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Khabaron Ke Khiladi: क्यों मनाया जा रहा है सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, विश्लेषकों ने समझाई इसके पीछे की सियासत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: संध्या Updated Sat, 10 Jan 2026 09:02 PM IST
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सार

सोमनाथ में  सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह पर्व उन असंख्य नागरिकों और वीरों की याद में मनाया जा रहा है, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। 

Khabaron Ke Khiladi Why is the Somnath Swabhiman Parv being celebrated
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के पीछे कई सियासी पहलू - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सोमनाथ, संभल और कोलकाता इस हफ्ते चर्चा में रहे। एक ओर जहां चुनावी साल में बंगाल की राजधानी में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। वहीं, सोमनाथ में विंध्वंस के हजार साल पूरे होने पर मनाए जा रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर भी सियासत हो रही है। वहीं, संभल में बुलडोजर एक्शन भी इस हफ्ते सुर्खियों में रहा। इस हफ्त खबरों के खिलाड़ी में इन सभी सुर्खियों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, राकेश शुक्ल, अजय सेतिया, अनुराग वर्मा और हर्षवर्धन त्रिपाठी मौजूद रहे।

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हर्षवर्धन त्रिपाठी: नेहरू जी को कोई ला नहीं रहा है, नेहरू जी आ जा रहे हैं। जब कोई यह कहता है कि भाजपा सोमनाथ में स्वाभिमान पर्व क्यों मना रही है। इसे समझना होगा, भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। इस वैभवशाली इतिहास में मंदिरों की बड़ी भूमिका थी। जो लोग सरदार पटेल और नेहरू को भिन्न करने की कोशिश करते हैं, ये सही नहीं है। नरेंद्र मोदी प्रचार से प्रधानमंत्री के तौर पर सोमनाथ के द्वार पर नजर आए हैं। उनकी कंसिस्टेंसी में कोई फर्क नहीं आया है।

अजय सेतिया: लालकृष्ण आडवाणी ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की एक यात्रा निकाली। आज हम इस सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के उदय को देख रहे हैं। 1990 के बाद देश पूरी तरह बदल चुका है। भारतवर्ष की अवधारणा हमेशा से रही है। इसी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के उदय की वजह से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हमें दिखाई दे रहा है। ये कहना कि हम केवल अंग्रेजों के गुलाम रहे, मुगलों के गुलाम नहीं रहे, इसे बदला जा रहा है। 

अनुराग वर्मा: जो समाजवाद की अवधारणा इस देश में बनाई गई उसे मुस्लिम तुष्टिकरण से जोड़कर देखा गया। हमारे इतिहास को विदेश में बैठे विदेशियों के हिसाब से बताया गया। आज की सरकार अगर सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास को बताना चाहती है तो इसमें समस्या क्यों हैं। हिंदुस्तान में हमेशा कहीं न कहीं चुनाव हो रहा होता है। किसी भी लोकतंत्र में सरकार जो कर रही होती है, वो चुनाव को देखकर कर रही होती है। बंगाल में चुनाव होने हैं। वहां बदली हुई डेमोग्राफी बड़ा मुद्दा है। 

राकेश शुक्ल: योगी आदित्यानाथ ने संभल को अपने लिए प्रतीक बना लिया है। 2027 के चुनाव में वो इससे लाभ की उम्मीद कर रहे हैं। अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है इसमें गलत क्या है। संभल में भी वही हो रहा है। ऐसी स्थिति में कहीं न कहीं योगी आदित्यनाथ की पहल कानूनी रूप से मान्य है। 

विनोद अग्निहोत्री: भाजपा की मूल विचारधारा में हिंदुत्व का नरेटिव बनाए रखना है। राम मंदिर का नरेटिव अब पूरा हो गया है। काशी, मथुरा का मामला अदालतों में है। अब बचता है सोमनाथ, ये ऐसा मुद्दा है जिसकी राष्ट्रीय पहचान है। मनरेगा को लेकर कांग्रेस आंदोलन कर रही है। ट्रंप अपने बयानों से हर रोज भारत को असहज कर रहे हैं। अर्थव्यवस्था के बहुत से सवाल है। इन सवालों को देखते हुए इस पार्टी को हिंदुत्व नरेटिव बनना है। सोमनाथ का नरेटिव बनाकर हिंदुत्व का नरेटिव को नए सिरे से बनाया जा रहा है।

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