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MEA: 'अपने गिरेबां में झांके पाकिस्तान', आतंकवादी संगठन से जुड़े मामले को लेकर भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Wed, 25 Mar 2026 06:59 PM IST
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सार
MEA: भारत ने एक आतंकवादी संगठन को लेकर न्यायिक फैसले पर पाकिस्तान की टिप्पणी को खारिज किया और कहा कि उसे अपने देश में हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों पर ध्यान देना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
भारत ने एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन से जुड़े न्यायिक मामलों पर बयान को लेकर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को झूठे और भ्रामक दावों के बजाय अपने यहां हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों पर विचार करना चाहिए। मंत्रालय ने इसको लेकर एक बयान भी जारी किया है।
मीडिया के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, भारत स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के इस बयान को खारिज करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों या न्यायिक प्रक्रियाओं पर कोई टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
प्रवक्ता जायसवाल ने कहा कि यह आश्चर्य की बात नहीं है कि एक ऐसा देश इस तरह का बयान जारी कर निर्दोष लोगों की हत्या और हिंसा को बढ़ावा दे रहा है, जो लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान झूठे और भ्रामक दावों के बजाय अपने यहां जारी गंभीर और व्यवस्थित मानवाधिकार उल्लंघनों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अदालत ने आसिया अंद्राबी को सुनाई उम्रकैद की सजा
विदेश मंत्रालय की ओर से यह सख्त प्रतिक्रिया तब आई है, जब पाकिस्तान ने भारत में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही पर बयान जारी किया। इससे पहले मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। इसी मामले में उसकी दो सहयोगियों फहमीदा और नसरीन को भी 30 साल की कैद की सजा सुनाई गई।
ये भी पढ़ें: वकीलों के लिए बनेगा अलग कल्याण कोष, केंद्र और BCI से शीर्ष अदालत ने मांगा जवाब
अदालत ने अपने 286 पन्नों के विस्तृत फैसले में कहा कि अंद्राबी और उसकी सहयोगियों ने कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए साजिश रची। अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से जमा कराए गए उन वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा किया, जिनमें लगातार यह दावा किया जा रहा था कि कश्मीर पाकिस्तान का है और भारत के कब्जे में है।
अदालत ने पाया कि अंद्राबी ने भाषणों और साक्षात्कारों के जरिये खुलेआम पाकिस्तान का समर्थन किया और यह प्रचार किया कि कश्मीर कभी भारत का हिस्सा नहीं था।भारत लगातार कहता रहा है कि उसकी आंतरिक सुरक्षा और न्यायिक कार्रवाइयां संप्रभुता के मुद्दे हैं और उसने कई बार पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों को समर्थन देना बंद करे।
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Our response to media queries regarding statement made by Pakistan on judicial matters concerning a banned terrorist organisation
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🔗 https://t.co/A5N1Fh9igT pic.twitter.com/4euQi5Smms — Randhir Jaiswal (@MEAIndia) March 25, 2026
मीडिया के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, भारत स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के इस बयान को खारिज करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों या न्यायिक प्रक्रियाओं पर कोई टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
प्रवक्ता जायसवाल ने कहा कि यह आश्चर्य की बात नहीं है कि एक ऐसा देश इस तरह का बयान जारी कर निर्दोष लोगों की हत्या और हिंसा को बढ़ावा दे रहा है, जो लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान झूठे और भ्रामक दावों के बजाय अपने यहां जारी गंभीर और व्यवस्थित मानवाधिकार उल्लंघनों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अदालत ने आसिया अंद्राबी को सुनाई उम्रकैद की सजा
विदेश मंत्रालय की ओर से यह सख्त प्रतिक्रिया तब आई है, जब पाकिस्तान ने भारत में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही पर बयान जारी किया। इससे पहले मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। इसी मामले में उसकी दो सहयोगियों फहमीदा और नसरीन को भी 30 साल की कैद की सजा सुनाई गई।
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अदालत ने अपने 286 पन्नों के विस्तृत फैसले में कहा कि अंद्राबी और उसकी सहयोगियों ने कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए साजिश रची। अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से जमा कराए गए उन वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा किया, जिनमें लगातार यह दावा किया जा रहा था कि कश्मीर पाकिस्तान का है और भारत के कब्जे में है।
अदालत ने पाया कि अंद्राबी ने भाषणों और साक्षात्कारों के जरिये खुलेआम पाकिस्तान का समर्थन किया और यह प्रचार किया कि कश्मीर कभी भारत का हिस्सा नहीं था।भारत लगातार कहता रहा है कि उसकी आंतरिक सुरक्षा और न्यायिक कार्रवाइयां संप्रभुता के मुद्दे हैं और उसने कई बार पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों को समर्थन देना बंद करे।