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'कुर्सी छोड़ें, इन्फ्लुएंसर बनें': CJP प्रमुख दीपके ने PM मोदी पर कसा तंज; पेपर लीक विरोधी बिल पर भी उठाए सवाल

Thu, 30 Jul 2026 09:28 AM IST
राकेश कुमार पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 30 Jul 2026 09:28 AM IST
सार

CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने एंटी-पेपर लीक बिल को महज दिखावा बताया है। उनका कहना है कि नीयत के बिना कोई कानून सफल नहीं हो सकता। उन्होंने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ छात्रों को एकजुट होकर चुनावों में वोट के जरिए सरकार को करारा जवाब देने का आह्वान किया है।
 

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cjp chief abhijeet dipke targets pm modi anti paper leak bill detailed report
अभिजीत दीपके, सीजेपी संस्थापक - फोटो : @AI/अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

लोकसभा से पारित एंटी-पेपर लीक बिल और छात्र प्रदर्शनों को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। दीपके ने कहा है कि बिना सही नीयत और प्रभावी अमल के सिर्फ कानून बना देने से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या कभी खत्म नहीं होगी।
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दीपके ने क्या-क्या कहा? 
बुधवार को महाराष्ट्र स्थित अपने गृहनगर में पत्रकारों से बात करते हुए अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री के इंस्टाग्राम वीडियो पर तंज कसा। इन वीडियो में पीएम युवाओं को संबोधित करते दिखे थे।
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दीपके ने कहा, 'मुझे लगता है कि पीएम मोदी को इन्फ्लुएंसर बन जाना चाहिए। वह इस काम को बहुत अच्छी तरह कर रहे हैं। अगर वह इतने ही बेहतरीन इन्फ्लुएंसर हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। किसी और को प्रधानमंत्री का काम करने देना चाहिए।'
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प्रियंका गांधी ने भी कसा तंज
इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी संसद में पीएम के इंस्टाग्राम वीडियो पर टिप्पणी की थी। प्रियंका ने कहा था कि सिर्फ नए-नए एंगल से वीडियो बनाकर जेन-जी युवाओं का समर्थन नहीं हासिल किया जा सकता। प्रधानमंत्री को कैमरे का एंगल बदलने के बजाय अपने दिल का कोण बदलना होगा।

लागू करने वालों की नीयत में है खोट- दीपके
लोकसभा में पास हुए एंटी-पेपर लीक बिल पर समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए दीपके ने कानून की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए। दीपके ने कहा कि देश में बिल आते रहेंगे और कई अच्छे कानून पहले भी बने हैं। लेकिन जब तक इसे लागू करने वालों की नीयत साफ नहीं होगी, कुछ नहीं होने वाला। उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले पीएम मोदी ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का वादा किया था। लोग बहुत खुश हुए थे। दीपके ने खुलासा किया कि पेपर लीक मामले की पहली ही सुनवाई स्थगित हो गई। वजह यह थी कि सीबीआई के वकील कोर्ट में हाजिर ही नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जब लागू करने वाले लोग ही गंभीर नहीं हैं, तो ऐसे कानूनों का क्या मतलब रह जाता है?

यह भी पढ़ें: Bankipur Election: भाजपा ने जन सुराज पर लगाया फर्जी मतदान की कोशिश का आरोप, प्रशासन से क्या मांग कर दी?

20 जुलाई का संसद मार्च और छात्र आंदोलन की 10 बड़ी बातें
  1. 20 जुलाई का प्रदर्शन: नीट पेपर लीक और छात्र खुदकुशी के विरोध में हजारों छात्रों ने सीजेपी के नेतृत्व में संसद की ओर पैदल मार्च निकाला था।
  2. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: छात्रों के भारी दबाव के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
  3. समझौता और आश्वासन: 25 जुलाई को सरकार और सीजेपी के बीच सहमति बनी। सरकार ने एफआईआर वापस लेने, नए केस दर्ज न करने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का लिखित भरोसा दिया था।
  4. पुलिस की कार्रवाई और एफआईआर: आंदोलन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लठीचार्ज किया, पेलेट गन चलाए और कई छात्रों को हिरासत में लेकर एफआईआर दर्ज की।
  5. वादाखिलाफी का गंभीर आरोप: सीजेपी नेता सौरव दास का कहना है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाया, लेकिन एफआईआर रद्द करने का कोई लिखित आश्वासन अभी तक नहीं दिया है।
  6. छात्रों की धरपकड़ जारी: सीजेपी का आरोप है कि समझौते के बाद भी पुलिस छात्रों को चिन्हित करके परेशान और प्रताड़ित कर रही है।
  7. सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा एफआईआर पर जांच जारी रखने की अनुमति दी है। सीजेपी का कहना है कि यह आदेश सरकार के वादों के बिल्कुल खिलाफ है।
  8. किसान आंदोलन से मिला समर्थन: सीजेपी नेता रांका ने राकेश टिकैत की मौजूदगी में किसान मोर्चा के कार्यक्रम में कहा कि किसानों, छात्रों और युवाओं को एक साथ मिलकर मोदी सरकार को घेरना होगा।
  9. जेपी नड्डा का बचाव: बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए आपातकाल दौर का हवाला दिया। इस पर सीजेपी ने पूछा कि क्या 50 वर्षों में कुछ भी नहीं बदला?
  10. फिर से बड़े आंदोलन की चेतावनी: दीपके ने साफ कहा कि अगर प्रताड़ना बंद नहीं हुई, तो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से गुस्सा शांत नहीं होगा। अगला आंदोलन पहले से भी ज्यादा बड़ा होगा।

क्या लाठी और पेलेट गन का जवाब छात्र चुनाव में अपने वोट से देंगे?
दीपके ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह केवल वोटों की भाषा समझते हैं। उन्होंने कहा, 'हर छात्र के घर में कम से कम चार वोट होते हैं। अगर एक छात्र पर लाठी चलती है या पेलेट गन दागी जाती है, तो उस घर के चार वोट सरकार के खाते से कम हो जाएंगे। अगर समय रहते सरकार ने सुधार नहीं किया, तो आने वाले चुनावों में छात्र खुद उन्हें सही रास्ते पर ले आएंगे।'

कंगना रनौत के 'गटर जनरेशन' बयान पर दीपके ने क्या जवाब दिया?
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में जेन-जी पीढ़ी को गटर जनरेशन कहा था। जब दीपके से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। दीपके ने कहा, 'कंगना रनौत आखिरी बार संसद में कब दिखी थीं? अगर कोई गंभीर राजनेता टिप्पणी करे तो मुझे बताएं। मैं पार्ट-टाइम नेताओं के बयानों पर समय बर्बाद नहीं करता।'
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