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19 राज्यों के 181 जिलों में खिसक रही जमीन: 7500 जगह भूस्खलन का खतरा; क्या विकास की कीमत चुका रहे पहाड़ी इलाके?
सार
Landslide Risk in India: देश के 19 राज्यों के 181 जिलों में करीब 7,500 जगहें भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। हिमालय, पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट में खतरा सबसे ज्यादा है। अंधाधुंध निर्माण और पेड़ों की कटाई से समस्या बढ़ रही है। इसका असर आबादी के साथ सड़कों और सामरिक ढांचे पर भी पड़ सकता है। सवाल है कि क्या पहाड़ों पर विकास की रफ्तार और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जा सकेगा? आइए, विस्तार से इस पूरे मामले को समझते हैं...
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अंधाधुंध निर्माण की मार झेल रहे पहाड़
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश के पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन का खतरा लगातार गंभीर बना हुआ है। देश के 19 राज्यों के 181 जिलों में करीब 7,500 ऐसी जगहें चिन्हित हैं, जहां जमीन खिसकने का खतरा बेहद ज्यादा है। हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र हैं। खतरा सिर्फ आम आबादी तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों, परिवहन गलियारों, सामरिक अवसंरचना और रक्षा प्रतिष्ठानों पर भी इसका असर पड़ सकता है। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण ने 4.3 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को भूस्खलन संभावित क्षेत्र में शामिल किया है।
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किन इलाकों में सबसे ज्यादा भूस्खलन का खतरा?
हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर के राज्य और पश्चिमी घाट भूस्खलन के लिहाज से सबसे संवेदनशील माने जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित कई राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में लगातार जमीन खिसकने की घटनाओं का खतरा बना रहता है। इसका असर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ वहां मौजूद सड़कों और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर भी पड़ सकता है। रक्षा भू-सूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान इन क्षेत्रों में जोखिम का आकलन कर रहा है और समय रहते चेतावनी देने के लिए तंत्र विकसित किया गया है।
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भूस्खलन और जमीन खिसकने की बड़ी वजह क्या?
- संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में अंधाधुंध निर्माण को जमीन खिसकने की बड़ी वजह माना गया है।
- पहाड़ों पर सड़कों, इमारतों और दूसरी परियोजनाओं के लिए प्राकृतिक ढलानों से छेड़छाड़ होती है।
- पेड़ों की कटाई भी मिट्टी को कमजोर करती है।
- बारिश के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है।
- कई बार पहाड़ का हिस्सा खिसककर सीधे सड़क पर आ जाता है।
- जबकि कुछ जगहों पर सड़क का हिस्सा ही जमीन के साथ नीचे खिसक जाता है।
- इससे यातायात बाधित होने के साथ लोगों की जान और जरूरी ढांचे को नुकसान का खतरा बढ़ता है।