Shankaracharya Controversy: ‘ना काम के, ना राम के’; अविमुक्तेश्वरानंद के साथ बदसलूकी पर कांग्रेस का BJP पर वार
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ संगम पर हुई बदसलूकी को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार सत्ता के आगे धर्म और आस्था को नजरअंदाज कर रही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। आइए विस्तार से जानते हैं, मामले पर कांग्रेस ने क्या कुछ कहा।
विस्तार
ज्योतिरपीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित बदसलूकी को लेकर कांग्रेस ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि एक सम्मानित संत के साथ हुए व्यवहार ने सरकार की नीयत और आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी ने इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है।
कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार सत्ता और पैसे के पीछे भाग रही है और उसे न धर्म की चिंता है, न आस्था की। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के साथ जो हुआ, वह बेहद शर्मनाक है। कांग्रेस ने दावा किया कि इस घटना के बाद शंकराचार्य अनशन पर हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह उदासीन बनी हुई है।
क्या हुआ संगम पर?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने सैकड़ों अनुयायियों के साथ संगम की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस प्रशासन ने उन्हें बैरिकेड पर रोक दिया। पुलिस के मुताबिक, बिना अनुमति और भारी भीड़ के साथ घाट की ओर जाने से सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। अधिकारियों का कहना है कि संत को स्थिति समझाई गई, लेकिन उन्होंने आगे बढ़ने पर जोर दिया और बाद में स्नान किए बिना लौट गए।
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कांग्रेस का आरोप क्या है?
- कांग्रेस का कहना है कि यह मामला केवल सुरक्षा से जुड़ा नहीं है, बल्कि एक संत के सम्मान का भी सवाल है।
- पार्टी के अनुसार संत के साथ हुआ व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
- खेड़ा का कहना है कि सरकार उन संतों को निशाना बना रही है जो उसकी नीतियों की आलोचना करते हैं।
- उन्होंने आरोप लगाया कि जो संत सरकार की प्रशंसा नहीं करते, उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।
भाजपा और प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि सभी संतों और श्रद्धालुओं का सम्मान किया जाता है, लेकिन करोड़ों लोगों की मौजूदगी वाले आयोजन में सुरक्षा सर्वोपरि होती है। पुलिस ने साफ किया कि किसी के साथ भेदभाव नहीं किया गया और यह फैसला केवल भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिहाज से लिया गया।
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राजनीति क्यों गरमाई?
इस मुद्दे ने सियासी रंग इसलिए ले लिया क्योंकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की ‘दोहरे मापदंड’ की राजनीति बताया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब अन्य धार्मिक नेताओं को विशेष सुरक्षा दी जाती है, तो शंकराचार्य के साथ ऐसा व्यवहार क्यों हुआ। पार्टी ने इसे आस्था और धर्म के अपमान से जोड़ते हुए बड़ा राजनीतिक हमला बोला।
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