Nitin Gadkari: 'विधानसभा में राणे की थी जबरदस्त पकड़, नाम से डरते थे मंत्री'; गडकरी ने सुनाया 1999 का किस्सा
Maharashtra Politics: नितिन गडकरी ने नारायण राणे के विपक्ष के नेता के तौर पर काम की तारीफ करते हुए कहा कि मंत्री उनसे डरते थे और सदन में आने से पहले उनकी मौजूदगी देखते थे। राणे के भाषण तथ्य आधारित और प्रभावी होते थे। आइए, विस्तार से जानते हैं गडकरी ने राणे पर और क्या-क्या कहा।
विस्तार
महाराष्ट्र की राजनीति में एक पुराना किस्सा फिर चर्चा में आ गया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि एक समय ऐसा था जब विधानसभा में मंत्री यह देखकर ही सदन में आते थे कि नारायण राणे मौजूद हैं या नहीं। गडकरी ने राणे के विपक्ष के नेता के तौर पर काम की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि उनकी मौजूदगी से सरकार भी दबाव में आ जाती थी।
गडकरी ने यह बात सिंधुदुर्ग में राणे के 75वें जन्मदिन के कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि 1999 के चुनाव के बाद जब राणे विधानसभा में विपक्ष के नेता थे और वे खुद विधान परिषद में विपक्ष के नेता थे, तब राणे के सवाल और भाषण इतने मजबूत होते थे कि मंत्री उनसे बचने की कोशिश करते थे। उनके मुताबिक, राणे की तैयारी और आक्रामक शैली सरकार को घेरने में बेहद प्रभावी थी।
क्या सच में मंत्री राणे से बचते थे?
गडकरी ने हल्के अंदाज में कहा कि उस समय के मंत्री जैसे अजित पवार और जयंत पाटिल परदे के पीछे से झांककर देखते थे कि राणे या गडकरी सदन में हैं या नहीं। इसके बाद ही वे तय करते थे कि उन्हें सदन में जाना है या नहीं। यह किस्सा राणे की मजबूत पकड़ और प्रभाव को दिखाता है।
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क्या राणे की तैयारी और भाषण थे खास?
गडकरी ने कहा कि राणे के भाषण हमेशा तथ्यों पर आधारित और सीधे मुद्दे पर होते थे। चाहे विषय उद्योग का हो, डेयरी का या शासन से जुड़ा हो, राणे हर मुद्दे पर गहराई से बोलते थे। उनकी तैयारी इतनी मजबूत होती थी कि सरकार के लिए जवाब देना मुश्किल हो जाता था।
क्या नाइट वॉचमैन से की गई तुलना का मतलब क्या है?
गडकरी ने राणे की तुलना क्रिकेट के नाइट वॉचमैन से की। उन्होंने समझाया कि जैसे नाइट वॉचमैन मुश्किल समय में टीम को संभालता है और फिर शानदार प्रदर्शन करता है, वैसे ही राणे ने विपक्ष के नेता के रूप में अहम समय में अपनी भूमिका निभाई और सरकार को कड़ी चुनौती दी।
क्या आज के नेताओं को राणे से सीखने की जरूरत है?
गडकरी ने कहा कि आज के विधायकों को राणे के काम से सीख लेनी चाहिए। उनके भाषणों और काम करने के तरीके का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छा प्रदर्शन अपेक्षित होता है, लेकिन राणे ने उम्मीद से ज्यादा अच्छा काम कर एक अलग पहचान बनाई।
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