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BBC Documentary: महुआ समेत विपक्षी नेताओं ने सोशल मीडिया पर साझा किए डॉक्यूमेंट्री के लिंक, BJP ने किया पलटवार

Sun, 22 Jan 2023 08:07 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 22 Jan 2023 08:07 PM IST
सार

भाजपा नेता अमित मालवीय ने विपक्षी नेताओं को याद दिलाया कि पीएम मोदी को पहले ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनकी बेगुनाही को जनता की अदालत में भी जबरदस्त समर्थन मिला है।

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Let them not preach us on rule of law BJP slams BBC Opp bid to politicise series on PM Modi
Amit Malviya, Mahua Moitra, Jairam Ramesh - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री सीरीज को लेकर बवाल थमा नहीं है। विपक्षी नेता सोशल मीडिया पर डॉक्यूमेंट्री सीरीज के लिंक साझा कर रहे हैं। इसको लेकर रविवार को भाजपा ने विपक्षी नेता पर पलटवार किया। भाजपा ने कहा कि यह 2002 के गुजरात दंगों का राजनीतिकरण करने का एक प्रयास है। 

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भाजपा नेता अमित मालवीय ने विपक्षी नेताओं को याद दिलाया कि पीएम मोदी को पहले ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनकी बेगुनाही को जनता की अदालत में भी जबरदस्त समर्थन मिला है। उन्होंने कहा, "पिछले कई वर्षों में विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस, ने दुर्भाग्यपूर्ण गुजरात दंगों का राजनीतिकरण करने की कोशिश की है। हालांकि, सड़ांध से राजनीतिक लाभ लेने के उनके सभी प्रयासों के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी सुप्रीम कोर्ट और जनता की अदालत में सही साबित हुए हैं।  

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खुद का इतिहास भूल गया ब्रिटेन, मानवाधिकारों का न दे उपदेश : भाजपा
उन्होंने कहा, 'इससे कोई फर्क क्यों पड़ता है कि एक बाहरी एजेंसी (बीबीसी) का उस मुद्दे के बारे में क्या कहना है जिसे हमारी जमीन पर सुप्रीम कोर्ट में सुलझाया गया है? यह (डॉक्यूमेंट्री सीरीज) एक पूर्व उपनिवेशवादी द्वारा त्रुटिपूर्ण और पक्षपातपूर्ण टिप्पणी है, जो अपने स्वयं के उतार-चढ़ाव वाले इतिहास को भूल गया है। उन्हें हमें कानून के शासन और मानवाधिकारों के बारे में उपदेश नहीं देना चाहिए।  

लिंक साझा करने वाले वीडियो यूट्यूब पर ब्लॉक
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन ने दो भागों वाली डॉक्यूमेंट्री सीरीज प्रसारित की, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पीएम मोदी के कार्यकाल की आलोचना की गई थी, विशेष रूप से 2002 के गोधरा दंगों के संदर्भ में। डॉक्यूमेंट्री सीरीज को लेकर देश में काफी आक्रोश देखने को मिला और ब्रिटेन के भीतर भी इसकी निंदा की गई। इसे भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से भी हटा दिया गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) के निर्देश पर बीबीसी डॉक्यूमेंट्री 'इंडिया: द मोदी क्वेशन' के पहले एपिसोड को साझा करने वाले कई यूट्यूब वीडियो को ब्लॉक कर दिया गया है।
 

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महुआ मोइत्रा ने साझा किया डॉक्यूमेंट्री सीरीज का लिंक
विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री सीरीज के लिंक साझा करने वाले यूट्यूब वीडियो और ट्विटर पोस्ट को ब्लॉक करने पर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा डॉक्यूमेंट्री का एक अर्काइव लिंक साझा किया। मोइत्रा ने कहा, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के दरबारी असुरक्षित हैं। मोइत्रा ने ट्वीट किया, सरकार युद्ध स्तर पर यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि भारत में कोई भी केवल बीबीसी शो न देख सके। शर्म की बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सम्राट और दरबारी इतने असुरक्षित हैं। माफ करें, सेंसरशिफ स्वीकार करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए नहीं चुना गया है। लिंक यहां है। इसे आप यहां देख सकते हैं। 
 

कांग्रेस ने पोस्ट किया वाजपेयी-मोदी की बातचीत का वीडियो
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 2002 के दंगों के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को राजधर्म (प्रशासनिक जिम्मेदारी) निभाने की बात कहते हुए नजर आ रहे हैं। इस बीच, बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री सीरीज पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए तीन सौ से ज्यादा पूर्व न्यायाधीशों, नौकरशाहों और सशस्त्र बलों ने बयान जारी किया।  
 

विदेश मंत्रालय ने बताया 'प्रोपेगैंडा पीस'
इससे पहले गुरुवार को भारत ने बीबीसी की विवादास्पद सीरीज की निंदा करते हुए इसे एक 'प्रोपेगैंडा पीस' बताया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि इसे एक बदनाम कहानी को आगे बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था, हमें लगता है कि यह एक विशेष बदनाम कथा को आगे बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया एक प्रोपेगैंडा पीस (दुष्प्रचार का हिस्सा) है। बागची ने वीकली मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि इसमें पूर्वाग्रह और निष्पक्षता की कमी है। इसमें स्पष्ट रूप से औपनिवेशिक मानसिकता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री उन लोगों का प्रतिबिंब है जो इस कहानी को फिर से पेश कर रहे हैं।

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