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Politics: मोदी सरकार की बुकलेट में 12 साल की उपलब्धियां, टैक्स में राहत को बताया रामराज्य की झलक
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 10 Jun 2026 05:02 PM IST
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सार
केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में आयकर के बोझ में कमी को रामराज्य की परिकल्पना बताया है। मोदी सरकार की उपलब्धियों वाली बुकलेट के अनुसार, टैक्स सुधारों और डिजिटल इंडिया से जनता का भरोसा बढ़ा है। भारत अब फ्रेजाइल फाइव से निकलकर दुनिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था बन गया है।
पीएम मोदी
- फोटो : Social Media
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विस्तार
केंद्र सरकार ने एक विशेष बुकलेट जारी की है। इसमें नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के कार्यकाल की उपलब्धियां बताई गई हैं। सरकार का कहना है कि पिछले 12 साल में आयकर (इनकम टैक्स) का बोझ कम होना रामराज्य की सोच को दिखाता है। जीएसटी, फेसलेस टैक्स और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों ने सरकारी व्यवस्था में जनता का भरोसा बढ़ाया है। ये सुधार भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेंगे।
बुकलेट के मुताबिक, टैक्स देने वालों का विश्वास बढ़ने से सड़कों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ा है। मोदी सरकार ने 2014 से अब तक चार बार टैक्स में बड़ी राहत दी है। पिछले 12 साल में सालाना टैक्स-फ्री आय की सीमा छह बार बढ़ाई गई है। पहले यह सीमा दो लाख रुपये थी, जो अब बढ़कर 12.75 लाख रुपये हो गई है। इस दौरान टैक्स भरने वालों की संख्या भी 5.26 करोड़ से बढ़कर 12.13 करोड़ पहुंच गई है।
सरकार का कहना है कि जब उसकी कमाई बढ़ी, तो वह पैसा खजाने में जमा नहीं रहा। वह पैसा विकास कार्यों के जरिए नागरिकों के पास वापस पहुंचा। अब इनकम टैक्स रिफंड भी पहले से ज्यादा जल्दी मिल रहे हैं। इससे लोगों के पास नकदी की उपलब्धता बढ़ी है। बुकलेट में लिखा है कि टैक्स का बोझ कम होने से लोगों का भरोसा बढ़ा है। लोग देख रहे हैं कि उनका पैसा देश के भविष्य के निर्माण में लग रहा है। यही सुशासन है और यही रामराज्य का संदेश है।
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भारत की विकास यात्रा फ्रेजाइल फाइव से सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था तक पहुंच गई है। साल 2013 में भारत दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में शामिल था। लेकिन कड़े सुधारों ने पूरी तस्वीर बदल दी। आज भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। सरकार ने महंगाई पर काबू पाया और जीएसटी लागू कर पूरे देश को एक बाजार बनाया। बैंकिंग सुधारों से बैंकों का फंसा हुआ कर्ज (NPA) भी कम हुआ है।
ये भी पढ़ें: Bengal: शताब्दी रॉय ने ममता पर साधा निशाना, कहा- 20 सांसदों का साथ जाना पार्टी नेतृत्व की विफलता; उठाए कई सवाल
जीएसटी सुधारों ने नागरिकों का जीवन आसान बनाया है। इससे सभी आय वर्ग के लोगों को खर्चों में दस प्रतिशत तक की बचत हुई है। अप्रैल महीने में जीएसटी कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इन सुधारों का सबसे बड़ा फायदा मध्यम वर्ग को मिला है। इससे घरेलू खपत में करीब दो लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। साल 2025-26 में सरकारी बैंकों ने करीब दो लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है।
बुकलेट के मुताबिक, टैक्स देने वालों का विश्वास बढ़ने से सड़कों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ा है। मोदी सरकार ने 2014 से अब तक चार बार टैक्स में बड़ी राहत दी है। पिछले 12 साल में सालाना टैक्स-फ्री आय की सीमा छह बार बढ़ाई गई है। पहले यह सीमा दो लाख रुपये थी, जो अब बढ़कर 12.75 लाख रुपये हो गई है। इस दौरान टैक्स भरने वालों की संख्या भी 5.26 करोड़ से बढ़कर 12.13 करोड़ पहुंच गई है।
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सरकार का कहना है कि जब उसकी कमाई बढ़ी, तो वह पैसा खजाने में जमा नहीं रहा। वह पैसा विकास कार्यों के जरिए नागरिकों के पास वापस पहुंचा। अब इनकम टैक्स रिफंड भी पहले से ज्यादा जल्दी मिल रहे हैं। इससे लोगों के पास नकदी की उपलब्धता बढ़ी है। बुकलेट में लिखा है कि टैक्स का बोझ कम होने से लोगों का भरोसा बढ़ा है। लोग देख रहे हैं कि उनका पैसा देश के भविष्य के निर्माण में लग रहा है। यही सुशासन है और यही रामराज्य का संदेश है।
भारत की विकास यात्रा फ्रेजाइल फाइव से सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था तक पहुंच गई है। साल 2013 में भारत दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में शामिल था। लेकिन कड़े सुधारों ने पूरी तस्वीर बदल दी। आज भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। सरकार ने महंगाई पर काबू पाया और जीएसटी लागू कर पूरे देश को एक बाजार बनाया। बैंकिंग सुधारों से बैंकों का फंसा हुआ कर्ज (NPA) भी कम हुआ है।
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जीएसटी सुधारों ने नागरिकों का जीवन आसान बनाया है। इससे सभी आय वर्ग के लोगों को खर्चों में दस प्रतिशत तक की बचत हुई है। अप्रैल महीने में जीएसटी कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इन सुधारों का सबसे बड़ा फायदा मध्यम वर्ग को मिला है। इससे घरेलू खपत में करीब दो लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। साल 2025-26 में सरकारी बैंकों ने करीब दो लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है।