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CJP: कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े फर्जी वकीलों की जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस
Wed, 12 Aug 2026 07:59 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 12 Aug 2026 07:59 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें सीजेपी आंदोलन से जुड़े फर्जी वकीलों की जांच की मांग की गई है। आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े फर्जी कानून डिग्री धारकों की जांच की मांग की गई है। याचिका एक वकील राजा चौधरी ने दायर की है, जिस पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने सुनवाई की और केंद्र को नोटिस जारी किया।
याचिका में क्या मांग की गई?
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियों के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल और उनके प्रसार के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। यह याचिका 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद दायर की गई, जिसमें अदालतों की प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग, वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिए जाने और कानूनी पेशे में पेशेवर मानकों में गिरावट को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई थीं।
याचिका के अनुसार, सीजेआई सूर्यकांत द्वारा अदालत में बातचीत के दौरान रूपक के तौर पर किए गए कुछ कॉकरोच संबंधी संदर्भों को बाद में चुनिंदा तरीके से काट-छांटकर मीम में बदला गया, उनकी नकल की गई और उन्हें व्यावसायिक रूप से प्रसारित किया गया। याचिका में आरोप है कि इन टिप्पणियों को उनके संवैधानिक और प्रक्रियात्मक संदर्भ से अलग कर वायरल डिजिटल कंटेंट में बदल दिया गया।
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'याचिका का उद्देश्य न्यायपालिका की आलोचना नहीं'
याचिका में साफ किया गया है कि इसका उद्देश्य न्यायपालिका की आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य या संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत संरक्षित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विरोध करना नहीं है। इसके बजाय, याचिका में संगठित व्यावसायिक शोषण, ट्रेडमार्क के व्यावसायिक इस्तेमाल, वायरल प्रसार, मीम के जरिए और एल्गोरिदम की मदद से अदालत की मौखिक कार्यवाही को डिजिटल कमोडिटी में बदलने का आरोप लगाया गया है।
सीजेआई की टिप्पणी से शुरू हुआ था आंदोलन
'कॉकरोच जनता पार्टी' इस साल मई में एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में सामने आई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों, खासकर युवा यूजर्स के बीच, इसे काफी लोकप्रियता मिली। इस ऑनलाइन आंदोलन ने बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन हासिल किया। यह आंदोलन 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्यवाही के बाद सामने आया। उस दौरान सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बेरोजगार युवा वकीलों के वकालत के पेशे से दूर होकर सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज्म की ओर जाने को लेकर चिंता जताई थी। सीजेआई ने कहा था कि ऐसे युवा कॉकरोच की तरह समाज में परजीवी बन रहे हैं।
सीजेआई ने कहा था, 'कुछ युवा कॉकरोच की तरह हैं, जिन्हें पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। कुछ सोशल मीडिया पर हैं, कुछ RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं।' बाद में सीजेआई ने साफ किया था कि उनकी टिप्पणी फर्जी योग्यता और फर्जी डिग्रियों के जरिए पेशे में प्रवेश करने वाले लोगों को लेकर थी, न कि आम तौर पर बेरोजगार युवा भारतीयों के लिए।
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याचिका में क्या मांग की गई?
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियों के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल और उनके प्रसार के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। यह याचिका 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद दायर की गई, जिसमें अदालतों की प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग, वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिए जाने और कानूनी पेशे में पेशेवर मानकों में गिरावट को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई थीं।
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याचिका के अनुसार, सीजेआई सूर्यकांत द्वारा अदालत में बातचीत के दौरान रूपक के तौर पर किए गए कुछ कॉकरोच संबंधी संदर्भों को बाद में चुनिंदा तरीके से काट-छांटकर मीम में बदला गया, उनकी नकल की गई और उन्हें व्यावसायिक रूप से प्रसारित किया गया। याचिका में आरोप है कि इन टिप्पणियों को उनके संवैधानिक और प्रक्रियात्मक संदर्भ से अलग कर वायरल डिजिटल कंटेंट में बदल दिया गया।
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'याचिका का उद्देश्य न्यायपालिका की आलोचना नहीं'
याचिका में साफ किया गया है कि इसका उद्देश्य न्यायपालिका की आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य या संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत संरक्षित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विरोध करना नहीं है। इसके बजाय, याचिका में संगठित व्यावसायिक शोषण, ट्रेडमार्क के व्यावसायिक इस्तेमाल, वायरल प्रसार, मीम के जरिए और एल्गोरिदम की मदद से अदालत की मौखिक कार्यवाही को डिजिटल कमोडिटी में बदलने का आरोप लगाया गया है।
सीजेआई की टिप्पणी से शुरू हुआ था आंदोलन
'कॉकरोच जनता पार्टी' इस साल मई में एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में सामने आई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों, खासकर युवा यूजर्स के बीच, इसे काफी लोकप्रियता मिली। इस ऑनलाइन आंदोलन ने बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन हासिल किया। यह आंदोलन 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्यवाही के बाद सामने आया। उस दौरान सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बेरोजगार युवा वकीलों के वकालत के पेशे से दूर होकर सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज्म की ओर जाने को लेकर चिंता जताई थी। सीजेआई ने कहा था कि ऐसे युवा कॉकरोच की तरह समाज में परजीवी बन रहे हैं।
सीजेआई ने कहा था, 'कुछ युवा कॉकरोच की तरह हैं, जिन्हें पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। कुछ सोशल मीडिया पर हैं, कुछ RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं।' बाद में सीजेआई ने साफ किया था कि उनकी टिप्पणी फर्जी योग्यता और फर्जी डिग्रियों के जरिए पेशे में प्रवेश करने वाले लोगों को लेकर थी, न कि आम तौर पर बेरोजगार युवा भारतीयों के लिए।