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ममता बनर्जी की हाईकोर्ट में दलील: 'ये बुलडोजर वाला राज्य नहीं', अदालत बोली- सियासी जुड़ाव न बने बेदखली की वजह
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Thu, 14 May 2026 07:21 PM IST
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सार
पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील की वेशभूषा में एक मामले की सुनवाई के दौरान पेश हुईं। इस पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से ममता बनर्जी की वकालत और पेशेवर स्थिति को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बीसीआई ने यह रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
बंगाल में चुनाव बाद हिंसा के मामले पर अदालत में सुनवाई
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक जुड़ाव के आधार पर किसी भी व्यक्ति को उसके निवास या व्यावसायिक प्रतिष्ठान से बेदखल नहीं किया जाएगा। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने गुरुवार शाम को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। यह निर्णय राज्य में चुनाव बाद की हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान लिया गया।
मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस को निर्देश दिया है कि वे चुनाव बाद की हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाएं। यह फैसला राज्य में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों के नतीजों की घोषणा के बाद कथित तौर पर हुई हिंसा की घटनाओं पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया।
ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी की वकालत पर सवाल: कलकत्ता हाईकोर्ट में पेशी के बाद कार्रवाई तेज; BCI ने 48 घंटे में मांगी रिपोर्ट
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पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद दी दलीलें
इस मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने याचिकाकर्ता की ओर से वकील के तौर पर दलीलें पेश कीं। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट से राज्य में चुनाव बाद की हिंसा को रोकने के लिए हस्तक्षेप की मांग की। ममता बनर्जी ने दावा किया कि इस हिंसा से कोई भी अछूता नहीं रहा, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग, महिलाएं और बच्चे।
उन्होंने कहा, "पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। अगर अदालत अनुमति दे, तो मैं इन आरोपों का उल्लेख एक अतिरिक्त हलफनामे में करूंगी। राज्य के लोगों को बचाएं। यह 'बुलडोजर' राज्य नहीं है। यह पश्चिम बंगाल है। कृपया राज्य के लोगों को बचाएं।"
शुभेंदु सरकार ने आरोपों को बताया निराधार
हालांकि, राज्य सरकार के वकील धीरज त्रिवेदी ने ममता बनर्जी के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने तर्क दिया कि याचिका में चुनाव बाद की हिंसा के कोई विशिष्ट उदाहरण नहीं दिए गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि चुनाव बाद की हिंसा की 2,000 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन कोई भी उदाहरण नहीं दिया गया है। शिकायतकर्ताओं का विवरण भी नहीं दिया गया है।
त्रिवेदी ने कहा कि 2021 में चुनाव बाद की हिंसा से संबंधित मामले की सुनवाई पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने की थी। उन्होंने कहा कि जब तक अदालत के समक्ष चुनाव बाद की हिंसा के विशिष्ट उदाहरण प्रस्तुत नहीं किए जाते, तब तक अंतरिम आदेश पारित करना उचित नहीं होगा।
ये भी पढ़ें: West Bengal: आसनसोल की खदान में विस्फोट, 40 से अधिक मजदूर घायल
कब होगी मामले की अगली सुनवाई?
इस मामले की सुनवाई पांच सप्ताह बाद फिर से होगी। उस दिन खंडपीठ यह तय करेगी कि क्या इस मामले को पांच-न्यायाधीशों की पीठ को संदर्भित किया जाए, जैसा कि 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद चुनाव बाद की हिंसा से संबंधित एक समान मामले में किया गया था। खंडपीठ ने मामले के सभी पक्षों को अगली सुनवाई की तारीख से पहले हलफनामा जमा करने का निर्देश दिया है।
संबंधित वीडियो
मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस को निर्देश दिया है कि वे चुनाव बाद की हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाएं। यह फैसला राज्य में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों के नतीजों की घोषणा के बाद कथित तौर पर हुई हिंसा की घटनाओं पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया।
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पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद दी दलीलें
इस मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने याचिकाकर्ता की ओर से वकील के तौर पर दलीलें पेश कीं। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट से राज्य में चुनाव बाद की हिंसा को रोकने के लिए हस्तक्षेप की मांग की। ममता बनर्जी ने दावा किया कि इस हिंसा से कोई भी अछूता नहीं रहा, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग, महिलाएं और बच्चे।
उन्होंने कहा, "पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। अगर अदालत अनुमति दे, तो मैं इन आरोपों का उल्लेख एक अतिरिक्त हलफनामे में करूंगी। राज्य के लोगों को बचाएं। यह 'बुलडोजर' राज्य नहीं है। यह पश्चिम बंगाल है। कृपया राज्य के लोगों को बचाएं।"
शुभेंदु सरकार ने आरोपों को बताया निराधार
हालांकि, राज्य सरकार के वकील धीरज त्रिवेदी ने ममता बनर्जी के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने तर्क दिया कि याचिका में चुनाव बाद की हिंसा के कोई विशिष्ट उदाहरण नहीं दिए गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि चुनाव बाद की हिंसा की 2,000 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन कोई भी उदाहरण नहीं दिया गया है। शिकायतकर्ताओं का विवरण भी नहीं दिया गया है।
त्रिवेदी ने कहा कि 2021 में चुनाव बाद की हिंसा से संबंधित मामले की सुनवाई पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने की थी। उन्होंने कहा कि जब तक अदालत के समक्ष चुनाव बाद की हिंसा के विशिष्ट उदाहरण प्रस्तुत नहीं किए जाते, तब तक अंतरिम आदेश पारित करना उचित नहीं होगा।
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कब होगी मामले की अगली सुनवाई?
इस मामले की सुनवाई पांच सप्ताह बाद फिर से होगी। उस दिन खंडपीठ यह तय करेगी कि क्या इस मामले को पांच-न्यायाधीशों की पीठ को संदर्भित किया जाए, जैसा कि 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद चुनाव बाद की हिंसा से संबंधित एक समान मामले में किया गया था। खंडपीठ ने मामले के सभी पक्षों को अगली सुनवाई की तारीख से पहले हलफनामा जमा करने का निर्देश दिया है।
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