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'अब जीवन में दुर्गा पूजा कभी नहीं आएगी': मृतक के परिजनों का छलका दर्द; कोलकाता भगदड़ में उजड़े कई परिवार
Sun, 18 Oct 2026 07:21 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 18 Oct 2026 07:21 PM IST
सार
उत्तरी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार रात बारिश और भारी भीड़ के बीच मची भगदड़ में 19 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे ने त्यौहार की खुशियों को मातम में बदल दिया है और अस्पताल के बाहर अपनों का इंतजार कर रहे परिजनों में भारी आक्रोश है। पीड़ितों ने पुलिस और प्रशासन पर भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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कोलकाता भगदड़
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
एक तरफ पूरा कोलकाता शहर दुर्गा पूजा के भव्य पंडालों और रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रहा है, तो दूसरी तरफ कुछ परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए अंधेरे में डूब गई है। उत्तरी कोलकाता के मशहूर चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार रात जो हुआ, उसने सबको झकझोर कर रख दिया। पंडाल में अचानक मची भगदड़ में 19 लोगों की जान चली गई, जिसके बाद कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज के बाहर अपने प्रियजनों के शवों का इंतजार कर रहे परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
17 साल की बेटी को खोने वाले पिता का दर्द
इस दर्दनाक हादसे में कई मासूम बच्चों और युवाओं की भी जान चली गई। न्यू टाउन के रहने वाले रिक्शा चालक विनोद हलदर अपनी 17 साल की बेटी बर्नाली को खो चुके हैं। बर्नाली अपनी सहेली तानिया बिस्वास के साथ पंडाल घूमने गई थी, लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह उनकी आखिरी रात होगी। विनोद सुध-बुध खोए हुए अस्पताल के बाहर बैठे हैं और फफकते हुए कहते हैं, 'मेरे पास अब कुछ नहीं बचा, हमारी जिंदगी में अब कभी दुर्गा पूजा नहीं आएगी।' तानिया की मां भी उसे कभी अकेले नहीं भेजती थीं, लेकिन उस रात की एक भूल ने सब कुछ छीन लिया।
'मैं अपनी मां को बचा नहीं पाया'
कुमरटुली के रहने वाले सौरव मोंडल सप्तमी की रात अपनी मां के साथ पंडाल घूमने और अच्छा वक्त बिताने के सपने देख रहे थे। लेकिन अब वे मोर्चरी के बाहर अपनी मां के शव का इंतजार कर रहे हैं। हादसे की खौफनाक दास्तान सुनाते हुए सौरव ने बताया कि अचानक बारिश शुरू होने के बाद लोग बाहर निकलने लगे और भीड़ का दबाव बढ़ गया। कई लोग फिसलकर गिर पड़े और उनके ऊपर दूसरे लोग आ गए। उन्होंने बेबस होकर कहा, 'जब तक बचाव दल ने मेरी मां को बाहर निकाला, तब तक सब खत्म हो चुका था, मैं उन्हें बचा नहीं पाया।'
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अव्यवस्था और लापरवाही के लगे आरोप
हादसे के बाद से पीड़ित परिवारों और प्रत्यक्षदर्शियों का गुस्सा पुलिस प्रशासन और पूजा समितियों पर फूट पड़ा है। लोगों का आरोप है कि जब बारिश के दौरान भीड़ बेकाबू हो रही थी, तब निकास द्वार पर न तो कोई पुलिसकर्मी मौजूद था और न ही कोई वालंटियर। अधिकांश पुलिस बल सिर्फ वीआईपी गेट पर तैनात था। इसके अलावा, पंडाल में लाउडस्पीकर से होने वाली घोषणाएं भी इतनी स्पष्ट नहीं थीं कि लोग समझ पाते कि कहां जाना है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई और भगदड़ मच गई।
यह भी पढ़ें: कोलकाता भगदड़ के बाद ओडिशा पुलिस सतर्क: दुर्गा पंडालों के लिए जारी किए नए नियम, आम लोगों पर क्या पड़ेगा फर्क?
एक झटके में उजड़ गए कई हंसते-खेलते परिवार
यह हादसा सिर्फ कुछ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं। बिहार के रहने वाले सुदामा राउत, जो पिछले 20 वर्षों से कोलकाता में रह रहे हैं, उनकी 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी आकृति कुमारी भी इस भगदड़ का शिकार हो गई। वहीं, नादिया जिले के राम बिस्वास अपनी पत्नी आरती के साथ पूजा घूमने आए थे। राम ने बताया कि बारिश के समय भीड़ को रोकने वाले रस्से हटा दिए गए थे, और उनकी पत्नी उनकी आंखों के सामने ही भीड़ के पैरों तले कुचली गईं, वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए।
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17 साल की बेटी को खोने वाले पिता का दर्द
इस दर्दनाक हादसे में कई मासूम बच्चों और युवाओं की भी जान चली गई। न्यू टाउन के रहने वाले रिक्शा चालक विनोद हलदर अपनी 17 साल की बेटी बर्नाली को खो चुके हैं। बर्नाली अपनी सहेली तानिया बिस्वास के साथ पंडाल घूमने गई थी, लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह उनकी आखिरी रात होगी। विनोद सुध-बुध खोए हुए अस्पताल के बाहर बैठे हैं और फफकते हुए कहते हैं, 'मेरे पास अब कुछ नहीं बचा, हमारी जिंदगी में अब कभी दुर्गा पूजा नहीं आएगी।' तानिया की मां भी उसे कभी अकेले नहीं भेजती थीं, लेकिन उस रात की एक भूल ने सब कुछ छीन लिया।
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'मैं अपनी मां को बचा नहीं पाया'
कुमरटुली के रहने वाले सौरव मोंडल सप्तमी की रात अपनी मां के साथ पंडाल घूमने और अच्छा वक्त बिताने के सपने देख रहे थे। लेकिन अब वे मोर्चरी के बाहर अपनी मां के शव का इंतजार कर रहे हैं। हादसे की खौफनाक दास्तान सुनाते हुए सौरव ने बताया कि अचानक बारिश शुरू होने के बाद लोग बाहर निकलने लगे और भीड़ का दबाव बढ़ गया। कई लोग फिसलकर गिर पड़े और उनके ऊपर दूसरे लोग आ गए। उन्होंने बेबस होकर कहा, 'जब तक बचाव दल ने मेरी मां को बाहर निकाला, तब तक सब खत्म हो चुका था, मैं उन्हें बचा नहीं पाया।'
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अव्यवस्था और लापरवाही के लगे आरोप
हादसे के बाद से पीड़ित परिवारों और प्रत्यक्षदर्शियों का गुस्सा पुलिस प्रशासन और पूजा समितियों पर फूट पड़ा है। लोगों का आरोप है कि जब बारिश के दौरान भीड़ बेकाबू हो रही थी, तब निकास द्वार पर न तो कोई पुलिसकर्मी मौजूद था और न ही कोई वालंटियर। अधिकांश पुलिस बल सिर्फ वीआईपी गेट पर तैनात था। इसके अलावा, पंडाल में लाउडस्पीकर से होने वाली घोषणाएं भी इतनी स्पष्ट नहीं थीं कि लोग समझ पाते कि कहां जाना है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई और भगदड़ मच गई।
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एक झटके में उजड़ गए कई हंसते-खेलते परिवार
यह हादसा सिर्फ कुछ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं। बिहार के रहने वाले सुदामा राउत, जो पिछले 20 वर्षों से कोलकाता में रह रहे हैं, उनकी 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी आकृति कुमारी भी इस भगदड़ का शिकार हो गई। वहीं, नादिया जिले के राम बिस्वास अपनी पत्नी आरती के साथ पूजा घूमने आए थे। राम ने बताया कि बारिश के समय भीड़ को रोकने वाले रस्से हटा दिए गए थे, और उनकी पत्नी उनकी आंखों के सामने ही भीड़ के पैरों तले कुचली गईं, वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए।