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'चीन को कितनी बार क्लीन चिट देंगे?': खरगे ने मोदी सरकार से पूछे तीन सवाल, कहा- देश को सच बताएं प्रधानमंत्री

Fri, 23 Oct 2026 03:07 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Fri, 23 Oct 2026 03:07 PM IST
सार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चीन नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना से टकराव, चीन से बढ़ते आयात और व्यापार घाटे पर सवाल उठाए। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीमा पर गश्त के अधिकारों और कूटनीतिक वार्ताओं के ठोस परिणामों पर जवाब मांगा।

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Kharge asks the Modi government three questions, the Prime Minister to tell the truth to the nation
मल्लिकार्जुन खरगे, अध्यक्ष, कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की सीमा और विदेश नीति पर तीखा हमला करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजिंग को पहले ही काफी क्लीन चिट दी जा चुकी हैं और अब प्रधानमंत्री को भारत के सामने सच साफ-साफ रखना चाहिए।
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एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट में, कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक निर्भरता और राजनयिक जवाबदेही से जुड़े तीन अहम सवाल पूछे हैं। सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए, खरगे ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक की उन टिप्पणियों का जिक्र किया, जो अरुणाचल प्रदेश में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ हुई झड़पों से जुड़ी थीं।
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खरगे ने क्या सवाल पूछा? 
खरगे ने केंद्र सरकार से सवाल किया, 'अरुणाचल प्रदेश में पीएलए के साथ लगातार हो रहे टकराव की आईटीबीपी डीजी की ओर से पुष्टि बेहद चिंताजनक है। डोकलाम और गलवान के बाद, क्या कोई और गंभीर टकराव शुरू हो रहा है? अगस्त में तक्सिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं। फिर भी, वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी - जो कि कथित तौर पर यहां से सिर्फ 180 किमी दूर है - टकराव जारी है। क्या भारत की पेट्रोलिंग (गश्त) करने की पहुंच प्रभावित हुई है?' उन्होंने जोर देकर कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और पूछा कि देश को इस बारे में 'अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है।'
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चीन के साथ आर्थिक संबंध पर क्या बोले? 
कांग्रेस अध्यक्ष ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर भी गहरी चिंता जताई और 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद सरकार के आर्थिक रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'गलवान में भारतीय सेना के 20 बहादुर जवानों की शहादत  के बाद से, चीन से आयात में 102% की भारी वृद्धि हुई है, जबकि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 155% बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया है। यहां तक कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मानती हैं कि चीन भारतीय निर्यात में बाधा डालता है। इसके बावजूद, सरकार चीनी निवेश पर लगी पाबंदियों में ढील दे रही है और चीन से जुड़ी पात्र कंपनियों को पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) का लाभ देने पर विचार कर रही है। क्या 'मेक इन इंडिया' अब 'इंपोर्ट फ्रॉम चाइना' (चीन से आयात) बन गया है?

राजनयिक मुलाकातों पर क्या सवाल किया?
राजनयिक मुलाकातों पर सवाल उठाते हुए, खरगे ने पूछा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच हुई कई द्विपक्षीय वार्ताओं का ज़मीनी स्तर पर क्या नतीजा निकला है। खरगे ने पूछा, 'मोदी और शी के बीच कम से कम 23 मुलाकातें और बातचीत हुईं, एनएसए अजीत डोभाल के साथ विशेष प्रतिनिधियों के 25 दौर की वार्ताएं हुईं, डब्लूएमसीसी की 36 बैठकें हुईं, और लगातार एससीओ और ब्रिक्स  शिखर सम्मेलन हुए। इन मुलाकातों से क्या ठोस परिणाम निकले? क्या मई 2020 से पहले भारत को हासिल गश्त (पेट्रोलिंग) करने के अधिकार पूरी तरह बहाल हो गए हैं?'

सशस्त्र बलों पर अपनी पार्टी का भरोसा जताते हुए, खरगे ने सरकार की राजनयिक कोशिशों पर तंज कसा और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल दिखावे के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

खरगे ने आगे कहा, 'हमें अपने सशस्त्र बलों पर पूरा भरोसा है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जवाबदेही जरूरी है, न कि राजनयिक फोटो-ऑप्स (दिखावे की तस्वीरें) या 'हगप्लोमेसी' (गले मिलने वाली कूटनीति)! विपक्ष पर हमला करने के बजाय, प्रधानमंत्री मोदी को संसद और देश को विश्वास में लेना चाहिए।'

 
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