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मुंबई में ऑटो-टैक्सी वालों का मराठी टेस्ट: 1268 चालकों को RTO का नोटिस, खतरे में पड़ जाएगी रोजी-रोटी?
Thu, 20 Aug 2026 11:00 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:00 PM IST
सार
महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि रोजगार की शर्त बन चुका है। आरटीओ की इस अचानक और सख्त चेकिंग से गैर-मराठी चालकों में हड़कंप मच गया है। एक महीने का वक्त, 16 सवाल और वीडियो रिकॉर्डिंग के बीच क्या मुंबई के चालक इस भाषा परीक्षा को पास कर पाएंगे, या फिर हजारों गाड़ियों के पहिये थम जाएंगे?
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महाराष्ट्र में आरटीओ की कार्रवाई
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महाराष्ट्र में व्यावसायिक यात्री वाहन चलाने वाले चालकों के लिए अब मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य परिवहन विभाग ने इसके लिए पूरे राज्य में एक विशेष चेकिंग अभियान शुरू किया है। अभियान के पहले ही दिन यानी गुरुवार को 1,268 ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को नोटिस जारी किए गए। इन चालकों के पास मराठी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं पाया गया।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि पूरे राज्य में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) की ओर से यह कार्रवाई की गई है। नोटिस पाने वाले चालकों को मराठी सीखने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। अगर वे इस अवधि में मराठी का जरूरी ज्ञान हासिल नहीं करते हैं, तो उनके ड्राइविंग बैज को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।
मुंबई और अन्य जिलों में जांच के आंकड़े
गुरुवार शाम तक राज्य भर में कुल 8,217 चालकों का भाषा परीक्षण किया गया। इसमें अकेले मुंबई महानगर क्षेत्र से 3,995 चालक शामिल थे। मुंबई रीजन में जांच के दौरान 604 चालक मराठी बोलने और समझने में असमर्थ पाए गए। वहीं राज्य के बाकी हिस्सों में 4,222 चालकों की जांच हुई, जिनमें से 664 चालकों को नोटिस थमाए गए।
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परिवहन मंत्री ने कहा कि यह जांच अभियान 30 सितंबर तक लगातार जारी रहेगा। सरकार का मानना है कि मराठी भाषा का ज्ञान होना केवल नियमों का पालन करना नहीं है, बल्कि यह यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से भी जुड़ा मुद्दा है।
कैसे हो रही है ड्राइवरों की परीक्षा?
इस चेकिंग अभियान में ड्राइवरों की परीक्षा लेने के लिए 16 सवालों की एक प्रश्नावली तैयार की गई है। जांच के दौरान अधिकारी चालकों से रोजमर्रा के काम से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं। उदाहरण के लिए, चालकों से ऐसे बयानों और सवालों की उम्मीद की जा रही है:-
मराठी: मला सीएनजी भरायचे आहे, थोडे थांबवे लागेल।
हिंदी: मुझे सीएनजी भरवानी है, थोड़ा रुकना पड़ेगा।
मराठी: माझी रिक्षा और टैक्सी शेयरिंगची आहे।
हिंदी: मेरी ऑटो और टैक्सी शेयरिंग वाली है।
मराठी: मीटर चालू केले आहे।
हिंदी: मीटर चालू कर दिया है।
यह भी पढ़ें: सोशल मीडिया पर सख्ती: 2.98 लाख URL हटाने की मांग, राज्यों से 82% मामले; आखिर इतनी बड़ी कार्रवाई की वजह क्या?
एक वरिष्ठ आरटीओ अधिकारी ने बताया कि यह प्रश्नावली 'कोंकण साहित्य परिषद' द्वारा चालकों को दी गई मराठी ट्रेनिंग पर आधारित है। इसमें यात्रियों से बात करने, रास्ता समझने, किराए और मीटर के बारे में संवाद करने जैसे व्यावहारिक सवाल शामिल हैं। दादर में जांच कर रहे एक आरटीओ निरीक्षक ने बताया कि यदि एक महीने बाद भी चालक सही जवाब नहीं दे पाते हैं, तो उनका बैज सस्पेंड होगा। इस पूरी प्रक्रिया की आरटीओ अधिकारियों द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है।
नियमों का इतिहास और यूनियनों की चिंता
सरकार ने इस साल मई में मराठी अनिवार्य करने की घोषणा की थी। इसके बाद चालकों के लिए ट्रेनिंग कोर्स शुरू किया गया और 15 अगस्त की समयसीमा तय की गई थी। मंत्री सरनाईक के अनुसार, 105 दिनों के अभियान में अब तक 1.65 लाख चालक मराठी का प्रशिक्षण ले चुके हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसका मकसद किसी का रोजगार छीनना नहीं, बल्कि राज्य की भाषा और संस्कृति का संरक्षण करना है।
यह नियम नया नहीं है। महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 में मराठी का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य था, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था। हाल ही में इसमें संशोधन कर इसे कड़ा बनाया गया है।
चालकों की यूनियन ने उठाए सवाल
दूसरी ओर, टैक्सी और ऑटो चालकों की यूनियनों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। 'सेवा सारथी टैक्सी यूनियन' के नेता डीएम गोसावी का कहना है कि नियमों में 'व्यावहारिक ज्ञान' की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है। यूनियनों और पूर्व आरटीओ अधिकारियों की आशंका है कि बिना किसी स्पष्ट मानदंड या लिखित परीक्षा के, मौखिक जांच से आरटीओ दफ्तरों में भ्रष्टाचार बढ़ सकता है।
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परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि पूरे राज्य में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) की ओर से यह कार्रवाई की गई है। नोटिस पाने वाले चालकों को मराठी सीखने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। अगर वे इस अवधि में मराठी का जरूरी ज्ञान हासिल नहीं करते हैं, तो उनके ड्राइविंग बैज को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।
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मुंबई और अन्य जिलों में जांच के आंकड़े
गुरुवार शाम तक राज्य भर में कुल 8,217 चालकों का भाषा परीक्षण किया गया। इसमें अकेले मुंबई महानगर क्षेत्र से 3,995 चालक शामिल थे। मुंबई रीजन में जांच के दौरान 604 चालक मराठी बोलने और समझने में असमर्थ पाए गए। वहीं राज्य के बाकी हिस्सों में 4,222 चालकों की जांच हुई, जिनमें से 664 चालकों को नोटिस थमाए गए।
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परिवहन मंत्री ने कहा कि यह जांच अभियान 30 सितंबर तक लगातार जारी रहेगा। सरकार का मानना है कि मराठी भाषा का ज्ञान होना केवल नियमों का पालन करना नहीं है, बल्कि यह यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से भी जुड़ा मुद्दा है।
कैसे हो रही है ड्राइवरों की परीक्षा?
इस चेकिंग अभियान में ड्राइवरों की परीक्षा लेने के लिए 16 सवालों की एक प्रश्नावली तैयार की गई है। जांच के दौरान अधिकारी चालकों से रोजमर्रा के काम से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं। उदाहरण के लिए, चालकों से ऐसे बयानों और सवालों की उम्मीद की जा रही है:-
मराठी: मला सीएनजी भरायचे आहे, थोडे थांबवे लागेल।
हिंदी: मुझे सीएनजी भरवानी है, थोड़ा रुकना पड़ेगा।
मराठी: माझी रिक्षा और टैक्सी शेयरिंगची आहे।
हिंदी: मेरी ऑटो और टैक्सी शेयरिंग वाली है।
मराठी: मीटर चालू केले आहे।
हिंदी: मीटर चालू कर दिया है।
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एक वरिष्ठ आरटीओ अधिकारी ने बताया कि यह प्रश्नावली 'कोंकण साहित्य परिषद' द्वारा चालकों को दी गई मराठी ट्रेनिंग पर आधारित है। इसमें यात्रियों से बात करने, रास्ता समझने, किराए और मीटर के बारे में संवाद करने जैसे व्यावहारिक सवाल शामिल हैं। दादर में जांच कर रहे एक आरटीओ निरीक्षक ने बताया कि यदि एक महीने बाद भी चालक सही जवाब नहीं दे पाते हैं, तो उनका बैज सस्पेंड होगा। इस पूरी प्रक्रिया की आरटीओ अधिकारियों द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है।
नियमों का इतिहास और यूनियनों की चिंता
सरकार ने इस साल मई में मराठी अनिवार्य करने की घोषणा की थी। इसके बाद चालकों के लिए ट्रेनिंग कोर्स शुरू किया गया और 15 अगस्त की समयसीमा तय की गई थी। मंत्री सरनाईक के अनुसार, 105 दिनों के अभियान में अब तक 1.65 लाख चालक मराठी का प्रशिक्षण ले चुके हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसका मकसद किसी का रोजगार छीनना नहीं, बल्कि राज्य की भाषा और संस्कृति का संरक्षण करना है।
यह नियम नया नहीं है। महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 में मराठी का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य था, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था। हाल ही में इसमें संशोधन कर इसे कड़ा बनाया गया है।
चालकों की यूनियन ने उठाए सवाल
दूसरी ओर, टैक्सी और ऑटो चालकों की यूनियनों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। 'सेवा सारथी टैक्सी यूनियन' के नेता डीएम गोसावी का कहना है कि नियमों में 'व्यावहारिक ज्ञान' की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है। यूनियनों और पूर्व आरटीओ अधिकारियों की आशंका है कि बिना किसी स्पष्ट मानदंड या लिखित परीक्षा के, मौखिक जांच से आरटीओ दफ्तरों में भ्रष्टाचार बढ़ सकता है।