घाटकोपर कांड पर बवाल: नाबालिगों से कथित दुष्कर्म के बाद पुलिस पर लापरवाही के आरोप, किरीट सोमैया का धरना तेज
मुंबई के घाटकोपर में दो नाबालिग बच्चियों से कथित यौन उत्पीड़न के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने पुलिस पर लापरवाही और पीड़ित परिवार को हिरासत में लेने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
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विस्तार
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के घाटकोपर इलाके में सामने आए नाबालिग बच्चियों से कथित यौन उत्पीड़न के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद जहां स्थानीय लोगों में आक्रोश है, वहीं भाजपा नेताओं ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मोर्चा खोल दिया है।
रविवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया और पूर्व मेयर रितु तावड़े के नेतृत्व में घाटकोपर पुलिस स्टेशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया गया। नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने मामले में लापरवाही बरती और पीड़ित परिवार के साथ संवेदनहीन व्यवहार किया।
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि 25 अप्रैल की रात करीब 8:30 बजे दो मासूम बच्चियों के साथ कथित रूप से दुष्कर्म की घटना हुई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपी को हिरासत में लिया। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के साथ-साथ POCSO Act के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस पर क्या आरोप?
भाजपा नेता किरीट सोमैया का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने में अनिच्छा दिखाई। उन्होंने दावा किया कि जब परिवार ने दबाव बनाया, तब कार्रवाई हुई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पीड़ित परिवार को भी हिरासत में ले लिया गया। सोमैया ने कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को रिहा नहीं किया जाता और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
वीडियो को लेकर विवाद
पूर्व मेयर ऋतु तावड़े ने पुलिस के उस दावे को भी चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि परिवार ने गिरफ्तारी के दौरान पुलिस पर हमला किया। तावड़े का कहना है कि उन्होंने जो वीडियो देखा है, उसमें ऐसा कोई हमला नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि इस तरह की दर्दनाक घटना के बाद परिवार की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है, लेकिन पुलिस को सहानुभूति दिखाने के बजाय उन्हें जेल भेज दिया गया।
बढ़ता जा रहा राजनीतिक दबाव
भाजपा ने साफ कर दिया है कि यह विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक:
- पीड़ित परिवार को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता।
- मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती।
- आरोपी से जुड़े किसी भी संभावित संरक्षण की जांच नहीं की जाती।
घटना के बाद घाटकोपर पश्चिम इलाके में तनाव का माहौल है। स्थानीय लोग भी न्याय की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
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