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Maharashtra: ढोंगी बाबा अशोक खरात केस में बड़ा खुलासा, पत्नी पर 42.88 करोड़ की काली कमाई छिपाने का आरोप
Sun, 19 Jul 2026 01:03 PM IST
नितिन गौतम
सुनील मेहरोत्रा, अमर उजाला, मुंबई
सुनील मेहरोत्रा, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 19 Jul 2026 01:03 PM IST
सार
महाराष्ट्र के ढोंगी बाबा अशोक खरात की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। दरअसल ईडी ने अपने चार्जशीट में खरात की पत्नी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं और उन पर अवैध कमाई छिपाने का आरोप है।
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ढोंगी अशोक खरात
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महाराष्ट्र के ढोंगी बाबा अशोक खरात के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। एजेंसी ने अब खरात की पत्नी कल्पना खरात को भी आरोपी बनाया है। ईडी का आरोप है कि कल्पना खरात ने अपने पति की 42.88 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित कमाई को छिपाने और उसे वैध संपत्ति का रूप देने में सक्रिय भूमिका निभाई। एजेंसी ने मुंबई की कोर्ट में अशोक खरात, कल्पना खरात और उनके चार करीबी सहयोगियों के खिलाफ 3,000 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जो 30 गवाहों के बयानों और वित्तीय दस्तावेजों पर आधारित है।
चार्जशीट में लगाए गए ये आरोप
ईडी के अनुसार, अशोक खरात ने फर्जी बैंक खातों, सहकारी संस्थाओं, नकदी संभालने वाले एजेंटों और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में जमीन-जायदाद में निवेश के जरिए अपराध की कमाई को खपाने का संगठित नेटवर्क तैयार किया था। जांच में सामने आया कि यह रकम नाशिक, अहमदनगर, पुणे, सोलापुर और मुंबई में जमीनों तथा अन्य संपत्तियों में लगाई गई। इसके लिए पहले रकम सहकारी संस्थाओं के खातों में जमा कराई गई और फिर नकद लेनदेन के जरिए उसे इधर-उधर घुमाया गया। कई संपत्तियां परिवार के सदस्यों और भरोसेमंद सहयोगियों के नाम पर खरीदी गईं ताकि वास्तविक मालिकाना हक छिपाया जा सके।
ईडी का कहना है कि कल्पना खरात ने जानबूझकर अपने नाम पर संपत्तियां खरीदे जाने की अनुमति दी और अपराध की कमाई को वैध दिखाने की पूरी प्रक्रिया में सहयोग किया। ईडी के अनुसार, वह केवल नाममात्र की मालिक नहीं थीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश का हिस्सा थीं। जांच में वर्ष 2003-04 के दौरान महाराष्ट्र के एक माली परिवार की जमीन हड़पने का मामला भी सामने आया है। शिकायत के मुताबिक, अशोक खरात ने अपनी पत्नी और अन्य लोगों के साथ मिलकर तांत्रिक क्रियाओं, झूठे वादों और भगवान का भय दिखाकर परिवार पर जमीन बेचने का दबाव बनाया। आरोप है कि करोड़ों की कीमत वाली जमीन महज 2.49 लाख और 1.37 लाख रुपये जैसी बेहद कम रकम पर अपने नाम करा ली गई। पीड़ितों से पहले से तैयार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जबकि तय पूरी रकम भी नहीं दी गई।
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ईडी ने अदालत को बताया है कि विवादित जमीन सौदे के दौरान जब अशोक खरात ने एक व्यक्ति को बड़ी नकद राशि सौंपी, तब कल्पना खरात भी मौके पर मौजूद थीं। गवाहों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर एजेंसी का दावा है कि पत्नी ने अपने नाम का इस्तेमाल अपराध की कमाई से खरीदी गई संपत्तियों के लिए होने दिया। महाराष्ट्र के पाथर्डी क्षेत्र में वह अशोक खरात के साथ संयुक्त रूप से एक बड़ी संपत्ति की मालिक भी हैं।
खरात के करीबी सहयोगी की अहम भूमिका
जांच के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने में अशोक खरात के करीबी सहयोगी अरविंद पांडुरंग बवाके की अहम भूमिका रही। ईडी का आरोप है कि उसने खरात के निर्देश पर एक सहकारी संस्था में करीब 60 बैंक खातों का संचालन किया और 18 से 20 करोड़ रुपये के नकद लेनदेन को अंजाम दिया। वह नियमित रूप से नकदी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाता था और जमीन के सौदों में पावर ऑफ अटॉर्नी धारक के रूप में भी काम करता था, जिसके बदले उसे मोटा कमीशन मिलता था।
कई अधिकारियों के भी चार्जशीट में नाम
मामले में जगदम्बा माता ग्रामीण सहकारी संस्था के अध्यक्ष नामकरण यशवंत अवेयर और तत्कालीन शाखा प्रबंधक अविनाश वामन कांडेकर को भी आरोपी बनाया गया है। ईडी का आरोप है कि उन्होंने केवाईसी नियमों का उल्लंघन करते हुए 34 फर्जी बैंक खाते खुलवाए और उनके जरिए करीब 3.18 करोड़ रुपये का नकद लेनदेन कराया। बाद में यह पूरी राशि नकद के रूप में अशोक खरात को लौटा दी गई।
इसी तरह समता नागरी सहकारी संस्था के तत्कालीन शाखा प्रबंधक मिलिंद दादासाहेब बनकर पर आरोप है कि उन्होंने एक ही दिन में 43 बैंक खाते खोलने की अनुमति दी, जिनका संचालन बाद में अशोक खरात और अरविंद बवाके ने किया। ईडी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों ने जानते-बूझते अपराध की कमाई को छिपाने और उसे वैध बनाने में भूमिका निभाई, इसलिए उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई की गई है।
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चार्जशीट में लगाए गए ये आरोप
ईडी के अनुसार, अशोक खरात ने फर्जी बैंक खातों, सहकारी संस्थाओं, नकदी संभालने वाले एजेंटों और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में जमीन-जायदाद में निवेश के जरिए अपराध की कमाई को खपाने का संगठित नेटवर्क तैयार किया था। जांच में सामने आया कि यह रकम नाशिक, अहमदनगर, पुणे, सोलापुर और मुंबई में जमीनों तथा अन्य संपत्तियों में लगाई गई। इसके लिए पहले रकम सहकारी संस्थाओं के खातों में जमा कराई गई और फिर नकद लेनदेन के जरिए उसे इधर-उधर घुमाया गया। कई संपत्तियां परिवार के सदस्यों और भरोसेमंद सहयोगियों के नाम पर खरीदी गईं ताकि वास्तविक मालिकाना हक छिपाया जा सके।
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ईडी का कहना है कि कल्पना खरात ने जानबूझकर अपने नाम पर संपत्तियां खरीदे जाने की अनुमति दी और अपराध की कमाई को वैध दिखाने की पूरी प्रक्रिया में सहयोग किया। ईडी के अनुसार, वह केवल नाममात्र की मालिक नहीं थीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश का हिस्सा थीं। जांच में वर्ष 2003-04 के दौरान महाराष्ट्र के एक माली परिवार की जमीन हड़पने का मामला भी सामने आया है। शिकायत के मुताबिक, अशोक खरात ने अपनी पत्नी और अन्य लोगों के साथ मिलकर तांत्रिक क्रियाओं, झूठे वादों और भगवान का भय दिखाकर परिवार पर जमीन बेचने का दबाव बनाया। आरोप है कि करोड़ों की कीमत वाली जमीन महज 2.49 लाख और 1.37 लाख रुपये जैसी बेहद कम रकम पर अपने नाम करा ली गई। पीड़ितों से पहले से तैयार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जबकि तय पूरी रकम भी नहीं दी गई।
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ईडी ने अदालत को बताया है कि विवादित जमीन सौदे के दौरान जब अशोक खरात ने एक व्यक्ति को बड़ी नकद राशि सौंपी, तब कल्पना खरात भी मौके पर मौजूद थीं। गवाहों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर एजेंसी का दावा है कि पत्नी ने अपने नाम का इस्तेमाल अपराध की कमाई से खरीदी गई संपत्तियों के लिए होने दिया। महाराष्ट्र के पाथर्डी क्षेत्र में वह अशोक खरात के साथ संयुक्त रूप से एक बड़ी संपत्ति की मालिक भी हैं।
खरात के करीबी सहयोगी की अहम भूमिका
जांच के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने में अशोक खरात के करीबी सहयोगी अरविंद पांडुरंग बवाके की अहम भूमिका रही। ईडी का आरोप है कि उसने खरात के निर्देश पर एक सहकारी संस्था में करीब 60 बैंक खातों का संचालन किया और 18 से 20 करोड़ रुपये के नकद लेनदेन को अंजाम दिया। वह नियमित रूप से नकदी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाता था और जमीन के सौदों में पावर ऑफ अटॉर्नी धारक के रूप में भी काम करता था, जिसके बदले उसे मोटा कमीशन मिलता था।
कई अधिकारियों के भी चार्जशीट में नाम
मामले में जगदम्बा माता ग्रामीण सहकारी संस्था के अध्यक्ष नामकरण यशवंत अवेयर और तत्कालीन शाखा प्रबंधक अविनाश वामन कांडेकर को भी आरोपी बनाया गया है। ईडी का आरोप है कि उन्होंने केवाईसी नियमों का उल्लंघन करते हुए 34 फर्जी बैंक खाते खुलवाए और उनके जरिए करीब 3.18 करोड़ रुपये का नकद लेनदेन कराया। बाद में यह पूरी राशि नकद के रूप में अशोक खरात को लौटा दी गई।
इसी तरह समता नागरी सहकारी संस्था के तत्कालीन शाखा प्रबंधक मिलिंद दादासाहेब बनकर पर आरोप है कि उन्होंने एक ही दिन में 43 बैंक खाते खोलने की अनुमति दी, जिनका संचालन बाद में अशोक खरात और अरविंद बवाके ने किया। ईडी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों ने जानते-बूझते अपराध की कमाई को छिपाने और उसे वैध बनाने में भूमिका निभाई, इसलिए उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई की गई है।