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Mumbai: ज्वेलरी फर्म में 5.80 करोड़ कीमत के सोने का गबन, क्या 15 साल का भरोसा बना धांधली की वजह?

Sat, 11 Jul 2026 01:52 PM IST
नितिन गौतम सुनील मेहरोत्रा, मुंबई
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 11 Jul 2026 01:52 PM IST
सार

मुंबई में एक ज्वेलरी फर्म के साथ करोड़ों रुपये के सोने के गबन का मामला सामने आया है। गबन को अंजाम किसी और ने नहीं बल्कि फर्म के विश्वासी मैनेजर ने ही अंजाम दिया। मामले की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। 

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mumbai jwellery firm got scammed crores by manager crime committed in Mumbai came to light in Patna
मैनेजर ही निकला करोड़ों के गबन का मास्टरमाइंड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दक्षिण मुंबई के दागीना बाजार स्थित 121 साल पुरानी ज्वेलरी फर्म --संघवी धनरूपजी देवाजी ज्वेलर्स-- में करीब 5.80 करोड़ रुपये के सोने के गबन का मामला सामने आया है। कंपनी के मालिक ने आरोप लगाया है कि पिछले 15 साल से मैनेजर के तौर पर काम कर रहा उनका भरोसेमंद कर्मचारी ही इस पूरी हेराफेरी का मास्टरमाइंड निकला। आरोप है कि उसने धीरे-धीरे 6129 ग्राम (करीब 6.1 किलो) सोने के गहने कंपनी के रिकॉर्ड से गायब कर दिए और उन्हें व्यापारियों तक पहुंचाने के बजाय अपने निजी इस्तेमाल में लगा दिया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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सबसे करीबी मैनेजर ने ही दिया धोखा
शिकायतकर्ता विनीत नवरतन राणावत ने पुलिस को बताया कि उनकी फर्म वर्ष 1905 से संचालित हो रही है। आरोपी मितेश कोठारी के चाचा पहले इसी फर्म में हिसाब-किताब देखते थे, इसलिए दोनों परिवारों के बीच वर्षों पुराना भरोसे का रिश्ता था। इसी विश्वास के चलते करीब 15 साल पहले मितेश को कंपनी में मैनेजर नियुक्त किया गया। समय के साथ उसे तिजोरी की चाबियां, सोने के स्टॉक, बिक्री, खरीद और अकाउंट्स जैसी अहम जिम्मेदारियां सौंप दी गईं। उसके कामकाज पर कभी किसी को शक नहीं हुआ।
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ऐसे हुआ गबन का खुलासा
मामले का खुलासा तब हुआ, जब शिकायतकर्ता विनीत राणावत के भाई और मैनेजर मितेश कोठारी कारोबार के सिलसिले में पटना गए। शिकायत के मुताबिक वहां मितेश ने उन्हें स्थानीय सर्राफा कारोबारियों से मिलने नहीं दिया और हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर बात टालता रहा। उसके इस व्यवहार से विनीत राणावत के भाई को शक हुआ। मुंबई लौटने के बाद उन्होंने पूरी जानकारी दी, जिसके बाद कंपनी ने स्टॉक और रिकॉर्ड की जांच शुरू कराई। दरअसल शक गया कि मुंबई से पटना गया गोल्ड कुछ व्यापारियों तक पहुंचता ही नहीं होगा।
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जांच के दौरान जब तिजोरी में रखे सोने का वजन किया गया और बिक्री-खरीद के रिकॉर्ड का मिलान हुआ तो 6129 ग्राम सोने के गहने कम पाए गए। कंपनी के अनुसार गायब सोने की कीमत करीब 5 करोड़ 80 लाख रुपये है। यह गड़बड़ी पहली बार पिछले महीने 1 जून को सामने आई और दोबारा जांच में भी इसकी पुष्टि हो गई। कंपनी ने इसके बाद सभी कर्मचारियों की आपात बैठक बुलाई। शिकायत के अनुसार सख्ती से पूछताछ और पुलिस में शिकायत की बात सामने आने पर मितेश कोठारी ने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया। 

आरोपी ने स्वीकारा अपना गुनाह
उसने माना कि सोना वही दफ्तर से निकालता था और जिन वाउचरों पर माल निकाला गया, उन पर उसके ही हस्ताक्षर हैं। उसने यह भी दावा किया कि उसने सोना किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दिया, बल्कि एमसीएक्स (कमोडिटी मार्केट) में ट्रेडिंग के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए उसका इस्तेमाल किया। बाद में उसके मोबाइल की जांच में व्हाट्सऐप चैट के जरिए कई लोगों से लगातार संपर्क होने के भी संकेत मिले। शिकायत में कहा गया है कि बाद में कंपनी ने मितेश के पिता और चाचा को भी दफ्तर बुलाया। उनके सामने भी मितेश ने स्वीकार किया कि कुछ लोगों की सलाह पर उसने कमोडिटी ट्रेडिंग में निवेश किया था। कंपनी का दावा है कि मितेश ने 100 रुपये के स्टांप पेपर पर अपना गुनाह कबूल किया है और गवाहों की मौजूदगी में उसका वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया है। उसके पिता ने भी माना कि इस पूरे मामले के लिए उनका बेटा ही जिम्मेदार है।

जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया। कंपनी का आरोप है कि कोल्हापुर के व्यापारियों को लॉजिस्टिक कंपनी के जरिए भेजे जाने वाले सोने के गहनों की कुछ खेपों को मितेश ने रास्ते में ही खुद रिसीव कर लिया और उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाया ही नहीं। शिकायत में वर्ष 2025 के दौरान भेजी गई चार बड़ी खेपों का जिक्र है, जिनका अंतिम हिसाब कंपनी के रिकॉर्ड में नहीं मिला।


विनीत राणावत का आरोप है कि 1 अप्रैल 2025 से 1 जून 2026 के बीच मितेश कोठारी ने अपने पद और उस पर किए गए भरोसे का गलत फायदा उठाकर करोड़ों रुपये के सोने का गबन किया। मुंबई की एल. टी. मार्ग पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। अब मोबाइल चैट, बैंक लेनदेन, लॉजिस्टिक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है, ताकि गायब सोने का पता लगाया जा सके और यह भी स्पष्ट हो सके कि इस पूरे मामले में कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं।
 
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