जंगल में कहां है बाघ, एआई मॉडल बताएगा: महाराष्ट्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने की नई पहल, क्या है खास?
महाराष्ट्र में एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम लॉन्च किया गया है, जो जंगल में बाघ की लोकेशन का पता लगाकर मानव-बाघ संघर्ष कम करने में मदद करेगा। सफल होने पर इसे देश के अन्य बाघ क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महाराष्ट्र में अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडल की मदद से बाघों की निगरानी की जाएगी। मानव-बाघ संघर्ष को कम करने के लिए विकसित अर्ली वार्निंग सिस्टम का शुभारंभ बुधवार को वैश्विक बाघ दिवस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में किया। नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार द्वारा तैयार यह मार्बल एआई मॉडल जंगल में चीतल और लंगूर जैसे अन्य वन्यजीवों की चेतावनी भरी आवाजों का विश्लेषण कर बाघ की सटीक लोकेशन का पता लगाएगा।
इसमें आदिवासियों के पारंपरिक अनुभव और आधुनिक तकनीक का समावेश किया गया है, जिससे वन विभाग और ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट मिल सकेगा। सफल रहने पर इस परियोजना को देश के अन्य बाघ क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।
संरक्षण प्रकृति के साथ सम्मानजनक संबंध बनाने की प्रक्रिया : भूपेंद्र
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि संरक्षण केवल वन्यजीवों की सुरक्षा नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सम्मानजनक संबंध विकसित करने की प्रक्रिया है। भूपेंद्र यादव अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 2026 पर संबोधित कर रहे थे।