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सीबीआई: मथुरा की अदालत ने नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा, 1.43 लाख जुर्माना
Sat, 31 Oct 2026 12:16 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 31 Oct 2026 12:16 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश के मथुरा की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग बच्ची के यौन शोषण और उससे जुड़े अन्य अपराधों में श्याम बिहारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 1.43 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। सीबीआई ने जून 2025 में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
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नाबालिग के यौन उत्पीड़न के दोषी को आजीवन कारावास की सजा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
उत्तर प्रदेश के मथुरा में पॉक्सो अधिनियम के तहत विशेष न्यायाधीश की अदालत ने 30 अक्तूबर को आरोपी श्याम बिहारी को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012', 'भारतीय दंड संहिता (आईपीसी)' और 'सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000' के तहत विभिन्न अपराधों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर 1.43 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
इन अपराधों में बलात्कार, गंभीर यौन हमला, अश्लील सामग्री के लिए बच्चे का इस्तेमाल करना और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को अपने पास रखना शामिल है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 जून 2025 को आरोपी श्याम बिहारी के खिलाफ यह मामला दर्ज किया था। उस पर इलेक्ट्रॉनिक रूप में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री को इकट्ठा करने, उसे आगे भेजने और प्रकाशित करने के आरोप थे।
साबित हुआ गंभीर यौन अपराध का दोषी
जांच के दौरान यह पता चला कि आरोपी ने एक नाबालिग लड़की के साथ गंभीर यौन अपराध (एग्रवेटेड पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट) भी किया था। सीबीआई ने नाबालिग पीड़िता का पता लगाया और उसकी सुरक्षा, गरिमा और भावनात्मक भलाई का पूरा ध्यान रखते हुए जांच की। पीड़िता को उचित काउंसलिंग सहायता प्रदान की गई। फोरेंसिक विशेषज्ञों, बच्चों के यौन शोषण के मामलों से जुड़े चिकित्सा पेशेवरों और बाल संरक्षण प्राधिकरणों के साथ करीबी समन्वय बनाए रखा गया।
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डिजिटल साक्ष्यों को सही ढंग से इकट्ठा करने, संभालने और सुरक्षित रखने का विशेष ध्यान रखा गया। जांच पूरी होने के बाद, CBI ने 14 अगस्त 2025 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने 16 अक्तूबर 2025 को आरोप तय किए। मुकदमे के बाद, कोर्ट ने आरोपी श्याम बिहारी को कई अपराधों का दोषी ठहराया।
अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
इनमें नाबालिग लड़की के साथ गंभीर यौन अपराध, यौन शोषण, अश्लील उद्देश्यों के लिए बच्चे का इस्तेमाल और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी अश्लील सामग्री अपने पास रखना शामिल है। ये अपराध पॉक्सो एक्ट 2012, आईपीसी और आईटी एक्ट 2000 के तहत दंडनीय हैं। कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सीबीआई, बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े अपराधों की जांच और उन पर मुकदमा चलाने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे मामलों में बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
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इन अपराधों में बलात्कार, गंभीर यौन हमला, अश्लील सामग्री के लिए बच्चे का इस्तेमाल करना और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को अपने पास रखना शामिल है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 जून 2025 को आरोपी श्याम बिहारी के खिलाफ यह मामला दर्ज किया था। उस पर इलेक्ट्रॉनिक रूप में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री को इकट्ठा करने, उसे आगे भेजने और प्रकाशित करने के आरोप थे।
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साबित हुआ गंभीर यौन अपराध का दोषी
जांच के दौरान यह पता चला कि आरोपी ने एक नाबालिग लड़की के साथ गंभीर यौन अपराध (एग्रवेटेड पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट) भी किया था। सीबीआई ने नाबालिग पीड़िता का पता लगाया और उसकी सुरक्षा, गरिमा और भावनात्मक भलाई का पूरा ध्यान रखते हुए जांच की। पीड़िता को उचित काउंसलिंग सहायता प्रदान की गई। फोरेंसिक विशेषज्ञों, बच्चों के यौन शोषण के मामलों से जुड़े चिकित्सा पेशेवरों और बाल संरक्षण प्राधिकरणों के साथ करीबी समन्वय बनाए रखा गया।
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डिजिटल साक्ष्यों को सही ढंग से इकट्ठा करने, संभालने और सुरक्षित रखने का विशेष ध्यान रखा गया। जांच पूरी होने के बाद, CBI ने 14 अगस्त 2025 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने 16 अक्तूबर 2025 को आरोप तय किए। मुकदमे के बाद, कोर्ट ने आरोपी श्याम बिहारी को कई अपराधों का दोषी ठहराया।
अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
इनमें नाबालिग लड़की के साथ गंभीर यौन अपराध, यौन शोषण, अश्लील उद्देश्यों के लिए बच्चे का इस्तेमाल और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी अश्लील सामग्री अपने पास रखना शामिल है। ये अपराध पॉक्सो एक्ट 2012, आईपीसी और आईटी एक्ट 2000 के तहत दंडनीय हैं। कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सीबीआई, बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े अपराधों की जांच और उन पर मुकदमा चलाने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे मामलों में बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।