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बगावत का बदला: बागियों के गढ़ को ढहाने निकलेंगे उद्धव ठाकरे, 'गद्दारों' को टिकट देने पर जनता से मांगेंगे माफी
आईएएनएस, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 22 Jun 2026 06:01 PM IST
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सार
शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे 27 से 29 जून तक एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने वाले छह बागी सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करेंगे। इस दौरान वे मतदाताओं से गलत उम्मीदवारों को जिताने के लिए सार्वजनिक माफी मांगेंगे। इस रणनीतिक दौरे का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करना और शिंदे गुट को कड़ी चुनौती देना है।
उद्धव ठाकरे, शिवसेना यूबीटी प्रमुख
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उलटफेर हुआ है। शिवसेना-यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के बागी सांसदों के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। उद्धव ठाकरे आगामी 27 से 29 जून तक राज्य के उन सभी निर्वाचन क्षेत्रों का तूफानी दौरा करेंगे, जहां के सांसदों ने हाल ही में पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर हुए इस बड़े विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे का यह पहला और सबसे आक्रामक कदम माना जा रहा है।
राज्यसभा सांसद और 'सामना' के कार्यकारी संपादक संजय राउत की ओर से जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह तीन दिवसीय दौरा राज्य के कई सबसे महत्वपूर्ण जिलों को कवर करेगा। पार्टी की तरफ से इस महादौरे को बेहद आक्रामक बनाने के लिए शीर्ष नेताओं को मैदान में उतारा गया है और हर लोकसभा क्षेत्र के लिए विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
गद्दारी के खिलाफ जनता की अदालत में उद्धव
यह सियासी सरगर्मी पिछले सप्ताह शिवसेना-यूबीटी के छह बड़े सांसदों के विद्रोह के बाद शुरू हुई है। इन बागी सांसदों में ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय पाटिल (मुलुंड उत्तर पूर्व), संजय जाधव (परभणी), संजय देशमुख (यवतमाल), नागेश पाटिल अष्टिकर (हिंगोली) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी) शामिल हैं, जिन्होंने शिंदे गुट में शामिल होने का स्पष्ट संकेत दे दिया है।
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पार्टी को लगे इस करारे झटके के बाद उद्धव ठाकरे ने बेहद भावुक और रणनीतिक दांव खेला है। ठाकरे ने पहले ही एलान कर दिया है कि वह सीधे इन निर्वाचन क्षेत्रों की जनता के बीच जाएंगे। वे 2024 के आम चुनावों के दौरान इन दलबदलू सांसदों को वोट देने वाले मतदाताओं से सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माफी मांगेंगे कि उन्होंने गलत उम्मीदवारों को टिकट दिया।
यह भी पढ़ें: उद्धव के छह सांसद शिवसेना में शामिल: एकनाथ शिंदे ने दिलाई पार्टी की सदस्यता, कहा- ऑपरेशन टाइगर अब पूरा और सफल
यवतमाल से होगी शुरुआत, परभणी में पहला पड़ाव
तय कार्यक्रम के मुताबिक, उद्धव ठाकरे 27 जून को यवतमाल से अपने इस शक्ति प्रदर्शन वाले दौरे की शुरुआत करेंगे। यवतमाल में तैयारियों का जायजा लेने के लिए सांसद अरविंद सावंत, विधायक संजय डेरकर और जिला प्रमुख प्रवीण शिंदे समेत कई वरिष्ठ नेताओं को तैनात किया गया है। इसके तुरंत बाद वे वाशिम के लिए रवाना होंगे, जहां की कमान दिलीप जाधव और बालाजी वानखेड़े संभाल रहे हैं।
27 जून की दोपहर को ही ठाकरे हिंगोली पहुंचेंगे, जहां विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अंबादास दानवे और बबनराव थोराट व्यवस्था संभालेंगे। इस भारी व्यस्तता वाले दिन का समापन परभणी में होगा, जहां उद्धव ठाकरे रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन, यानी 28 जून को परभणी शहर में जनसभा और बैठकों के बाद ठाकरे दोपहर में धाराशिव के लिए रवाना होंगे। यहां की कमान विधायक कैलाश पाटिल के हाथों में होगी। इस दिन का समापन छत्रपति संभाजीनगर में रात्रि विश्राम के साथ होगा।
शिरडी में अंतिम हुंकार, भावुक अपील के बाद आर-पार
दौरे के अंतिम दिन, 29 जून को उद्धव ठाकरे पवित्र नगरी शिरडी का दौरा करेंगे। शिरडी में इस बेहद महत्वपूर्ण चरण की देखरेख का जिम्मा खुद संजय राउत और एमएलसी सुनील शिंदे को सौंपा गया है। शिरडी में शक्ति प्रदर्शन के बाद पार्टी प्रमुख वापस मुंबई के लिए रवाना हो जाएंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव और महत्वपूर्ण राजनीतिक गठबंधनों से पहले, जमीन पर मौजूद शिवसैनिकों को एकजुट करने और मतदाताओं के साथ सीधा भावनात्मक संबंध मजबूत करने के लिए इस पूरे दौरे का खाका तैयार किया गया है।
इससे पहले, संयुक्त शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से एक बेहद भावुक अपील की थी। उन्होंने पिछले शुक्रवार को कहा था कि अगर पार्टी के नेता और कार्यकर्ता बागी सांसदों की ओर से उन पर लगाए गए आरोपों को सही मानते हैं, तो वे तुरंत शिवसेना-यूबीटी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद अब इस जमीनी दौरे को शिंदे गुट के खिलाफ आर-पार की लड़ाई माना जा रहा है।
राज्यसभा सांसद और 'सामना' के कार्यकारी संपादक संजय राउत की ओर से जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह तीन दिवसीय दौरा राज्य के कई सबसे महत्वपूर्ण जिलों को कवर करेगा। पार्टी की तरफ से इस महादौरे को बेहद आक्रामक बनाने के लिए शीर्ष नेताओं को मैदान में उतारा गया है और हर लोकसभा क्षेत्र के लिए विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
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गद्दारी के खिलाफ जनता की अदालत में उद्धव
यह सियासी सरगर्मी पिछले सप्ताह शिवसेना-यूबीटी के छह बड़े सांसदों के विद्रोह के बाद शुरू हुई है। इन बागी सांसदों में ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय पाटिल (मुलुंड उत्तर पूर्व), संजय जाधव (परभणी), संजय देशमुख (यवतमाल), नागेश पाटिल अष्टिकर (हिंगोली) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी) शामिल हैं, जिन्होंने शिंदे गुट में शामिल होने का स्पष्ट संकेत दे दिया है।
पार्टी को लगे इस करारे झटके के बाद उद्धव ठाकरे ने बेहद भावुक और रणनीतिक दांव खेला है। ठाकरे ने पहले ही एलान कर दिया है कि वह सीधे इन निर्वाचन क्षेत्रों की जनता के बीच जाएंगे। वे 2024 के आम चुनावों के दौरान इन दलबदलू सांसदों को वोट देने वाले मतदाताओं से सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माफी मांगेंगे कि उन्होंने गलत उम्मीदवारों को टिकट दिया।
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यवतमाल से होगी शुरुआत, परभणी में पहला पड़ाव
तय कार्यक्रम के मुताबिक, उद्धव ठाकरे 27 जून को यवतमाल से अपने इस शक्ति प्रदर्शन वाले दौरे की शुरुआत करेंगे। यवतमाल में तैयारियों का जायजा लेने के लिए सांसद अरविंद सावंत, विधायक संजय डेरकर और जिला प्रमुख प्रवीण शिंदे समेत कई वरिष्ठ नेताओं को तैनात किया गया है। इसके तुरंत बाद वे वाशिम के लिए रवाना होंगे, जहां की कमान दिलीप जाधव और बालाजी वानखेड़े संभाल रहे हैं।
27 जून की दोपहर को ही ठाकरे हिंगोली पहुंचेंगे, जहां विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अंबादास दानवे और बबनराव थोराट व्यवस्था संभालेंगे। इस भारी व्यस्तता वाले दिन का समापन परभणी में होगा, जहां उद्धव ठाकरे रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन, यानी 28 जून को परभणी शहर में जनसभा और बैठकों के बाद ठाकरे दोपहर में धाराशिव के लिए रवाना होंगे। यहां की कमान विधायक कैलाश पाटिल के हाथों में होगी। इस दिन का समापन छत्रपति संभाजीनगर में रात्रि विश्राम के साथ होगा।
शिरडी में अंतिम हुंकार, भावुक अपील के बाद आर-पार
दौरे के अंतिम दिन, 29 जून को उद्धव ठाकरे पवित्र नगरी शिरडी का दौरा करेंगे। शिरडी में इस बेहद महत्वपूर्ण चरण की देखरेख का जिम्मा खुद संजय राउत और एमएलसी सुनील शिंदे को सौंपा गया है। शिरडी में शक्ति प्रदर्शन के बाद पार्टी प्रमुख वापस मुंबई के लिए रवाना हो जाएंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव और महत्वपूर्ण राजनीतिक गठबंधनों से पहले, जमीन पर मौजूद शिवसैनिकों को एकजुट करने और मतदाताओं के साथ सीधा भावनात्मक संबंध मजबूत करने के लिए इस पूरे दौरे का खाका तैयार किया गया है।
इससे पहले, संयुक्त शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से एक बेहद भावुक अपील की थी। उन्होंने पिछले शुक्रवार को कहा था कि अगर पार्टी के नेता और कार्यकर्ता बागी सांसदों की ओर से उन पर लगाए गए आरोपों को सही मानते हैं, तो वे तुरंत शिवसेना-यूबीटी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद अब इस जमीनी दौरे को शिंदे गुट के खिलाफ आर-पार की लड़ाई माना जा रहा है।