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Maharashtra Civic polls: भाजपा और शिवसेना के निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों की राज्य चुनाव आयोग करेगा जांच

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Fri, 02 Jan 2026 04:47 PM IST
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सार

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में निर्विरोध जीतने वालों की जांच होगी। इसके लिए राज्य चुनाव आयोग ने नगर निगमों से रिपोर्ट मांगी है। 

Maharashtra Civic polls State Election Commission investigate candidates BJP Shiv Sena who elected unopposed
चुनाव आयोग करा रहा सर्वे।
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विस्तार
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महाराष्ट्र निकाय चुनाव में विपक्ष ने सत्ताधारी पार्टी पर नामांकन को लेकर गड़बड़ी का आरोप लगाया है। राज्य चुनाव आयोग अब इन आरोपों की जांच कर रही है। चुनाव आयोग ने उन नगर निगमों की रिपोर्ट मांगी है जहां उनके उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। आयोग यहां उम्मीदवारों को निर्विरोध चुनाव जीतने की जांच करेगा। यह जानने की कोशिश करेगा कि कहीं विरोधियों पर नामांकन वापस लेने का दबाव तो नहीं बनाया गया या किसी तरह के लालच और जबरदस्ती तो नाम वापस नहीं करवाए गए। राज्य की 29 नगर निगमों में 15 जनवरी को चुनाव होने हैं। 

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सत्ताधारी पार्टी के कई उम्मीदवार निर्विरोध जीते

ठाणे जिले के कल्याण डोंबिवली नगर निगम में पांच भाजपा और चार शिवसेना उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं है। पिंपरी चिंचवड़ (पुणे जिले में), जलगांव, छत्रपति संभाजीनगर नगर निकायों में, कम से कम एक भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध चुना गया है।

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राज्या चुनाव आयोग का क्या कहना है

राज्य चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि आयोग को सत्ताधारी पार्टियों और चुनाव मशीनरी द्वारा उम्मीदवारों को नामाकम दाखिल करने से रोकने की शिकायतें मिल रही हैं। कांग्रेस, जनता दल (एस) और आप के उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि मुंबई के कोलाबा में तीन वार्डों में दबाव में उन्हें गैरकानूनी तरीके से नामांकन दाखिल करने से रोका गया। आयोग इन निकायों के नौ वार्डों से अधिकारियों से रिपोर्ट मांगेगा जहां उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं।

आयोग ने बताया हमें नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख, के बाद निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों के बारे में रिपोर्ट मिलेगी। उसके बाद, रिटर्निंग अधिकारियों, नगर आयुक्त और संबंधित नगर निगमों के पुलिस आयुक्तों से रिपोर्ट मांगी जाएगी ताकि यह जांच की जा सके कि विरोधियों पर नामांकन वापस लेने के लिए कोई दबाव या लालच दिया गया था या निर्विरोध चुनावों के लिए कोई जबरदस्ती का तरीका इस्तेमाल किया गया था।

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