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'संसद में विधेयक थोपने की कोशिश न करें': परिसीमन पर पीएम मोदी को मल्लिकार्जुन खरगे की चेतावनी; कर दी ये मांग

Fri, 16 Oct 2026 03:43 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 16 Oct 2026 03:43 PM IST
सार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से परिसीमन के नए प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र स्थगित होने के 64 दिन बाद भी संसद के दोनों सदनों का सत्रावसान नहीं हुआ है। खरगे के मुताबिक, परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका था। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि नए प्रस्तावों पर सभी दलों से चर्चा किए बिना विधेयक को संसद में जबरन पारित कराने की कोशिश न की जाए।

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Mallikarjun Kharge Writes to PM Modi on Delimitation and Parliament Session Delay
मल्लिकार्जुन खरगे - फोटो : ani

विस्तार

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से परिसीमन के नए प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि संसद में व्यापक प्रभाव वाले संविधान संशोधन विधेयक को पहले की तरह जबरन पारित कराने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि नए प्रस्तावों को संसद में विचार के लिए अंतिम रूप देने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तार से चर्चा की जाए।
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संसद के मानसून सत्र को लेकर खरगे ने क्या सवाल उठाए?
खरगे ने संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान में हो रही देरी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त को मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं हुआ है। खरगे ने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताया। उनका कहना है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सरकार को सभी राजनीतिक दलों को चर्चा का पर्याप्त मौका देना चाहिए।
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परिसीमन पर पहले क्या हुआ था, खरगे ने पत्र में क्या बताया?
खरगे ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि उन्होंने 11 अप्रैल को ही परिसीमन से जुड़े किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। उनके मुताबिक, सरकार ने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय 14 अप्रैल की देर शाम विधेयक सार्वजनिक किए गए और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। खरगे ने कहा कि 17 अप्रैल को लोकसभा में परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका।
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खरगे ने कितनी बार बैठक बुलाने की मांग की?
खरगे के मुताबिक, उन्होंने 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग दोहराई थी। अब उन्होंने चौथी बार यह मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को आपस में विचार-विमर्श करने, दूसरे दलों के साथ चर्चा करने और संबंधित पक्षों की राय जानने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

परिसीमन के नए प्रस्तावों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री सर्वदलीय बैठक बुलाएं। प्रस्तावों को संसद में विचार के लिए अंतिम रूप देने से पहले सभी दलों से विस्तार से चर्चा हो।
राजनीतिक दलों को आपस में और अन्य संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श के लिए पर्याप्त समय मिले। सरकार संविधान संशोधन विधेयक को संसद में जबरन पारित कराने की कोशिश न करे।


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प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में खरगे ने क्या चेतावनी दी?
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री से कहा कि सरकार को पहले की तरह व्यापक प्रभाव वाले संविधान संशोधन विधेयक को संसद में जबरन पारित कराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, “कृपया एक बार फिर संसद में व्यापक प्रभाव वाले संविधान संशोधन विधेयक को जबरन पारित कराने की कोशिश न करें, जैसा आपने पहले प्रयास किया था और जिसे अपने अंजाम तक पहुंचना ही था।” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस पत्र को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया। उन्होंने कहा कि खरगे ने मानसून सत्र के सत्रावसान में अभूतपूर्व देरी और मोदी सरकार की ओर से उठाए जा सकने वाले कदमों को लेकर प्रधानमंत्री को लिखा है।

 
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