सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Living root bridges of Meghalaya nominated for UNESCO World Heritage India submitted dossier

Meghalaya: मेघालय के जीवित जड़ पुल यूनेस्को विश्व धरोहर के लिए नामांकित, भारत ने सौंपा डोजियर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 29 Jan 2026 11:45 AM IST
विज्ञापन
सार

Meghalaya: मेघालय के प्रसिद्ध जीवित जड़ पुलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए भारत ने पेरिस स्थित यूनेस्को को आधिकारिक नामांकन डोजियर सौंपा। यह डोजियर यूनेस्को में भारत के राजदूत विशाल वी. शर्मा ने वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर के निदेशक को सौंपा।
 

Living root bridges of Meghalaya nominated for UNESCO World Heritage India submitted dossier
जीवित जड़ पुल - फोटो : सीएम संगमा एक्स पोस्ट
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

भारत ने मेघालय के प्रसिद्ध जीवित जड़ पुलों को 2026–27 की यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए पेरिस स्थित यूनेस्को को आधिकारिक नामांकन डोजियर सौंप दिया है। यह जानकारी गुरुवार को मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने दी। 
Trending Videos

 


'आदिवासी समुदायों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी'
मुख्यमंत्री संगमा ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि यूनेस्को में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा ने यह डोजियर यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर के निदेशक लाजारे असोमो एलौंदू को सौंपा है। मुझे उम्मीद है कि इस वर्ष जीवित जड़ पुलों को विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे इस अनूठी जीवित विरासत के सच्चे संरक्षक स्थानीय आदिवासी समुदायों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी।

राजदूत शर्मा ने पीएम मोदी को दिया धन्यावद
वहीं, डोजियर सौंपते समय राजदूत शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मेघालय सरकार को इस नामांकन के लिए समर्थन देने पर धन्यवाद दिया। यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, उन्होंने मेघालय के प्रधान सचिव फ्रेडरिक खारकोंगोर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, विदेश मंत्रालय के अधिकारियों, विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों की भूमिका की भी सराहना की।

ये भी पढ़ें: अजित पवार का अंतिम संस्कार शुरू, बेटे पार्थ देंगे मुखाग्नि; शाह समेत ये नेता मौजूद

खासी और जैंतिया पहाड़ियों की दक्षिणी ढलानों में हैं ये पुल
मेघालय के खासी और जैंतिया पहाड़ियों की दक्षिणी ढलानों में स्थित ये जीवित जड़ पुल सदियों से खासी और जैंतिया जनजातियों द्वारा विकसित एक जीवित सांस्कृतिक परिदृश्य का उदाहरण हैं। बयान में कहा गया है कि यह परिदृश्य लोगों, प्रकृति और आध्यात्मिकता के बीच गहरे और सामंजस्यपूर्ण संबंध को दर्शाता है, जो पारंपरिक भूमि उपयोग, शासन और पर्यावरण संरक्षण प्रणालियों में परिलक्षित होता है।

ये भी पढ़ें: 'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म बनी सरकार की पहचान', आर्थिक सर्वे से पहले बोले PM मोदी

इस सांस्कृतिक परिदृश्य की आधारशिला ‘मेई रामेव’ (मदर अर्थ) के प्रति सम्मान, पारस्परिकता और जिम्मेदारी की स्वदेशी अवधारणा पर टिकी है। बयान में यह भी कहा गया कि यह नामांकन जीवित सांस्कृतिक परंपराओं और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

(अन्य वीडियो)

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed