यादव कर रहे हैं।
विनोद अग्निहोत्री: मंडल के बाद मुलायम सिंह यादव की पोजिशनिंग यादव नेता के तौर पर हुई। 1996 में मुलायम सिंह के मन में था कि ब्राह्मण उनके साथ जुड़े। ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के बाद मुलायम सिंह उसे भुनाना चाहते थे। उस वक्त बुद्धजीवी सम्मेलन हुआ था। अखिलेश अब उसी को फॉलो कर रहे हैं। सपा की सरकार जब बनती है तो एक नैरेटिव बना हुआ है कि एक जाति विशेष प्रभावी रहती है। वैसा ही नैरेटिव इस वक्त चल रहा है कि एक जाति विशेष प्रभावी है। अखिलेश यादव के सामने चुनौती है कि उन्हें कुछ और वर्गों को अपने साथ जोड़ना है।
विनोद अग्निहोत्री: मंडल के बाद मुलायम सिंह यादव की पोजिशनिंग यादव नेता के तौर पर हुई। 1996 में मुलायम सिंह के मन में था कि ब्राह्मण उनके साथ जुड़े। ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के बाद मुलायम सिंह उसे भुनाना चाहते थे। उस वक्त बुद्धजीवी सम्मेलन हुआ था। अखिलेश अब उसी को फॉलो कर रहे हैं। सपा की सरकार जब बनती है तो एक नैरेटिव बना हुआ है कि एक जाति विशेष प्रभावी रहती है। वैसा ही नैरेटिव इस वक्त चल रहा है कि एक जाति विशेष प्रभावी है। अखिलेश यादव के सामने चुनौती है कि उन्हें कुछ और वर्गों को अपने साथ जोड़ना है।